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Lalitpur News: अंतिम यात्रा में नम आंखों से दी अंशुल को आखिरी विदाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन (ललितपुर)। अयोध्या से लौटते समय हुए सड़क हादसे में नौ लोगों की मौत के बाद तीसरे दिन भी खरवाचपुरा मोहल्ले में मातम पसरा रहा। बुधवार तड़के जैसे ही अंशुल तिवारी का शव घर पहुंचा, परिजनों की चीख-पुकार से माहौल द्रवित हो उठा। सुबह करीब 8:30 बजे शवयात्रा वेदपुर स्थित मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई, जहां अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।
झांसी-कानपुर हाईवे पर चौरासी गुंबद के पास सोमवार को हुए भीषण हादसे में घायल अंशुल तिवारी की मंगलवार को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई। बुधवार तड़के एंबुलेंस से जैसे ही उनका शव मोहल्ला खरवाचपुरा स्थित घर पहुंचा, कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में घर पर जुट गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बहनें बार-बार बेसुध हो रहीं थीं, पिता गहरे सदमे में थे और दिव्यांग मां की हालत देख हर किसी की आंखें नम हो उठीं। कुछ देर बाद शवयात्रा मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। लोगों ने शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।
दो छोटी बहनों का सहारा छिना
अंशुल परिवार का एकमात्र सहारा था। वह छोटे-मोटे काम कर घर का भरण-पोषण करता था। कम उम्र में ही उसने पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली थी। दिव्यांग मां की देखभाल और दो छोटी बहनों की परवरिश का भार उसी पर था। उसकी असमय मौत से परिवार के सामने आजीविका और भविष्य की बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है।
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फोटो-3
अंतिम सेल्फी बनी याद
अयोध्या धाम के सरयू तट पर अंशुल द्वारा ली गई अंतिम सेल्फी अब याद बनकर रह गई है। सोशल मीडिया पर लोग इस तस्वीर को साझा कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अंशुल अपने जिम्मेदार और मिलनसार स्वभाव के कारण परिवार व क्षेत्र में काफी प्रिय था। उसके निधन से सभी को गहरा आघात पहुंचा है।
फोटो-4
हरिहर मोहन की हालत में सुधार
हादसे में घायल हरिहर मोहन तिवारी का कानपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। उनके छोटे भाई सुशील तिवारी के अनुसार उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। क्षेत्र के लोग उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
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सिलावन (ललितपुर)। अयोध्या से लौटते समय हुए सड़क हादसे में नौ लोगों की मौत के बाद तीसरे दिन भी खरवाचपुरा मोहल्ले में मातम पसरा रहा। बुधवार तड़के जैसे ही अंशुल तिवारी का शव घर पहुंचा, परिजनों की चीख-पुकार से माहौल द्रवित हो उठा। सुबह करीब 8:30 बजे शवयात्रा वेदपुर स्थित मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई, जहां अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।
झांसी-कानपुर हाईवे पर चौरासी गुंबद के पास सोमवार को हुए भीषण हादसे में घायल अंशुल तिवारी की मंगलवार को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर नौ हो गई। बुधवार तड़के एंबुलेंस से जैसे ही उनका शव मोहल्ला खरवाचपुरा स्थित घर पहुंचा, कोहराम मच गया। सूचना मिलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में घर पर जुट गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बहनें बार-बार बेसुध हो रहीं थीं, पिता गहरे सदमे में थे और दिव्यांग मां की हालत देख हर किसी की आंखें नम हो उठीं। कुछ देर बाद शवयात्रा मुक्तिधाम के लिए रवाना हुई। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। लोगों ने शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया।
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दो छोटी बहनों का सहारा छिना
अंशुल परिवार का एकमात्र सहारा था। वह छोटे-मोटे काम कर घर का भरण-पोषण करता था। कम उम्र में ही उसने पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली थी। दिव्यांग मां की देखभाल और दो छोटी बहनों की परवरिश का भार उसी पर था। उसकी असमय मौत से परिवार के सामने आजीविका और भविष्य की बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है।
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अंतिम सेल्फी बनी याद
अयोध्या धाम के सरयू तट पर अंशुल द्वारा ली गई अंतिम सेल्फी अब याद बनकर रह गई है। सोशल मीडिया पर लोग इस तस्वीर को साझा कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अंशुल अपने जिम्मेदार और मिलनसार स्वभाव के कारण परिवार व क्षेत्र में काफी प्रिय था। उसके निधन से सभी को गहरा आघात पहुंचा है।
फोटो-4
हरिहर मोहन की हालत में सुधार
हादसे में घायल हरिहर मोहन तिवारी का कानपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। उनके छोटे भाई सुशील तिवारी के अनुसार उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। क्षेत्र के लोग उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।