{"_id":"3c3b3bfbf9bee1ac4b890087708057a5","slug":"water-will-institute-a-24-hour-power-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जल संस्थान को मिलेगी 24 घंटे बिजली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जल संस्थान को मिलेगी 24 घंटे बिजली
ललितपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2015 02:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद अब डोड़ाघाट शोधित प्लांट को 24 घंटे बिजली मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इससे नगर में स्थित पानी की टंकियां आसानी से भर जाएंगी, जिसका लाभ नगरवासियों को सुचारु पेयजलापूर्ति के रूप में मिलेगा। डोड़ाघाट के लिए यह रोस्टर तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
जल संस्थान नगर को अपर व लोअर जोन दो भागों में बांटकर जलापूर्ति करता है। गोविंद सागर बांध से आने वाले कच्चे पानी को डोड़ाघाट शोधित प्लांट व नझाई बाजार शोधित प्लांट में पानी साफ करने के बाद टंकियों को भरा जाता है। नगर में विभिन्न क्षमता की छह टंकियों को भरने के लिए औसतन 16-17 घंटे बिजली की जरुरत होती है, लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण टंकियां नहीं भर पा रही थीं। यह समस्या वर्षों से चली आ रही थी।
इसको देखते हुए जल संस्थान के अधिशासी अभियंता ने सेपरेट फीडर की मांग की, जिस पर शासन ने करीब 70 लाख रुपए स्वीकृत कर दिए और छह माह पहले सेपरेट फीडर बना दिया गया। लेकिन, 24 घंटे बिजली नहीं मिलने के कारण टंकियों को भरने का संकट दूर नहीं हुआ। पानी नहीं पहुंचने की शिकायतें जल संस्थान अफसरों के पास लगातार आ रही थीं। इस पर अधिशासी अभियंता आर एस चौधरी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर सेपरेट फीडर के लिए 24 घंटे बिजली दिलाए जाने की मांग रखी। नगर की प्रमुख समस्या होने के कारण जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा।
विज्ञापन
विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता प्रशांत सिंह ने सोमवार को रौंड़ा पावर हाउस से डोड़ाघाट सेपरेट फीडर के लिए 24 घंटे बिजली देने के निर्देश दिए। पर्याप्त बिजली मिलने से नगर में सुचारु जलापूर्ति का रास्ता साफ हो गया।
इन मुहल्लों में होती थी परेशानी
पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण शहर के मुहल्ला नेहरू नगर वार्ड नंबर चार व छह, गांधीनगर, स्टेशन रोड, टोरिया मुहल्ला, चांदमारी, खिरकापुरा, नारायणपुरा, चौबयाना, बंशीपुरा, रामनगर, अजीतापुरा, लकडय़ापुरा आदि में पानी की परेशानी बनी रहती थी। मुहल्लेवासी पर्याप्त जल नहीं आने की शिकायतें लगातार करते रहते थे, लेकिन अब सुचारु आपूर्ति मिलने से इन मुहल्लों में पेयजल पहुंचना आसान हो जाएगा।
रोस्टिंग के नाम पर होती रही कटौती
विद्युत विभाग के अफसरों को संबोधित लखनऊ स्थित पारेषण से आए रिमांइडर में बताया गया कि मई 2015 से दिसंबर 2015 तक डोंड़ाघाट के लिए 24 घंटे बिजली दी जा रही है, लेकिन रौंडा से 5 जुलाई से नझाई बाजार स्थित 33 केवीए उप बिजलीघर से लगातार रोस्टिंग होती रही। इस कारण डोंड़ाघाट को बिजली नहीं मिल सकी। इसका खामियाजा नगर के लोग भुगतते रहे हैं।
लगातार बिजली मिलनी जरूरी
जल संस्थान के सेपरेड फीडर से 40, 30 और 20 हार्सपावर की विभिन्न मोटरें जुड़ी हुई हैं। पानी की टंकियां ऊंचाई पर होने के कारण लगातार बिजली मिलनी जरूरी है। यदि कुछ मिनट ही बिजली जाती है तो फिर से पाइप को भरने व पानी चढ़ाने में कई अधिक घंटे खर्च करने पड़ते हैं। इस स्थिति से हमेशा परेशानी बनी रहती है।
अफसर आमने- सामने
विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता प्रशांत सिंह का कहना है कि डोंड़ाघाट को लगातार 24 घंटे बिजली दी जा रही है, सिर्फ जुलाई माह में रोंड़ा से रोस्टिंग के नाम पर बिजली कटौती की जा रही है। वहीं, अधिशासी अभियंता जल संस्थान आरएस चौधरी का कहना है कि जब से सेपरेट फीडर चालू किया गया, तब से लेकर अब तक 24 घंटे बिजली नहीं दी गई। बीच-बीच में होने वाली कटौती से पानी चढ़ाने में कई घंटे अनावश्यक लग जाते हैं।
विज्ञापन
जल संस्थान नगर को अपर व लोअर जोन दो भागों में बांटकर जलापूर्ति करता है। गोविंद सागर बांध से आने वाले कच्चे पानी को डोड़ाघाट शोधित प्लांट व नझाई बाजार शोधित प्लांट में पानी साफ करने के बाद टंकियों को भरा जाता है। नगर में विभिन्न क्षमता की छह टंकियों को भरने के लिए औसतन 16-17 घंटे बिजली की जरुरत होती है, लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण टंकियां नहीं भर पा रही थीं। यह समस्या वर्षों से चली आ रही थी।
विज्ञापन
इसको देखते हुए जल संस्थान के अधिशासी अभियंता ने सेपरेट फीडर की मांग की, जिस पर शासन ने करीब 70 लाख रुपए स्वीकृत कर दिए और छह माह पहले सेपरेट फीडर बना दिया गया। लेकिन, 24 घंटे बिजली नहीं मिलने के कारण टंकियों को भरने का संकट दूर नहीं हुआ। पानी नहीं पहुंचने की शिकायतें जल संस्थान अफसरों के पास लगातार आ रही थीं। इस पर अधिशासी अभियंता आर एस चौधरी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर सेपरेट फीडर के लिए 24 घंटे बिजली दिलाए जाने की मांग रखी। नगर की प्रमुख समस्या होने के कारण जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा।
विज्ञापन
विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता प्रशांत सिंह ने सोमवार को रौंड़ा पावर हाउस से डोड़ाघाट सेपरेट फीडर के लिए 24 घंटे बिजली देने के निर्देश दिए। पर्याप्त बिजली मिलने से नगर में सुचारु जलापूर्ति का रास्ता साफ हो गया।
इन मुहल्लों में होती थी परेशानी
पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण शहर के मुहल्ला नेहरू नगर वार्ड नंबर चार व छह, गांधीनगर, स्टेशन रोड, टोरिया मुहल्ला, चांदमारी, खिरकापुरा, नारायणपुरा, चौबयाना, बंशीपुरा, रामनगर, अजीतापुरा, लकडय़ापुरा आदि में पानी की परेशानी बनी रहती थी। मुहल्लेवासी पर्याप्त जल नहीं आने की शिकायतें लगातार करते रहते थे, लेकिन अब सुचारु आपूर्ति मिलने से इन मुहल्लों में पेयजल पहुंचना आसान हो जाएगा।
रोस्टिंग के नाम पर होती रही कटौती
विद्युत विभाग के अफसरों को संबोधित लखनऊ स्थित पारेषण से आए रिमांइडर में बताया गया कि मई 2015 से दिसंबर 2015 तक डोंड़ाघाट के लिए 24 घंटे बिजली दी जा रही है, लेकिन रौंडा से 5 जुलाई से नझाई बाजार स्थित 33 केवीए उप बिजलीघर से लगातार रोस्टिंग होती रही। इस कारण डोंड़ाघाट को बिजली नहीं मिल सकी। इसका खामियाजा नगर के लोग भुगतते रहे हैं।
लगातार बिजली मिलनी जरूरी
जल संस्थान के सेपरेड फीडर से 40, 30 और 20 हार्सपावर की विभिन्न मोटरें जुड़ी हुई हैं। पानी की टंकियां ऊंचाई पर होने के कारण लगातार बिजली मिलनी जरूरी है। यदि कुछ मिनट ही बिजली जाती है तो फिर से पाइप को भरने व पानी चढ़ाने में कई अधिक घंटे खर्च करने पड़ते हैं। इस स्थिति से हमेशा परेशानी बनी रहती है।
अफसर आमने- सामने
विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता प्रशांत सिंह का कहना है कि डोंड़ाघाट को लगातार 24 घंटे बिजली दी जा रही है, सिर्फ जुलाई माह में रोंड़ा से रोस्टिंग के नाम पर बिजली कटौती की जा रही है। वहीं, अधिशासी अभियंता जल संस्थान आरएस चौधरी का कहना है कि जब से सेपरेट फीडर चालू किया गया, तब से लेकर अब तक 24 घंटे बिजली नहीं दी गई। बीच-बीच में होने वाली कटौती से पानी चढ़ाने में कई घंटे अनावश्यक लग जाते हैं।