पूर्वजों का ऋण उतारने को किया जाता है श्राद्ध
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ललितपुर। पितृ पक्ष शुरू हो गए हैं। अब 15 दिन तक लोग अपने पूर्वजों को जल अपर्ण करेंगे। मान्यता है कि पितरों का ऋण श्राद्ध के माध्यम से उतारा जाता है। इस बार यह श्राद्ध 12 अक्तूबर तक चलेगा।
पीतल की थाली में शुद्ध जल भरकर उसमें थोड़े काले तिल और दूध डालकर अपने समक्ष रखकर उसके आगे दूसरा खाली पात्र रख लेते हैं। तर्पण करते समय हाथ के अंगुठे और तर्जनी के मध्य कुश लेकर अंजली बनाते हैं। अंजली में जल लेकर दूसरे पात्र में छोड़ते हैं। इस दौरान पूर्वजों के नाम पर तीन बार तर्पण किया जाता है। कृष्ण पक्ष की उस तिथि को जिस दिन पूर्वज का देहांत होता है, पितरों को जल, तिल, कुश आदि से तर्पण, पिंड दान और पूजन किया जाता है। इसके लिए जलाशयों पर पूर्वजों का तर्पण करने करने वालों की भीड़ जमा हो रही है।
सुबह से ही लोग सुम्मेरा तालाब अथवा घरों पर ही पूर्वजों को तर्पण कर रहे हैं। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन, वस्त्र व फल दान किया जा रहा है। साथ ही पूर्वजों के नाम पर गाय, कुत्ता और कौआ को भोजन दिया जा रहा है। उस दिन दान, पुण्य व गरीबों को भोजन कराया जा रहा है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए लोग कृष्ण पक्ष के इन 15 दिनों तक लगातार तर्पण करते हैं। वहीं, पितृ पक्ष के दौरान भोजन कराने की परंपरा होने के कारण ब्राह्मणों को आमंत्रण के लिए मनाया जा रहा है।