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Lalitpur News: बढ़ने लगा गोविंद सागर बांध का जलस्तर
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ललितपुर। दो दिन से हो रही मानसून की जोरदार बारिश से गोविंद सागर बांध का जलस्तर बढ़ने लगा है। सिंचाई विभाग के रिकार्ड के अनुसार इस बारिश से दो दिनों में तीन सेंटीमीटर बांध का जलस्तर बढ़ा है। वहीं, अन्य बांधों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ललितपुर को बांधों और नदियों का जिला कहा जाता है। यहां 14 बांध परियोजनाएं हैं। इससे किसानों को सिंचाई और आम लोगों के लिए पेयजल की आपूर्ति की जाती है। गर्मी के सीजन में बांधों का जलस्तर घटने लगता है। मानसून की बारिश में ये बांध पुन: भर जाते हैं। दो दिनों से झमाझम बारिश हो रही है। तालाब, बंधी लबालब हो गए तो नदी, नाले उफनाकर बहने लगे। बांधों के कैचमेंट एरिया का पानी बहकर बांधों में पहुंचने लगा। इससे इनके जलस्तर में बढ़ोतरी होने लगी। दो दिन की बारिश में गोविंद सागर बांध के जलस्तर में तीन सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई।
सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार तीन जुलाई को गोविंद सागर बांध का जलस्तर 361.46 मीटर था, जोकि शनिवार सुबह 8 बजे 361.49 मीटर पर पहुंच गया। अधिकारियों के अनुसार जून और जुलाई के पहले सप्ताह की बारिश को देखकर उम्मीद है कि बांध जल्द ही लबालब हो जाएंगे।
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बांध का नजारा देखने पहुंच रहे सैलानी
गोविंद सागर बांध का जलस्तर बढ़ते ही यहां सैलानी पहुंचने लगे। सुबह और शाम को लोग परिवारजन के साथ यहां सैर सपाटे के लिए आना शुरू हो गए हैं। इस कारण से यहां भुट्टा सहित अन्य दुकानें भी सज गई हैं।
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बांधों का जलस्तर
बांध - पूर्ण जलस्तर - 3 जुलाई का जलस्तर - 5 जुलाई का जलस्तर
गोविंद सागर - 363.93 मी. - 361.46 मी. - 361.49 मी.
शहजाद - 321.50 मी. - 318.98 मी. - 319.10 मी.
जामनी - 403.55 मी. - 396.11 मी. - 396.24 मी.
सजनाम - 373.20 मी. - 368.30 मी. - 368.40 मी.
रोहिणी - 396.39 मी. - 392.65 मी. - 392.75 मी.
उटारी - 326.80 मी. - 325.00 मी. - 325.00 मी.
राजघाट - 371.00 मी. - 361.90 मी. - 361.95 मी.
माताटीला - 308.46 मी. - 303.75 मी. - 303.89 मी.
कचनौंदा - 341.70 मी. - 340.45 मी. - 340.70 मी.
लोअर रोहिणी - 368.00 मी. - 364.95 मी. - 364.95 मी.
जमड़ार - 368.00 मी. - 365.45 मी. - 366.80 मी.
भावनी - 312.38 मी. - 310.35 मी. - 310.30 मी.
बंडई - 403.50 मी. - 397.00 मी. - 397.15 मी.
भौंरट - 360.90 मी. - 354.60 मी. - 354.80 मी.
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बांधों में पानी की आवक होने से इनके जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। आने वाले दिनों में और भी अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। बांधों के जलस्तर की निगरानी लगातार की जा रही है।
भूपेश सुहेरा, अधिशासी अभियंता/नोडल, सिंचाई खंड
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ललितपुर को बांधों और नदियों का जिला कहा जाता है। यहां 14 बांध परियोजनाएं हैं। इससे किसानों को सिंचाई और आम लोगों के लिए पेयजल की आपूर्ति की जाती है। गर्मी के सीजन में बांधों का जलस्तर घटने लगता है। मानसून की बारिश में ये बांध पुन: भर जाते हैं। दो दिनों से झमाझम बारिश हो रही है। तालाब, बंधी लबालब हो गए तो नदी, नाले उफनाकर बहने लगे। बांधों के कैचमेंट एरिया का पानी बहकर बांधों में पहुंचने लगा। इससे इनके जलस्तर में बढ़ोतरी होने लगी। दो दिन की बारिश में गोविंद सागर बांध के जलस्तर में तीन सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई।
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सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार तीन जुलाई को गोविंद सागर बांध का जलस्तर 361.46 मीटर था, जोकि शनिवार सुबह 8 बजे 361.49 मीटर पर पहुंच गया। अधिकारियों के अनुसार जून और जुलाई के पहले सप्ताह की बारिश को देखकर उम्मीद है कि बांध जल्द ही लबालब हो जाएंगे।
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बांध का नजारा देखने पहुंच रहे सैलानी
गोविंद सागर बांध का जलस्तर बढ़ते ही यहां सैलानी पहुंचने लगे। सुबह और शाम को लोग परिवारजन के साथ यहां सैर सपाटे के लिए आना शुरू हो गए हैं। इस कारण से यहां भुट्टा सहित अन्य दुकानें भी सज गई हैं।
बांधों का जलस्तर
बांध - पूर्ण जलस्तर - 3 जुलाई का जलस्तर - 5 जुलाई का जलस्तर
गोविंद सागर - 363.93 मी. - 361.46 मी. - 361.49 मी.
शहजाद - 321.50 मी. - 318.98 मी. - 319.10 मी.
जामनी - 403.55 मी. - 396.11 मी. - 396.24 मी.
सजनाम - 373.20 मी. - 368.30 मी. - 368.40 मी.
रोहिणी - 396.39 मी. - 392.65 मी. - 392.75 मी.
उटारी - 326.80 मी. - 325.00 मी. - 325.00 मी.
राजघाट - 371.00 मी. - 361.90 मी. - 361.95 मी.
माताटीला - 308.46 मी. - 303.75 मी. - 303.89 मी.
कचनौंदा - 341.70 मी. - 340.45 मी. - 340.70 मी.
लोअर रोहिणी - 368.00 मी. - 364.95 मी. - 364.95 मी.
जमड़ार - 368.00 मी. - 365.45 मी. - 366.80 मी.
भावनी - 312.38 मी. - 310.35 मी. - 310.30 मी.
बंडई - 403.50 मी. - 397.00 मी. - 397.15 मी.
भौंरट - 360.90 मी. - 354.60 मी. - 354.80 मी.
बांधों में पानी की आवक होने से इनके जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। आने वाले दिनों में और भी अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। बांधों के जलस्तर की निगरानी लगातार की जा रही है।
भूपेश सुहेरा, अधिशासी अभियंता/नोडल, सिंचाई खंड