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Lalitpur News: आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक अस्पतालों में नहीं मिल पा रहा उपचार
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललिपतुर। जनपद में आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक के सात अस्पतालों में लगभग एक वर्ष से चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में अस्पतालों में उपचार की आस लेकर आ रहे मरीज मायूस होकर वापस हो रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। अटैचमेंट से तीन-तीन दिन के लिए अस्पताल खोले जा रहे हैं।
जिले में आयुर्वेद व यूनानी पद्धति से उपचार की सुविधा के लिए अस्पताल खोले गए हैं। इनमें आयुर्वेद के 32 व होम्योपैथिक के 24 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में चिकित्सक भी नियुक्ति किए गए हैं। हालांकि सात अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। बीते लगभग एक वर्ष पहले तक इन अस्पतालों में फार्मासिस्ट मरीजों को दवाइयां दे रहे थे।
लेकिन, बीते वर्ष शासन ने फार्मासिस्टों के उपचार करने पर रोक लगा दी है। तब से चिकित्सक के अभाव में अस्पतालों में उपचार की सुविधा ठप हो गई है। यह हाल आयुर्वेदिक के चार अस्पतालों व होम्योपैथिक के तीन अस्पतालों का है। विभागीय अधिकारियों ने अस्पतालों में व्यवस्थाएं बनाये रखने के लिए तीन-तीन दिन के लिए चिकित्सकों को अटैच किया है। ऐसी स्थिति में मूल अस्पताल में मरीजों को समुचित मात्रा में उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई बार मरीज अस्पतालों तक पहुंच जाते हैं, लेकिन चिकित्सक न होने से निराश होकर लौटना पड़ता है।
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तीन-तीन दिन सेवाएं दे रहे चिकित्सक
होम्योपैथिक के तीन अस्पतालों में चिकित्सकों कमी को पूरा करने के लिए तीन-तीन दिन के लिए पास के अस्पताल से अटैच किया है। इसमें बालाबेहट में जिला अस्पताल के चिकित्सक को तीन दिन के लिए अटैच किया है। वहीं भौंड़ी में सौजना के चिकित्सक को व तालबेहट में भुचेरा में कार्यरत चिकित्सक को अटैच किया गया है।
वर्जन
जनपद में 32 आयुर्वेदिक अस्पतालों के सापेक्ष 28 चिकित्सक हैं, चार अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। इन अस्पतालों को अटैचमेंट के सहारे तीन-तीन दिन के लिए चलाया जा रहा है।
-डॉ. अर्जुनलाल अहिरवार, जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी
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ललिपतुर। जनपद में आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक के सात अस्पतालों में लगभग एक वर्ष से चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में अस्पतालों में उपचार की आस लेकर आ रहे मरीज मायूस होकर वापस हो रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। अटैचमेंट से तीन-तीन दिन के लिए अस्पताल खोले जा रहे हैं।
जिले में आयुर्वेद व यूनानी पद्धति से उपचार की सुविधा के लिए अस्पताल खोले गए हैं। इनमें आयुर्वेद के 32 व होम्योपैथिक के 24 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में चिकित्सक भी नियुक्ति किए गए हैं। हालांकि सात अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। बीते लगभग एक वर्ष पहले तक इन अस्पतालों में फार्मासिस्ट मरीजों को दवाइयां दे रहे थे।
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लेकिन, बीते वर्ष शासन ने फार्मासिस्टों के उपचार करने पर रोक लगा दी है। तब से चिकित्सक के अभाव में अस्पतालों में उपचार की सुविधा ठप हो गई है। यह हाल आयुर्वेदिक के चार अस्पतालों व होम्योपैथिक के तीन अस्पतालों का है। विभागीय अधिकारियों ने अस्पतालों में व्यवस्थाएं बनाये रखने के लिए तीन-तीन दिन के लिए चिकित्सकों को अटैच किया है। ऐसी स्थिति में मूल अस्पताल में मरीजों को समुचित मात्रा में उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई बार मरीज अस्पतालों तक पहुंच जाते हैं, लेकिन चिकित्सक न होने से निराश होकर लौटना पड़ता है।
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तीन-तीन दिन सेवाएं दे रहे चिकित्सक
होम्योपैथिक के तीन अस्पतालों में चिकित्सकों कमी को पूरा करने के लिए तीन-तीन दिन के लिए पास के अस्पताल से अटैच किया है। इसमें बालाबेहट में जिला अस्पताल के चिकित्सक को तीन दिन के लिए अटैच किया है। वहीं भौंड़ी में सौजना के चिकित्सक को व तालबेहट में भुचेरा में कार्यरत चिकित्सक को अटैच किया गया है।
वर्जन
जनपद में 32 आयुर्वेदिक अस्पतालों के सापेक्ष 28 चिकित्सक हैं, चार अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। इन अस्पतालों को अटैचमेंट के सहारे तीन-तीन दिन के लिए चलाया जा रहा है।
-डॉ. अर्जुनलाल अहिरवार, जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी