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Lalitpur News: लकड़ी के पुल से जान जोखिम में डाल निकल रहे ग्रामीण व बच्चे
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर/मड़ावरा/डोंगराखुर्द। आबादी के बीच से निकली जामनी नहर पर बने लकड़ी के पुल का उपयोग ग्रामीण आज भी कर रहे हैं। उक्त पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने या इसकी लकड़ी टूट जाने पर गांव के लोग स्वयं इसकी मरम्मत कराते हैं। इस लकड़ी के पुल का उपयोग बड़े-बूढे़ से लेकर बच्चे तक अपनी जान जोखिम में डालकर कर रहे हैं।
ब्लॉक मड़ावरा अंतर्गत बहादुरपुर गांव की आबादी करीब तीन हजार है। गांव के बीच से होकर जामनी बांध से निकली दाईं नहर गई है। नहर निकल जाने से यह गांव दो भागों में बंटा है। लोगों को एक से दूसरी तरफ जाने के लिए करीब 2-3 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। पहले नहर पर एक पुलिया निर्मित थी, जिसका उपयोग लोग एक मोहल्ले से दूसरे में जाने के लिए करते थे। लेकिन, कुछ वर्ष पूर्व पेयजल योजना के लिए काम शुरू हुआ तो एक भारी वाहन के गुजरने से उक्त पुलिया टूट गई थी। ऐसे में गांव के लोगों को 2-3 किलोमीटर का सफर तय करके दूसरी ओर जाने को विवश होना पड़ा।
ग्रामीणों ने प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से नहर पर पुलिया बनवाने की गुहार लगाई, लेकिन जब वह थक गए तो आपसी सहयोग से लकड़ी का पुल बनाया। लकड़ी के इस पुल से निकलना तब सबसे ज्यादा खतरनाक होता है जब जामनी बांध की इस नहर में पानी छोड़ा जाता है। उधर, ग्राम देवरान में भी इसी तरह जामनी नहर पर लकड़ी का पुल बना है, जिससे जान जोखिम में डालकर ग्रामीण निकलने को मजबूर हैं।
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स्कूली बच्चे भी इसी पुल से गुजरते
बहादुरपुर में एक प्राथमिक विद्यालय है, जिसमें 103 बालक-बालिका अध्ययनरत हैं। जबकि जूनियर हाईस्कूल में 79 बालक बालिका पढ़ते हैं। विद्यालय जाने के लिए छात्र-छात्राएं लंबा रास्ता तय करने के स्थान पर नहर पर बने इस लकड़ी के पुल का इस्तेमाल करते हैं। उनकी जान को भी खतरा बना रहता है।
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फोटो-19
लकड़ी का पुल काफी पुराना हो गया है। इस पर निकलने में डर लगता है। प्रशासन को नहर पर पुलिया का निर्माण कराना चाहिए। -कमलेश पटेल, ग्रामीण
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फोटो-20
इस पुल से छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने के लिए निकलते हैं। प्रशासन को लकड़ी के स्थान पर पूर्व की तरह पुलिया का निर्माण कराना चाहिए।-सुमित, ग्रामीण
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फोटो-21
पुलिया टूटने से लोगों को घूमकर जाना पड़ता है। लकड़ी के पुल से लोग अपनी जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं। कभी भी दुर्घटना हो सकती है।-दीपक दुबे, ग्रामीण
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फोटो-22
दो वर्ष पूर्व हर घर जल नल का निर्माण चल रहा था। इसका सामान लेकर भारी वाहन निकला तो पुलिया टूट गई। अब लोगों को लकड़ी के पुल से निकलना पड़ रहा है।
विश्वनाथ अवस्थी, प्रधान बहादुरपुर
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नोट- वर्जन बाद में भेजा जाएगा।
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ललितपुर/मड़ावरा/डोंगराखुर्द। आबादी के बीच से निकली जामनी नहर पर बने लकड़ी के पुल का उपयोग ग्रामीण आज भी कर रहे हैं। उक्त पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने या इसकी लकड़ी टूट जाने पर गांव के लोग स्वयं इसकी मरम्मत कराते हैं। इस लकड़ी के पुल का उपयोग बड़े-बूढे़ से लेकर बच्चे तक अपनी जान जोखिम में डालकर कर रहे हैं।
ब्लॉक मड़ावरा अंतर्गत बहादुरपुर गांव की आबादी करीब तीन हजार है। गांव के बीच से होकर जामनी बांध से निकली दाईं नहर गई है। नहर निकल जाने से यह गांव दो भागों में बंटा है। लोगों को एक से दूसरी तरफ जाने के लिए करीब 2-3 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। पहले नहर पर एक पुलिया निर्मित थी, जिसका उपयोग लोग एक मोहल्ले से दूसरे में जाने के लिए करते थे। लेकिन, कुछ वर्ष पूर्व पेयजल योजना के लिए काम शुरू हुआ तो एक भारी वाहन के गुजरने से उक्त पुलिया टूट गई थी। ऐसे में गांव के लोगों को 2-3 किलोमीटर का सफर तय करके दूसरी ओर जाने को विवश होना पड़ा।
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ग्रामीणों ने प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से नहर पर पुलिया बनवाने की गुहार लगाई, लेकिन जब वह थक गए तो आपसी सहयोग से लकड़ी का पुल बनाया। लकड़ी के इस पुल से निकलना तब सबसे ज्यादा खतरनाक होता है जब जामनी बांध की इस नहर में पानी छोड़ा जाता है। उधर, ग्राम देवरान में भी इसी तरह जामनी नहर पर लकड़ी का पुल बना है, जिससे जान जोखिम में डालकर ग्रामीण निकलने को मजबूर हैं।
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स्कूली बच्चे भी इसी पुल से गुजरते
बहादुरपुर में एक प्राथमिक विद्यालय है, जिसमें 103 बालक-बालिका अध्ययनरत हैं। जबकि जूनियर हाईस्कूल में 79 बालक बालिका पढ़ते हैं। विद्यालय जाने के लिए छात्र-छात्राएं लंबा रास्ता तय करने के स्थान पर नहर पर बने इस लकड़ी के पुल का इस्तेमाल करते हैं। उनकी जान को भी खतरा बना रहता है।
फोटो-19
लकड़ी का पुल काफी पुराना हो गया है। इस पर निकलने में डर लगता है। प्रशासन को नहर पर पुलिया का निर्माण कराना चाहिए। -कमलेश पटेल, ग्रामीण
फोटो-20
इस पुल से छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने के लिए निकलते हैं। प्रशासन को लकड़ी के स्थान पर पूर्व की तरह पुलिया का निर्माण कराना चाहिए।-सुमित, ग्रामीण
फोटो-21
पुलिया टूटने से लोगों को घूमकर जाना पड़ता है। लकड़ी के पुल से लोग अपनी जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं। कभी भी दुर्घटना हो सकती है।-दीपक दुबे, ग्रामीण
फोटो-22
दो वर्ष पूर्व हर घर जल नल का निर्माण चल रहा था। इसका सामान लेकर भारी वाहन निकला तो पुलिया टूट गई। अब लोगों को लकड़ी के पुल से निकलना पड़ रहा है।
विश्वनाथ अवस्थी, प्रधान बहादुरपुर
नोट- वर्जन बाद में भेजा जाएगा।