{"_id":"594eb5414f1c1b55178b4749","slug":"161498330433-maharajganj-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोंड समाज ने मनाया महारानी दुर्गावती का बलिदान दिवस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोंड समाज ने मनाया महारानी दुर्गावती का बलिदान दिवस
Updated Sun, 25 Jun 2017 12:23 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महराजगंज/नौतनवां। महारानी दुुर्गावती के बलिदान दिवस पर अखिल भारत वर्षीय गोंड महासभा ने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इसमें गोंड धुरिया समुदाय के गौरवशाली इतिहास पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि महारानी दुुर्गावती के युद्ध कौशल का लोहा दुश्मन भी मानते थे। विषम परिस्थितियों में भी महारानी दुुर्गावती हार नहीं मानीं। इस दौरान जिलाध्यक्ष राजमंगल गौड, गुलाब चंद गौड, शिव प्रताप, जितेन्द्र, कपिलदेव, रामशरण, हरिश्चंद्र, श्रीनिवास, जितेंद्र, वीरू गौड़, उदयभान, शिवदास, आशीश, शंभू आदि मौजूद रहे।
अखिल भारतीय धुरिया गोंड समाज की तहसील इकाई ने पुराना नौतनवां काली मंदिर परिसर में महारानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण से कार्यक्रम की शुरुआत की। जिला उपाध्यक्ष बालकिशुन धुरिया ने कहा कि महारानी दुर्गावती राजा चंदेल की अकेली संतान थीं। वह गोंडवाना राज्य के 52 किले और 70 हजार गांव की साम्राज्ञी थीं। पुत्र की पांच साल उम्र होते ही महारानी दुुर्गावती ने किलों और गांवों की बागडोर संभाल ली थी। दुर्गावती की वीरता और सुंदरता की कहानी चारों ओर फैल चुकी थी। जिसको देखकर राजा अकबर को जलन होने लगी और अकबर ने अपनी सेना गोंडवाना भेज दी। महारानी ने बहादुरी के साथ अकबर की सेना का मुकाबला किया और मार गिराया। युद्ध में उनकी विजय निश्चित थी। लेकिन तभी बरसात शुरू हो गई और युद्ध स्थल, नाले और नदी में बाढ़ आ गई। रानी का हाथी नाला नहीं पार कर सका। इसी बीच एक तीर रानी की आंख में घुस गई। उसके बावजूद रानी ने तीर को निकाल फेंका और युद्ध में डटी रहीं। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और 24 जून 1564 को अपना शरीर त्याग दिया। इस मौके पर नगर अध्यक्ष राजकुमार गोंड, तहसील अध्यक्ष इंद्रजीत गोंड, अखिलेश गोंड, विभूति गोंड, नन्दलाल गोंड, रामकिशुन गोंड, राजेंद्र गोंड, रामरती, महेश गोंड, बेचन, रामाज्ञा, सुभावती, बिन्दू, बैद्यनाथ, अनिल, सुनील, राजेंद्र सहित गोंड समाज के अन्य लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
अखिल भारतीय धुरिया गोंड समाज की तहसील इकाई ने पुराना नौतनवां काली मंदिर परिसर में महारानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण से कार्यक्रम की शुरुआत की। जिला उपाध्यक्ष बालकिशुन धुरिया ने कहा कि महारानी दुर्गावती राजा चंदेल की अकेली संतान थीं। वह गोंडवाना राज्य के 52 किले और 70 हजार गांव की साम्राज्ञी थीं। पुत्र की पांच साल उम्र होते ही महारानी दुुर्गावती ने किलों और गांवों की बागडोर संभाल ली थी। दुर्गावती की वीरता और सुंदरता की कहानी चारों ओर फैल चुकी थी। जिसको देखकर राजा अकबर को जलन होने लगी और अकबर ने अपनी सेना गोंडवाना भेज दी। महारानी ने बहादुरी के साथ अकबर की सेना का मुकाबला किया और मार गिराया। युद्ध में उनकी विजय निश्चित थी। लेकिन तभी बरसात शुरू हो गई और युद्ध स्थल, नाले और नदी में बाढ़ आ गई। रानी का हाथी नाला नहीं पार कर सका। इसी बीच एक तीर रानी की आंख में घुस गई। उसके बावजूद रानी ने तीर को निकाल फेंका और युद्ध में डटी रहीं। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और 24 जून 1564 को अपना शरीर त्याग दिया। इस मौके पर नगर अध्यक्ष राजकुमार गोंड, तहसील अध्यक्ष इंद्रजीत गोंड, अखिलेश गोंड, विभूति गोंड, नन्दलाल गोंड, रामकिशुन गोंड, राजेंद्र गोंड, रामरती, महेश गोंड, बेचन, रामाज्ञा, सुभावती, बिन्दू, बैद्यनाथ, अनिल, सुनील, राजेंद्र सहित गोंड समाज के अन्य लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन