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जिले के 80 गांव होंगे कुपोषण मुक्त
Updated Wed, 27 Sep 2017 05:19 PM IST
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महराजगंज। जिले के 80 गांव कुपोषण मुक्त किए जाएंगे। चयनित गांवों के बच्चों को कुपोषण से बचाव के लिए तैयारी तेज कर दी गई है। इन गांवों के लोगों को कुपोषण दूर करने के लिए योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।
कुपोषण दूर करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में 6 से 8 गांवों का चयन किया गया है। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाने और कुपोषण दूर करने के लिए व्यवस्था की जाएगी। इन सभी गांवों में योजनाओं के क्रियान्वयन की मानीटरिंग के लिए जिला स्तरीय 40 अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना के तहत शिशु पोषण स्तर मेें सुधार, गर्भवती व धात्री के स्वास्थ्य में सुधार और स्वच्छता पर विशेष ध्यान चयनित गांवों में दिया जाएगा। जिन 80 गांवों का चयन हुआ है, चयन में कई बिंदुओं को केंद्र में रखा गया है। खुले में शौच से मुक्त अथवा इसके लिए प्रयासरत गांवों में कुपोषण की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए चयन किया गया है।
वर्ष 2022 तक कुपोषण मुक्त भारत का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत तीन प्रमुख मानक तय किए गए हैं। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों में यह देखा जाएगा कि उम्र के हिसाब से उनकी लंबाई बढ़ रही है अथवा नहीं। वजन पर भी ध्यान दिया जाएगा। बच्चों के विकसित न होने के कारण की जांच की जाएगी। इसके लिए चार विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, जल निगम और पंचायती राज विभाग को इस कार्य में लगाया गया है। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास परियोजना अजात शत्रु शाही का कहना है कि कुपोषण को दूर करने के लिए 80 राजस्व गांवों का चयन किया गया है। इस संबंध में शासन स्तर से जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्य किए जाएंगे।
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कुपोषण दूर करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में 6 से 8 गांवों का चयन किया गया है। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाने और कुपोषण दूर करने के लिए व्यवस्था की जाएगी। इन सभी गांवों में योजनाओं के क्रियान्वयन की मानीटरिंग के लिए जिला स्तरीय 40 अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना के तहत शिशु पोषण स्तर मेें सुधार, गर्भवती व धात्री के स्वास्थ्य में सुधार और स्वच्छता पर विशेष ध्यान चयनित गांवों में दिया जाएगा। जिन 80 गांवों का चयन हुआ है, चयन में कई बिंदुओं को केंद्र में रखा गया है। खुले में शौच से मुक्त अथवा इसके लिए प्रयासरत गांवों में कुपोषण की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए चयन किया गया है।
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वर्ष 2022 तक कुपोषण मुक्त भारत का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत तीन प्रमुख मानक तय किए गए हैं। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों में यह देखा जाएगा कि उम्र के हिसाब से उनकी लंबाई बढ़ रही है अथवा नहीं। वजन पर भी ध्यान दिया जाएगा। बच्चों के विकसित न होने के कारण की जांच की जाएगी। इसके लिए चार विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, जल निगम और पंचायती राज विभाग को इस कार्य में लगाया गया है। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास परियोजना अजात शत्रु शाही का कहना है कि कुपोषण को दूर करने के लिए 80 राजस्व गांवों का चयन किया गया है। इस संबंध में शासन स्तर से जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्य किए जाएंगे।
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