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Lalitpur News: विदेशी त्याग खादी वस्त्रों में जलविहार के लिए निकले थे भगवान के विग्रह
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ललितपुर। गांधीजी ने आजादी के लिए वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन किया था, तब ललितपुर में डोल ग्यारस पर निकाली जाने वाली जलविहार की यात्रा में विभिन्न मंदिरों के विग्रह भी विदेशी वस्त्रों को त्याग खादी के सफेद वस्त्रों में निकले थे। आजादी मिलने पर हर जलविहार पर विमान यात्रा में भगवान खादी के वस्त्रों में ही निकलते रहे।
शहर में डोल ग्यारस पर जलविहार की विमान यात्रा की शुरुआत वर्ष 1883 में हुई थी। विमानों में भगवान राम-कृष्ण और ठाकुरजी के विग्रह ही नगर भ्रमण पर निकलते हैं और तालाब पर जलविहार करते हैं। श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी ने बताया कि गांधीजी के असहयोग आंदोलन में पूरे देश में विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई थी। यहां उस समय जलविहार पर्व पर जब विमानों की यात्रा निकाली गई तो हर मंदिर के विमानों के विग्रह भी खादी के कपड़ों की सफेद पोशाकें पहनकर नगर भ्रमण पर निकले थे।
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आज भी मशाल लेकर चलने की परंपरा : आजादी से पहले और आजादी के बाद कई वर्षों तक बिजली न होने पर हर मंदिर के विमानों के साथ जलविहार से लौटने में एक व्यक्ति जलती हुई मशाल लेकर साथ चलता था। बाद में रात में रोशनी के लिए पेट्रोमैक्स लेकर चलते थे। अब बिजली की पर्याप्त व्यवस्था होने पर मशाल व पेट्रोमैक्स लैंप बंद कर दिए गए, लेकिन धनुषधारी मंदिर में जलविहार की यात्रा लौटने पर अब भी मशाल लेकर चलने की परंपरा निभाई जाती है।
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रघुनाथजी मंदिर का विमान रहता सबसे आगे : समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी ने बताया कि जलविहार पर्व पर विमानों की शोभायात्रा में श्रीरघुनाथजी मंदिर का विमान सबसे आगे चलता है और इसके पीछे अन्य मंदिरों के विमान रहते हैं। लेकिन, तालाबपुरा स्थित परमहंस मंदिर का विमान सबसे पीछे चलता है। परमहंस मंदिर का विमान गलियों से निकलकर तालाबपुरा रोड पर आ जाता है और यहां मंदिर के अन्य विमानों में विराजमान विग्रह का चांवर से स्वागत किया जाता है। जब सभी अतिथि देवताओं के विमान निकल जाते हैं, तब सबसे पीछे परमहंस मंदिर का विमान जलविहार के लिए जाता है।
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64 विमानों की निकलेगी शोभायात्रा : जलविहार पर शहर में निकाली जाने वाली शोभायात्रा में विभिन्न मंदिरों के लगभग 64 विमान शामिल होते हैं। चार मंदिरों रघुनाथजी मंदिर, आजाद चौक स्थित बिहारीजी का मंदिर, गोविंदनगर स्थित कालीमाता मंदिर और चंडी माता मंदिर के दो-दो विमान शोभायात्रा में शामिल होते हैं।
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पांच दिव्य स्थानों पर होगी महाआरती
जलविहार पर्व पर विमानों में विराजमान भगवान के विग्रहों की सबसे पहले सुम्मेरा तालाब के घाटों पर गंगाजल से विहार करने पर तालाब के बुर्जों से महाआरती की जाएगी। इसके बाद श्रीनृसिंह रामलीला मैदान में श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए विराजमान विमानों की महाआरती की जाएगी। फिर यात्रा के कटरा बाजार पहुंचने पर गणेश दरबार में महाआरती होगी। इसके बाद घंटाघर के पास जगदीश और थानेश्वर मंदिर के सामने महाआरती की जाएगी।
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शहर में डोल ग्यारस पर जलविहार की विमान यात्रा की शुरुआत वर्ष 1883 में हुई थी। विमानों में भगवान राम-कृष्ण और ठाकुरजी के विग्रह ही नगर भ्रमण पर निकलते हैं और तालाब पर जलविहार करते हैं। श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी ने बताया कि गांधीजी के असहयोग आंदोलन में पूरे देश में विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई थी। यहां उस समय जलविहार पर्व पर जब विमानों की यात्रा निकाली गई तो हर मंदिर के विमानों के विग्रह भी खादी के कपड़ों की सफेद पोशाकें पहनकर नगर भ्रमण पर निकले थे।
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आज भी मशाल लेकर चलने की परंपरा : आजादी से पहले और आजादी के बाद कई वर्षों तक बिजली न होने पर हर मंदिर के विमानों के साथ जलविहार से लौटने में एक व्यक्ति जलती हुई मशाल लेकर साथ चलता था। बाद में रात में रोशनी के लिए पेट्रोमैक्स लेकर चलते थे। अब बिजली की पर्याप्त व्यवस्था होने पर मशाल व पेट्रोमैक्स लैंप बंद कर दिए गए, लेकिन धनुषधारी मंदिर में जलविहार की यात्रा लौटने पर अब भी मशाल लेकर चलने की परंपरा निभाई जाती है।
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रघुनाथजी मंदिर का विमान रहता सबसे आगे : समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी ने बताया कि जलविहार पर्व पर विमानों की शोभायात्रा में श्रीरघुनाथजी मंदिर का विमान सबसे आगे चलता है और इसके पीछे अन्य मंदिरों के विमान रहते हैं। लेकिन, तालाबपुरा स्थित परमहंस मंदिर का विमान सबसे पीछे चलता है। परमहंस मंदिर का विमान गलियों से निकलकर तालाबपुरा रोड पर आ जाता है और यहां मंदिर के अन्य विमानों में विराजमान विग्रह का चांवर से स्वागत किया जाता है। जब सभी अतिथि देवताओं के विमान निकल जाते हैं, तब सबसे पीछे परमहंस मंदिर का विमान जलविहार के लिए जाता है।
64 विमानों की निकलेगी शोभायात्रा : जलविहार पर शहर में निकाली जाने वाली शोभायात्रा में विभिन्न मंदिरों के लगभग 64 विमान शामिल होते हैं। चार मंदिरों रघुनाथजी मंदिर, आजाद चौक स्थित बिहारीजी का मंदिर, गोविंदनगर स्थित कालीमाता मंदिर और चंडी माता मंदिर के दो-दो विमान शोभायात्रा में शामिल होते हैं।
पांच दिव्य स्थानों पर होगी महाआरती
जलविहार पर्व पर विमानों में विराजमान भगवान के विग्रहों की सबसे पहले सुम्मेरा तालाब के घाटों पर गंगाजल से विहार करने पर तालाब के बुर्जों से महाआरती की जाएगी। इसके बाद श्रीनृसिंह रामलीला मैदान में श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए विराजमान विमानों की महाआरती की जाएगी। फिर यात्रा के कटरा बाजार पहुंचने पर गणेश दरबार में महाआरती होगी। इसके बाद घंटाघर के पास जगदीश और थानेश्वर मंदिर के सामने महाआरती की जाएगी।