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धान की बालियों पर हो राहा रोग का हमला
Updated Sun, 14 Oct 2018 11:54 PM IST
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धान की बालियों पर कीटों का हमला
बालियों के रस चट कर रहे कीट
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। जिले में इस बार धान की फसल अच्छी हुई है। लेकिन धान की पिछैती फसल बोने वाले किसान इन दिनों परेशान हैं। उनकी धान की बालियां पर कीट हमला बोल रहे रहे हैं। बालियों के रस को चूस कर उन्हें खोखला कर दे रहे हैं। किसानों की इस चिंता को देख कर कृषि वैज्ञानिकों ने उन्हें कीटनाशक छिडकाव का सुझाव दिया है। बता दें कि अक्तूबर के पहले पखवारे में कुछ किसानो के धान पक गये हैं। लेकिन 60 से 70 प्रतिशत के करीब किसान ऐसे है जिन्होंने धान की पिछैती फसल बोई है। इनके धान में अभी बालियां निकल रही हैं। मौसमी परिवर्तन के चलते इन बालियों में कई प्रकार से रोग लगने शुरू हो गए हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान फसलों को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह ले रहे हैं। घुघली विकास खंड के हरखा गांव के किसान रामाश्रय पाडेय ने कहा कि ने कहा कि खेत में बाली निकल रही है। डर लग रहा है कि कहीं बाली पर रोग न लगें। आस पास कई खेत में रोग लगें हैं। विश्वेसर यादव ने कहा कि फसल में रोग के कारण कीट बाली का रस चूस लेते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र वसूली के वैज्ञानिक डॉ. बीबी सिंह ने कहा कि कि धान को कीट पतंगो और रोगों से मुक्त करने के लिए बुआई के समय ही बीज शोधन कराना चाहिए, संतुलित उर्वरक का प्रयोग करने के अलावा धान की फसल में पानी की कमी नहीं होने दें। अगर रोग लग गया है तो उसके हिसाब से कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें। जिला कृषि अधिकारी रवि मणि तिवारी ने कहा कि अगेती धान की फसल पक चूकी है। पिछैती धान की फसल में बालियां निकल रहीं है। इस समय किसानों को फसलों में खास ध्यान देने की जरूरत है, धान में कीट लगने की शिकायत मिल रही है। तो विभाग की ओर से कृषि रक्षा इकाइयों से दवा व सुझाव अपनाकर फसलों को बचाया का बचाव करें।
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कीट से छुटकारा के लिए करें प्रयोग
कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक धान की बालियां निकलने के बाद कुछ कीट लगते है। यह बालियों में बैठकर दाना बनने से पहले ही बालियों के अंदर का रस चूस लेते है, इससे दाना नहीं बनता है। किसान इसका जैविक उपचार करें, रसायनिक उपचार फेनवरल या मैलाथियान आदि का छिडकाव करें। इससे कीटो से छुटकारा मिल सकता है।
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धान की बालियों पर कीटों का हमला
बालियों के रस चट कर रहे कीट
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। जिले में इस बार धान की फसल अच्छी हुई है। लेकिन धान की पिछैती फसल बोने वाले किसान इन दिनों परेशान हैं। उनकी धान की बालियां पर कीट हमला बोल रहे रहे हैं। बालियों के रस को चूस कर उन्हें खोखला कर दे रहे हैं। किसानों की इस चिंता को देख कर कृषि वैज्ञानिकों ने उन्हें कीटनाशक छिडकाव का सुझाव दिया है। बता दें कि अक्तूबर के पहले पखवारे में कुछ किसानो के धान पक गये हैं। लेकिन 60 से 70 प्रतिशत के करीब किसान ऐसे है जिन्होंने धान की पिछैती फसल बोई है। इनके धान में अभी बालियां निकल रही हैं। मौसमी परिवर्तन के चलते इन बालियों में कई प्रकार से रोग लगने शुरू हो गए हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान फसलों को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह ले रहे हैं। घुघली विकास खंड के हरखा गांव के किसान रामाश्रय पाडेय ने कहा कि ने कहा कि खेत में बाली निकल रही है। डर लग रहा है कि कहीं बाली पर रोग न लगें। आस पास कई खेत में रोग लगें हैं। विश्वेसर यादव ने कहा कि फसल में रोग के कारण कीट बाली का रस चूस लेते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र वसूली के वैज्ञानिक डॉ. बीबी सिंह ने कहा कि कि धान को कीट पतंगो और रोगों से मुक्त करने के लिए बुआई के समय ही बीज शोधन कराना चाहिए, संतुलित उर्वरक का प्रयोग करने के अलावा धान की फसल में पानी की कमी नहीं होने दें। अगर रोग लग गया है तो उसके हिसाब से कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें। जिला कृषि अधिकारी रवि मणि तिवारी ने कहा कि अगेती धान की फसल पक चूकी है। पिछैती धान की फसल में बालियां निकल रहीं है। इस समय किसानों को फसलों में खास ध्यान देने की जरूरत है, धान में कीट लगने की शिकायत मिल रही है। तो विभाग की ओर से कृषि रक्षा इकाइयों से दवा व सुझाव अपनाकर फसलों को बचाया का बचाव करें।
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कीट से छुटकारा के लिए करें प्रयोग
कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक धान की बालियां निकलने के बाद कुछ कीट लगते है। यह बालियों में बैठकर दाना बनने से पहले ही बालियों के अंदर का रस चूस लेते है, इससे दाना नहीं बनता है। किसान इसका जैविक उपचार करें, रसायनिक उपचार फेनवरल या मैलाथियान आदि का छिडकाव करें। इससे कीटो से छुटकारा मिल सकता है।
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