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प्रतिष्ठानों से वसूला जाएगा लाइसेंस शुल्क
ललितपुर ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2015 12:08 AM IST
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ललितपुर। नगरीय सीमा में बने चालीस प्रकार के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से नगर पालिका लाइसेंस शुल्क वसूलने की तैयारी कर रही है। उक्त धनराशि नगर के विकास पर खर्च की जाएगी।
नगर पालिका की सीमा के अंतर्गत दो लाख से अधिक आबादी निवास करती है। वर्ष 2011 की गणना के अनुसार नगर में 23,644 भवन बने हुए हैं। इन भवनों से गृहकर वसूल किया जा रहा है। असेसमेंट नहीं होने के कारण निर्माणाधीन भवन नगर पालिका में धीमी गति से दर्ज हो रहे हैं। इन चार सालों में भवनों की संख्या 28 हजार को पार कर गई है। नगर पालिका गृहकर से प्रतिवर्ष करीब 30 से 35 लाख रुपये वसूल करती है। गृहकर को छोड़कर करेत्तर (स्टांप शुल्क सहित अन्य) की धनराशि से भी नगर पालिका करीब 70 लाख रुपये से अधिक जुटाती है। हालांकि, करेत्तर की धनराशि घटती-बढ़ती रहती है। यह धनराशि नगर विकास पर खर्च की जाती है। यह धनराशि नाकाफी है, कारण नगर पालिका सीमा के लगातार विस्तार होने से भवनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे नगर पालिका की जिम्मेदारियों में इजाफा हो रहा है। यही कारण है कि नगर पालिका को विकास के लिए अरबों रुपये की जरूरत होती है।
शेष धनराशि तेरहवें वित्त व अन्य मदों से सहायता ली जाती है। यह धनराशि नगर में सड़क निर्माण, साफ-सफाई और मार्ग प्रकाश की व्यवस्था पर खर्च होती है। आय के स्रोत बढ़ाने को ध्यान में रखते हुए नगर पालिका अब व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से लाइसेंस शुल्क लेने की तैयारी कर रही है। करीब 40 प्रकार की इन मदों से निर्धारित लाइसेंस शुल्क लिया जाएगा। इससे भी नगर पालिका लाखों रुपये जुटाएगी, जिसको विकास पर खर्च किया जाएगा। नगर में एक दर्जन विवाह घर, 10 प्राइवेट नर्सिंग होम, 84 चक्कियां, एक दर्जन होटल, रेस्टोरेंट, किराना की दुकान, वेल्डिंग मशीनें, चाट की स्थायी दुकानें, फल फ्रूट की दुकानें सहित चालीस प्रकार के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। इसके बाद लाइसेंस शुल्क वसूल किया जाएगा। इसके लिए नगर पालिका ने एक कर्मचारी तैनात किया है। कार्य बढ़ने के बाद और अतिरिक्त कर्मचारी बढ़ाए जाएंगे।
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कर्मचारियों की कमी से जूझ रही नपा
लगातार सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों की वजह से नगर पालिका कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। साथ ही शासन की योजनाओं में भी कर्मचारियों को लगाया जा रहा है। वर्तमान में डेढ़ दर्जन कर्मचारियों की कमी चली आ रही है। यही कारण है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी कई कर्मचारियों से सेवाएं ली जा रही हैं। ऐसे में लाइसेंस शुल्क के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों को लगाना आसान नहीं होगा।
मुख्य सचिव के निर्देश भी हवा- हवाई
नगर पालिका के काम प्रभावित नहीं हों, इसलिए नगर पालिका के कर्मचारियों को अपरिहार्य स्थिति में ही अन्य कार्य में लगाने के निर्देश मुख्य सचिव आलोक रंजन ने दिए हैं। निर्देशों के बाद भी नगर पालिका के कर्मचारियों को समाजवादी पेंशन के साथ विकलांग पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा (निराश्रित) पेंशन आदि में लगाया जा रहा है। हालांकि अन्य विभाग भी हैं, लेकिन उनसे काम नहीं लिया जाता। इसका असर अन्य योजनाओं पर भी पड़ता है। गृहकर वसूली भी प्रभावित हो रही है।
