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नई वैक्यूम सर्किट ब्रेकर मशीनें लगेंगी
ललितपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2015 11:02 PM IST
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ललितपुर। विद्युत सब स्टेशनों पर पुरानी प्रणाली की वर्षों पूर्व स्थापित की गई ऑयल सर्किट ब्रेकर (ओसीबी) मशीनों को हटाकर नई प्रणाली की वैक्यूम सर्किट ब्रेकर ( वीसीबी) मशीनें स्थापित किए जाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। गल्ला मंडी सब स्टेशन पर स्थापित 66 केवी लाइन की ओसीबी मशीनें हटाकर नई वीसीबी मशीनें स्थापित करने के लिए विभाग ने स्टीमेट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिया है।
गल्ला मंडी स्थित 66 केवी विद्युत सब स्टेशन पर स्थापित 66 केवी लाइन के अंतर्गत फीडर नंबर एक, तीन, नेहरू नगर, राजघाट, देवगढ़, चंदेरा व सब स्टेशन के माध्यम से आधे शहर, औद्योगिक केंद्र व 84 गांवों को बिजली आपूर्ति प्रदान की जाती है। इन फीडरों में विभाग द्वारा वर्षों पूर्व ओसीबी मशीनों के नौ पैनल स्थापित कराए गए थे। वर्षों से मेंटीनेंस नहीं होने के कारण पुरानी प्रणाली की ओसीबी मशीनों की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। मशीनों के जरूरी उपकरण भी विद्युत स्टोर में उपलब्ध नहीं हैं, जिसकी वजह से मशीनों के आंतरिक उपकरण (मेल-फीमेल) कांटैक्ट खराब होने पर यहां के ठेकेदारों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार तेल खौलने पर मशीनें तक फट जाती हैं।
चार माह पूर्व महरौनी के एक लाइनमैन की मशीन में खराबी आ जाने से करंट लगने से मौत हो गई थी। ऐसी ही स्थिति गल्ला मंडी सब स्टेशन की है। यहां आए दिन ओसीबी मशीनें फाल्ट आने पर भी कई बार ट्रिप नहीं होती हैं या फिर ट्रिप हो जाती हैं तो काफी देर बाद तक मशीनों की ट्रिपिंग वापस नहीं होती, जिससे घंटों तक बिजली गुल रहती है, इसके चलते विद्युत अफसरों ने गल्ला मंडी सब स्टेशन पर 66 केवी लाइन से जुड़ेे सात फीडरों की सात ओसीबी मशीनों और दो इनकमिंग मशीनों के पैनल बदलकर नई प्रणाली की वैक्यूम सर्किट ब्रेकर मशीनों को मंगाने के लिए करीब 29 लाख रुपए का स्टीमेट बनाकर तैयार किया है, जिसे उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। स्टीमेट मंजूर होने के बाद नई प्रणाली की वीसीबी मशीनों के सात आउटगोइंग और दो इनकमिंग पैनल लगाए जाएंगे। इन मशीनों के बदलने के बाद गल्ला मंडी सब स्टेशन पूर्ण रूप से नई प्रणाली की मशीनों से युक्त हो जाएगा।
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रौंड़ा हाईडिल से होती आपूर्ति ठप
ललितपुर। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 11 हजार केवी लाइन में फाल्ट आ जाने पर कई बार ओसीबी मशीनें ट्रिप नहीं होती हैं, जिस पर 132 केवी रौंड़ा हाईडिल से ही 66 केवी लाइन की आपूर्ति बंद पड़ जाती है। इससे शहरी क्षेत्र के तीन, औद्योगिक क्षेत्र चंदेरा व राजघाट एवं देवगढ़ फीडर की बिजली आपूर्ति एक साथ ठप हो जाती है। इससे आधे शहर समेत ग्रामीण इलाकों में अंधकार पसर जाता है और उपभोक्ताओं को बेवजह अघोषित कटौती के कारण परेशान होना पड़ता है।
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गल्ला मंडी स्थित 66 केवी विद्युत सब स्टेशन पर स्थापित 66 केवी लाइन के अंतर्गत फीडर नंबर एक, तीन, नेहरू नगर, राजघाट, देवगढ़, चंदेरा व सब स्टेशन के माध्यम से आधे शहर, औद्योगिक केंद्र व 84 गांवों को बिजली आपूर्ति प्रदान की जाती है। इन फीडरों में विभाग द्वारा वर्षों पूर्व ओसीबी मशीनों के नौ पैनल स्थापित कराए गए थे। वर्षों से मेंटीनेंस नहीं होने के कारण पुरानी प्रणाली की ओसीबी मशीनों की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। मशीनों के जरूरी उपकरण भी विद्युत स्टोर में उपलब्ध नहीं हैं, जिसकी वजह से मशीनों के आंतरिक उपकरण (मेल-फीमेल) कांटैक्ट खराब होने पर यहां के ठेकेदारों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार तेल खौलने पर मशीनें तक फट जाती हैं।
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चार माह पूर्व महरौनी के एक लाइनमैन की मशीन में खराबी आ जाने से करंट लगने से मौत हो गई थी। ऐसी ही स्थिति गल्ला मंडी सब स्टेशन की है। यहां आए दिन ओसीबी मशीनें फाल्ट आने पर भी कई बार ट्रिप नहीं होती हैं या फिर ट्रिप हो जाती हैं तो काफी देर बाद तक मशीनों की ट्रिपिंग वापस नहीं होती, जिससे घंटों तक बिजली गुल रहती है, इसके चलते विद्युत अफसरों ने गल्ला मंडी सब स्टेशन पर 66 केवी लाइन से जुड़ेे सात फीडरों की सात ओसीबी मशीनों और दो इनकमिंग मशीनों के पैनल बदलकर नई प्रणाली की वैक्यूम सर्किट ब्रेकर मशीनों को मंगाने के लिए करीब 29 लाख रुपए का स्टीमेट बनाकर तैयार किया है, जिसे उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। स्टीमेट मंजूर होने के बाद नई प्रणाली की वीसीबी मशीनों के सात आउटगोइंग और दो इनकमिंग पैनल लगाए जाएंगे। इन मशीनों के बदलने के बाद गल्ला मंडी सब स्टेशन पूर्ण रूप से नई प्रणाली की मशीनों से युक्त हो जाएगा।
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रौंड़ा हाईडिल से होती आपूर्ति ठप
ललितपुर। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 11 हजार केवी लाइन में फाल्ट आ जाने पर कई बार ओसीबी मशीनें ट्रिप नहीं होती हैं, जिस पर 132 केवी रौंड़ा हाईडिल से ही 66 केवी लाइन की आपूर्ति बंद पड़ जाती है। इससे शहरी क्षेत्र के तीन, औद्योगिक क्षेत्र चंदेरा व राजघाट एवं देवगढ़ फीडर की बिजली आपूर्ति एक साथ ठप हो जाती है। इससे आधे शहर समेत ग्रामीण इलाकों में अंधकार पसर जाता है और उपभोक्ताओं को बेवजह अघोषित कटौती के कारण परेशान होना पड़ता है।