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पीएफ की मांग के लिए बिजली अधिकारी व कर्मचारियों ने दिया धरना
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पीएफ की मांग को लेकर प्रदर्शन करते विद्युत अधिकारी व कर्मचारी
- फोटो : LALITPUR
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बिजली कर्मचारियों ने मांगा बकाया पचास करोड़
ललितपुर। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन में सीपीएफ घोटाला सामने आने के बाद जिले के बिजली कर्मचारी भी पीएफ की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। बिजली कर्मचारियों को अब तक का लगभग पचास करोड़ रुपये से अधिक का पीएफ नहीं मिल सका है। बुधवार को जूनियर इंजीनियर्स के साथ अधिकारियों ने भी धरना देकर नारेबाजी की।
विभिन्न सर्किल, खंडीय, उप खंडीय विद्युत कार्यालयों व सब स्टेशनों के अंतर्गत 80 से अधिक बिजली अधिकारी व कर्मचारी हैं। इनका कई वर्षों से अब तक अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) नहीं मिला है। पीएफ घोटाला सामने आने के बाद बिजली कर्मचारियों को पीएफ की रकम डूबने की चिंता सताने लगी है। बुधवार को विद्युत इंजीनियर्स ने सर्किल कार्यालय में एकत्रित होकर धरना दिया और पीएफ रकम दिलाने की मांग की। किसी कर्मचारी का पीएफ लगभग दस हजार रुपये तो किसी का बीस हजार रुपये कटता है, जिसके हिसाब से एक वर्ष का पीएफ लगभग दस लाख रुपये होता है। इस हिसाब से अब तक पेंशनधारी और वर्तमान कर्मचारियों का पीएफ लगभग पचास करोड़ रुपये से अधिक है।
बुधवार को धरने में उपखंड अधिकारियों को अधीक्षण अभियंता पीआर सिंह का सहयोग मिला और वह भी धरना में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि 14 जनवरी वर्ष 2000 को बिजली बोर्ड के गठन के करीब तीन वर्ष बाद 18 जून 2004 को उत्तर प्रदेश ऊर्जा निगमों के कर्मचारी जो वर्ष 2000 के बाद से सेवा में आए, उनके लिए सीपीएफ ट्रस्ट का गठन किया गया और इससे पूर्व के कर्मचारियों के लिए जीपीएफ ट्रस्ट की व्यवस्था की गई। ट्रस्ट में विभाग के कर्मचारी के वेतन का दस प्रतिशत अंश जीपीएफ खाते में जमा किया जाता है। इंजीनियर्स संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगदीश प्रसाद ने कहा कि सरकार ने पुरानी पेंशन बंद कर अपाहिज बना दिया है। सेवानिवृत्ति के बाद सीपीएफ फंड का सहारा भी निजी घरानों को देकर कुठाराघात किया है।
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इस मौके पर अध्यक्ष विनय साहू, राजकुमार, पंकज मौर्य, नेहा पांडेय, एसपी सिंह, रामबहादुर, हरप्रसाद, चंद्रप्रकाश, सुनील कुमार पाल, जगदीश प्रसाद झा आदि उपस्थित रहे।
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ललितपुर। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन में सीपीएफ घोटाला सामने आने के बाद जिले के बिजली कर्मचारी भी पीएफ की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। बिजली कर्मचारियों को अब तक का लगभग पचास करोड़ रुपये से अधिक का पीएफ नहीं मिल सका है। बुधवार को जूनियर इंजीनियर्स के साथ अधिकारियों ने भी धरना देकर नारेबाजी की।
विभिन्न सर्किल, खंडीय, उप खंडीय विद्युत कार्यालयों व सब स्टेशनों के अंतर्गत 80 से अधिक बिजली अधिकारी व कर्मचारी हैं। इनका कई वर्षों से अब तक अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) नहीं मिला है। पीएफ घोटाला सामने आने के बाद बिजली कर्मचारियों को पीएफ की रकम डूबने की चिंता सताने लगी है। बुधवार को विद्युत इंजीनियर्स ने सर्किल कार्यालय में एकत्रित होकर धरना दिया और पीएफ रकम दिलाने की मांग की। किसी कर्मचारी का पीएफ लगभग दस हजार रुपये तो किसी का बीस हजार रुपये कटता है, जिसके हिसाब से एक वर्ष का पीएफ लगभग दस लाख रुपये होता है। इस हिसाब से अब तक पेंशनधारी और वर्तमान कर्मचारियों का पीएफ लगभग पचास करोड़ रुपये से अधिक है।
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बुधवार को धरने में उपखंड अधिकारियों को अधीक्षण अभियंता पीआर सिंह का सहयोग मिला और वह भी धरना में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि 14 जनवरी वर्ष 2000 को बिजली बोर्ड के गठन के करीब तीन वर्ष बाद 18 जून 2004 को उत्तर प्रदेश ऊर्जा निगमों के कर्मचारी जो वर्ष 2000 के बाद से सेवा में आए, उनके लिए सीपीएफ ट्रस्ट का गठन किया गया और इससे पूर्व के कर्मचारियों के लिए जीपीएफ ट्रस्ट की व्यवस्था की गई। ट्रस्ट में विभाग के कर्मचारी के वेतन का दस प्रतिशत अंश जीपीएफ खाते में जमा किया जाता है। इंजीनियर्स संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगदीश प्रसाद ने कहा कि सरकार ने पुरानी पेंशन बंद कर अपाहिज बना दिया है। सेवानिवृत्ति के बाद सीपीएफ फंड का सहारा भी निजी घरानों को देकर कुठाराघात किया है।
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इस मौके पर अध्यक्ष विनय साहू, राजकुमार, पंकज मौर्य, नेहा पांडेय, एसपी सिंह, रामबहादुर, हरप्रसाद, चंद्रप्रकाश, सुनील कुमार पाल, जगदीश प्रसाद झा आदि उपस्थित रहे।