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Lalitpur News: राम-भरत का मिलाप भ्रातृत्व प्रेम की अनूठी मिसाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
पाली/ललितपुर। तहसील क्षेत्र के ग्राम चीमना स्थित चिंताहरण मारुति नंदन मंदिर प्रांगण में श्रीराम कथा में राम-भरत मिलाप का प्रसंग सुन भक्त भावविह्वल हो गए। कथा से पूर्व मंदिर में कलश और ध्वजारोहण का आयोजन किया गया।
कथा व्यास चंद्रभूषण पाठक ने भरत चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राम और भरत का मिलाप भ्रातृत्व प्रेम और त्याग की अनुपम मिसाल है। वर्तमान में जहां सत्ता के लिए संघर्ष होते हैं, वहीं इस कथा में दोनों भाई एक-दूसरे को अयोध्या की गद्दी सौंपने का आग्रह करते हैं। कहा कि कैकेयी को राजा दशरथ द्वारा दिए गए वरदानों के कारण राम के वनवास जाने से अयोध्यावासी शोक में डूबे थे।
भरत, ननिहाल से लौटने के बाद मां कौशल्या की आज्ञा लेकर भाई शत्रुघ्न के साथ राम को वापस लाने चित्रकूट पहुंचे। भरत ने श्रीराम के चरणों में गिरकर उनसे अयोध्या लौटने और राजपाट संभालने की विनती की। श्रीराम ने भरत को समझाते हुए कहा, हे भरत, तुम मन, वचन और कर्म से निर्मल हो।
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पिता की सत्य प्रतिज्ञा, सूर्यवंश की परंपरा और गुरुजनों की मर्यादा का पालन करना उनका कर्तव्य है। इसलिए वह अयोध्या की गद्दी संभालकर कुल की रक्षा करें। देवेंद्र सिंह, विजय बहादुर राव, पूर्व प्रधान नत्थू सिंह, रंजीत राजा, छोटू बुंदेला, राजकुमार जैन आदि उपस्थित रहे।।
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पाली/ललितपुर। तहसील क्षेत्र के ग्राम चीमना स्थित चिंताहरण मारुति नंदन मंदिर प्रांगण में श्रीराम कथा में राम-भरत मिलाप का प्रसंग सुन भक्त भावविह्वल हो गए। कथा से पूर्व मंदिर में कलश और ध्वजारोहण का आयोजन किया गया।
कथा व्यास चंद्रभूषण पाठक ने भरत चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राम और भरत का मिलाप भ्रातृत्व प्रेम और त्याग की अनुपम मिसाल है। वर्तमान में जहां सत्ता के लिए संघर्ष होते हैं, वहीं इस कथा में दोनों भाई एक-दूसरे को अयोध्या की गद्दी सौंपने का आग्रह करते हैं। कहा कि कैकेयी को राजा दशरथ द्वारा दिए गए वरदानों के कारण राम के वनवास जाने से अयोध्यावासी शोक में डूबे थे।
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भरत, ननिहाल से लौटने के बाद मां कौशल्या की आज्ञा लेकर भाई शत्रुघ्न के साथ राम को वापस लाने चित्रकूट पहुंचे। भरत ने श्रीराम के चरणों में गिरकर उनसे अयोध्या लौटने और राजपाट संभालने की विनती की। श्रीराम ने भरत को समझाते हुए कहा, हे भरत, तुम मन, वचन और कर्म से निर्मल हो।
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पिता की सत्य प्रतिज्ञा, सूर्यवंश की परंपरा और गुरुजनों की मर्यादा का पालन करना उनका कर्तव्य है। इसलिए वह अयोध्या की गद्दी संभालकर कुल की रक्षा करें। देवेंद्र सिंह, विजय बहादुर राव, पूर्व प्रधान नत्थू सिंह, रंजीत राजा, छोटू बुंदेला, राजकुमार जैन आदि उपस्थित रहे।।