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नगर पालिका की सीमा के अंतर्गत दो लाख से अधिक आबादी निवास करती है। वर्ष 2011 की गणना के अनुसार नगर में 23,644 भवन बने हुए हैं। इन भवनों से गृहकर वसूल किया जा रहा है। असेसमेंट नहीं होने के कारण निर्माणाधीन भवन नगर पालिका में धीमी गति से दर्ज हो रहे हैं। इन चार सालों में भवनों की संख्या 28 हजार को पार कर गई है। नगर पालिका गृहकर से प्रतिवर्ष करीब 30 से 35 लाख रुपये वसूल करती है। गृहकर को छोड़कर करेत्तर (स्टांप शुल्क सहित अन्य) की धनराशि से भी नगर पालिका करीब 70 लाख रुपये से अधिक जुटाती है। हालांकि, करेत्तर की धनराशि घटती-बढ़ती रहती है। यह धनराशि नगर विकास पर खर्च की जाती है। यह धनराशि नाकाफी है, कारण नगर पालिका सीमा के लगातार विस्तार होने से भवनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे नगर पालिका की जिम्मेदारियों में इजाफा हो रहा है। यही कारण है कि नगर पालिका को विकास के लिए अरबों रुपये की जरूरत होती है।
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शेष धनराशि तेरहवें वित्त व अन्य मदों से सहायता ली जाती है। यह धनराशि नगर में सड़क निर्माण, साफ-सफाई और मार्ग प्रकाश की व्यवस्था पर खर्च होती है। आय के स्रोत बढ़ाने को ध्यान में रखते हुए नगर पालिका अब व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से लाइसेंस शुल्क लेने की तैयारी कर रही है। करीब 40 प्रकार की इन मदों से निर्धारित लाइसेंस शुल्क लिया जाएगा। इससे भी नगर पालिका लाखों रुपये जुटाएगी, जिसको विकास पर खर्च किया जाएगा। नगर में एक दर्जन विवाह घर, 10 प्राइवेट नर्सिंग होम, 84 चक्कियां, एक दर्जन होटल, रेस्टोरेंट, किराना की दुकान, वेल्डिंग मशीनें, चाट की स्थायी दुकानें, फल फ्रूट की दुकानें सहित चालीस प्रकार के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। इसके बाद लाइसेंस शुल्क वसूल किया जाएगा। इसके लिए नगर पालिका ने एक कर्मचारी तैनात किया है। कार्य बढ़ने के बाद और अतिरिक्त कर्मचारी बढ़ाए जाएंगे।
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कर्मचारियों की कमी से जूझ रही नपा
लगातार सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों की वजह से नगर पालिका कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। साथ ही शासन की योजनाओं में भी कर्मचारियों को लगाया जा रहा है। वर्तमान में डेढ़ दर्जन कर्मचारियों की कमी चली आ रही है। यही कारण है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी कई कर्मचारियों से सेवाएं ली जा रही हैं। ऐसे में लाइसेंस शुल्क के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों को लगाना आसान नहीं होगा।
मुख्य सचिव के निर्देश भी हवा- हवाई
नगर पालिका के काम प्रभावित नहीं हों, इसलिए नगर पालिका के कर्मचारियों को अपरिहार्य स्थिति में ही अन्य कार्य में लगाने के निर्देश मुख्य सचिव आलोक रंजन ने दिए हैं। निर्देशों के बाद भी नगर पालिका के कर्मचारियों को समाजवादी पेंशन के साथ विकलांग पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा (निराश्रित) पेंशन आदि में लगाया जा रहा है। हालांकि अन्य विभाग भी हैं, लेकिन उनसे काम नहीं लिया जाता। इसका असर अन्य योजनाओं पर भी पड़ता है। गृहकर वसूली भी प्रभावित हो रही है।