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वैज्ञानिकों ने कृषकों को दी शीतकालीन सब्जियों के बारे में जानकारी
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ललितपुर। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, ललितपुर के सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें गृह वैज्ञानिक डॉ. सरिता देवी ने खाद्य पदार्थों के महत्व पर चर्चा की। विश्व खाद्य दिवस को मनाए जाने के मुख्य कारण दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित और उन्नत करना है। विश्व खाद्य दिवस मनाने के पीछे जो उद्देश्य हैं, वो बढ़ती हुई जनसंख्या, भुखमरी और खाद्य संकट के प्रति जागरूकता को बढ़ाना है। साथ ही साथ पोषक आहार के विषय में भी चर्चा हुई, जो शारीरिक व मानसिक विकास के लिए जरूरी है।
इन पोषक तत्वों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, मिनरल्स, पानी, आयरन जिंक, मैगनीशियम, फाइबर जिसमें इनके सेवन से शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होने पाती है और शरीर में जब पोषक तत्वों की कमी नहीं होगी तो शरीर निरोगी रहेग। हम सभी जानते हैं मनुष्य की सबसे बडी संपत्ति उसका स्वास्थ्य है इसलिए संतुलित आहार का सेवन करें व समय का भी समुचित ध्यान रखें। वैज्ञानिक, डॉ. अर्चना दीक्षित ने शीत कालीन सब्जियों के बारे में कृषकों को बताया। उन्होंने कैसे इसकी नर्सरी तैयार करें एवं पोषण युक्त सब्जियों की खेती जैसे ब्रोकोली, लाल पत्तागोभी, चुकंदर, लाल चैलाई आदि की जानकारी दी।
उन्होंने केंद्र पर फल पौधरोपण करवाते हुए कृषकों को घरों में फल के पेड़ लगाकर अपने परिवार को स्वस्थ रखने की सलाह दी। कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ दिनेश तिवारी द्वारा कृषकों को मोटे अनाज के बारे में जानकारी दी और पोषक तत्वों के महत्व के बारे में बताया। डॉ. एनके पांडेय द्वारा कुपोषण की समस्या, स्वच्छता तथा मानव जीवन में पोषक तत्वों की उपयोगिता के बारे में बताया गया। पशुपालन वैज्ञानिक, डॉ. मारूफ अहमद ने पशुओं में होने वाली बीमारी व उनसे बचाव के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि पशुपालन से प्राप्त होने वाले उत्पाद हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं जिनसे हमें बहुत सारे पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। इस कार्यक्रम में 40 से अधिक कृषक एवं कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
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इन पोषक तत्वों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, मिनरल्स, पानी, आयरन जिंक, मैगनीशियम, फाइबर जिसमें इनके सेवन से शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होने पाती है और शरीर में जब पोषक तत्वों की कमी नहीं होगी तो शरीर निरोगी रहेग। हम सभी जानते हैं मनुष्य की सबसे बडी संपत्ति उसका स्वास्थ्य है इसलिए संतुलित आहार का सेवन करें व समय का भी समुचित ध्यान रखें। वैज्ञानिक, डॉ. अर्चना दीक्षित ने शीत कालीन सब्जियों के बारे में कृषकों को बताया। उन्होंने कैसे इसकी नर्सरी तैयार करें एवं पोषण युक्त सब्जियों की खेती जैसे ब्रोकोली, लाल पत्तागोभी, चुकंदर, लाल चैलाई आदि की जानकारी दी।
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उन्होंने केंद्र पर फल पौधरोपण करवाते हुए कृषकों को घरों में फल के पेड़ लगाकर अपने परिवार को स्वस्थ रखने की सलाह दी। कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिक डॉ दिनेश तिवारी द्वारा कृषकों को मोटे अनाज के बारे में जानकारी दी और पोषक तत्वों के महत्व के बारे में बताया। डॉ. एनके पांडेय द्वारा कुपोषण की समस्या, स्वच्छता तथा मानव जीवन में पोषक तत्वों की उपयोगिता के बारे में बताया गया। पशुपालन वैज्ञानिक, डॉ. मारूफ अहमद ने पशुओं में होने वाली बीमारी व उनसे बचाव के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि पशुपालन से प्राप्त होने वाले उत्पाद हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं जिनसे हमें बहुत सारे पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। इस कार्यक्रम में 40 से अधिक कृषक एवं कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
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