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जहां होना था इलाज, वहां अन्ना पशुओं का राज
amarujala
Updated Tue, 25 Jul 2017 12:53 AM IST
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hospital lalitpur news
- फोटो : demo
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डोगराखुर्द । शासन द्वारा करोड़ों रुपये व्यय किए जाने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। इसका ताजा उदाहरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरा है। यहां स्टाफ की कमी बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नाराहट क्षेत्र के ग्राम डोंगराखुर्द में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है लेकिन इसकी बदहाली की ओर किसी का ध्यान नहीं है। इस केंद्र से एक दर्जन से अधिक गांव जुड़े हुए हैं जिनमें ग्राम बरेजा, तरावली, महराज पुरा, देवरी, डोगरा, दिगवार, पटना, पारोल, गुढा, खिरिया, चादोरा, गुरयाना, धोलपुरा, गदोरा, बरोदिया, सिगरबारा शामिल हैं। स्वास्थ्य केंद्र में आए दिन जानवरों का डेरा बना रहता है। सफाई नहीं होने के कारण चारों तरफ़ गंदगी बिखरी रहती है। गेट क्षतिग्रस्त होने से जानवर बिना रोक टोक के अंदर आते जाते हैं। अस्पताल में रखा सामान भी चोरी चला गया है। विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। शासन का स्वास्थ्य केंद्र खोलने के पीछे उद्देश्य ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं देना है। लेकिन, देखरेख के अभाव में हालात जुदा हैं। अस्पताल परिसर में आवासों की हालत गंभीर है। कमरों के अंदर गंदगी गोबर पड़ा हुआ है जिन्हें अस्पताल के स्टाफ को रहने के लिए बनाया गया है। वर्तमान में आवासों का इस्तेमाल जानवर कर रहे हैं। ग्रामीणों ने सीएमओ से अस्पताल में डाक्टरों की तैनाती करने की मांग की है।
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अभी तक नहीं पकड़े गए चोर
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लाखों रुपये की सामग्री चोरी जा चुकी है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग ने अभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया है और न ही आज तक अस्पताल की मरम्मत कराई गई है। फार्मासिस्ट देवेन्द्र कुमार ने बताया कि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चोरी कई बार हो चुकी है। यहां चोरों का बोलबाला बना रहता है।
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झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने को विवश
स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं ध्वस्त होने के कारण ग्रामीणों को झोलाछाप डाक्टरों से उपचार कराने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
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नाराहट क्षेत्र के ग्राम डोंगराखुर्द में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है लेकिन इसकी बदहाली की ओर किसी का ध्यान नहीं है। इस केंद्र से एक दर्जन से अधिक गांव जुड़े हुए हैं जिनमें ग्राम बरेजा, तरावली, महराज पुरा, देवरी, डोगरा, दिगवार, पटना, पारोल, गुढा, खिरिया, चादोरा, गुरयाना, धोलपुरा, गदोरा, बरोदिया, सिगरबारा शामिल हैं। स्वास्थ्य केंद्र में आए दिन जानवरों का डेरा बना रहता है। सफाई नहीं होने के कारण चारों तरफ़ गंदगी बिखरी रहती है। गेट क्षतिग्रस्त होने से जानवर बिना रोक टोक के अंदर आते जाते हैं। अस्पताल में रखा सामान भी चोरी चला गया है। विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। शासन का स्वास्थ्य केंद्र खोलने के पीछे उद्देश्य ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं देना है। लेकिन, देखरेख के अभाव में हालात जुदा हैं। अस्पताल परिसर में आवासों की हालत गंभीर है। कमरों के अंदर गंदगी गोबर पड़ा हुआ है जिन्हें अस्पताल के स्टाफ को रहने के लिए बनाया गया है। वर्तमान में आवासों का इस्तेमाल जानवर कर रहे हैं। ग्रामीणों ने सीएमओ से अस्पताल में डाक्टरों की तैनाती करने की मांग की है।
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अभी तक नहीं पकड़े गए चोर
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लाखों रुपये की सामग्री चोरी जा चुकी है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग ने अभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया है और न ही आज तक अस्पताल की मरम्मत कराई गई है। फार्मासिस्ट देवेन्द्र कुमार ने बताया कि इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चोरी कई बार हो चुकी है। यहां चोरों का बोलबाला बना रहता है।
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झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने को विवश
स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं ध्वस्त होने के कारण ग्रामीणों को झोलाछाप डाक्टरों से उपचार कराने के लिए विवश होना पड़ रहा है।