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Lalitpur News: सीएचसी में शुरू नहीं हो सका नेत्र रोग का इलाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। ब्लाॅक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नेत्र रोग के उपचार की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान में इन अस्पतालों में नेत्र परीक्षण मात्र ही हो रहा है। उपचार के लिए मुख्यालय या अन्य महानगरों में जाना पड़ रहा है, जबकि इन अस्पतालों में प्रतिदिन 120 से 150 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 50 मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
ब्लॉक क्षेत्र की आबादी को उपचार की सुविधा के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए गए हैं। महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जन व फिजिशियन और दंत चिकित्सक समेत अन्य चिकित्सक नियुक्त किए जाते हैं। लेकिन, इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अब तक नेत्र रोग के उपचार की सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ के पद तक सृजित नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक सीएचसी पर प्रतिदिन 40 मरीज नेत्र परीक्षण कराने आते हैं। इनमें दस को जिला मुख्यालय भेज दिया जाता है। यहां की छह सीएचसी पर प्रतिदिन 200 से 220 मरीज आते हैं। इनमें 45 से 50 मरीज अन्य अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर महज आंखों के परीक्षण की सुविधा है। चिकित्सक के पद सृजित नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज में मरीज उपचार करा सकते हैं। यहां सभी तरह की सुविधाएं हैं।
- डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ
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ललितपुर। ब्लाॅक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नेत्र रोग के उपचार की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान में इन अस्पतालों में नेत्र परीक्षण मात्र ही हो रहा है। उपचार के लिए मुख्यालय या अन्य महानगरों में जाना पड़ रहा है, जबकि इन अस्पतालों में प्रतिदिन 120 से 150 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 50 मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
ब्लॉक क्षेत्र की आबादी को उपचार की सुविधा के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए गए हैं। महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जन व फिजिशियन और दंत चिकित्सक समेत अन्य चिकित्सक नियुक्त किए जाते हैं। लेकिन, इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अब तक नेत्र रोग के उपचार की सुविधाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। यहां नेत्र रोग विशेषज्ञ के पद तक सृजित नहीं हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक सीएचसी पर प्रतिदिन 40 मरीज नेत्र परीक्षण कराने आते हैं। इनमें दस को जिला मुख्यालय भेज दिया जाता है। यहां की छह सीएचसी पर प्रतिदिन 200 से 220 मरीज आते हैं। इनमें 45 से 50 मरीज अन्य अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर महज आंखों के परीक्षण की सुविधा है। चिकित्सक के पद सृजित नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज में मरीज उपचार करा सकते हैं। यहां सभी तरह की सुविधाएं हैं।
- डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