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Maharajganj News: पोषण सखी बनेंगी समूह की 120 महिलाएं, मिलेगा प्रशिक्षण
Fri, 30 May 2025 12:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 30 May 2025 12:47 AM IST
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महराजगंज। ग्रामीण आजीविका मिशन से ब्लाॅकवार 10-10 महिला सदस्यों का चयन पोषण सखी के रूप में किया जाएगा। जनपद में कुल 120 पोषण सखियां बनेंगी, जिन्हें प्रशिक्षण देकर गर्भवतियों के प्रसव और बच्चों के पोषण से संबंधित जानकारी देकर ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
यह सखियां महिलाओं को गर्भावस्था, प्रसव, स्तनपान, बच्चों के पोषण तथा बीमारी की रोकथाम के लिए जागरूक करेंगी। महिलाओं को स्वरोजगार से छोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रामीण अजीविका मिशन को मजबूत किया जा रहा है। जिले में चार हजार सक्रिय समूहों से लगभग 10 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। अब इन्हीं समूह सदस्यों में से हर ब्लॉक से 10 महिला सदस्यों का चयन एडीओ आईएसबी करेंगे।
120 एफएनएचडब्ल्यू (भोजन, पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता) सखियां बनेंगी। इन्हें प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता का महत्व समझाया जाएगा। यह सखियां गांव में जाकर महिलाओं गर्भावस्था, प्रसव, स्तनपान, बच्चों के पोषण तथा बीमारी की रोकथाम के लिए जागरूक करेंगी।
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इससे समूह की महिलाओं को न सिर्फ रोजगार का एक जरिया मिल जाएगा, बल्कि कुपोषण, टीकाकरण, बीमारियों से बचाव के सरकारी प्रयास को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण महिलाओं के इलाज खर्च बचेगा और आहार की सही जानकारी मिलने से कुपोषण की समस्या खत्म होने के साथ ही माताओं के साथ बच्चे भी सेहतमंद होंगे।
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यह सखियां महिलाओं को गर्भावस्था, प्रसव, स्तनपान, बच्चों के पोषण तथा बीमारी की रोकथाम के लिए जागरूक करेंगी। महिलाओं को स्वरोजगार से छोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रामीण अजीविका मिशन को मजबूत किया जा रहा है। जिले में चार हजार सक्रिय समूहों से लगभग 10 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। अब इन्हीं समूह सदस्यों में से हर ब्लॉक से 10 महिला सदस्यों का चयन एडीओ आईएसबी करेंगे।
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120 एफएनएचडब्ल्यू (भोजन, पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता) सखियां बनेंगी। इन्हें प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता का महत्व समझाया जाएगा। यह सखियां गांव में जाकर महिलाओं गर्भावस्था, प्रसव, स्तनपान, बच्चों के पोषण तथा बीमारी की रोकथाम के लिए जागरूक करेंगी।
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इससे समूह की महिलाओं को न सिर्फ रोजगार का एक जरिया मिल जाएगा, बल्कि कुपोषण, टीकाकरण, बीमारियों से बचाव के सरकारी प्रयास को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण महिलाओं के इलाज खर्च बचेगा और आहार की सही जानकारी मिलने से कुपोषण की समस्या खत्म होने के साथ ही माताओं के साथ बच्चे भी सेहतमंद होंगे।