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दिव्यांग लड़की को ब्याहने बारात लेकर घर पहुंचा दूल्हा
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दिव्यांग दुल्हन वंदना व दूल्हा मोहन।
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। कस्बा मदनपुर की रहने वाली नेत्रहीन युवती का हाथ मध्य प्रदेश के जिला सागर के ग्राम रतनपुर निवासी एक राजमिस्त्री ने थाम लिया है। युवक ने युवती से विवाह कर लिया है लेकिन इसका उसे खामियाजा उठाना पड़ा है। राजमिस्त्री को उसके परिजनों ने आधी रात को घर से निकाल दिया। हालांकि, दूूल्हे के लिए पिता के दोस्त सहयोगी साबित हुए। उन्होंने अपने घर से ही दोनों की शादी की। सारी रस्में अदा कराईं और उसके जीवन में खुशियां भर दीं।
ग्राम रतनपुर निवासी मोहन रैकवार इंदौर के महू में राजमिस्त्री का काम करता है। परिवार वाले उसके रिश्ते की बात कई जगह चला रहे थे। इसी दौरान मोहन को उसके पिता के एक मित्र सागर जिले के ग्राम मड़ावन निवासी रामपाल मिल गए। उन्होंने उसे ललितपुर के कस्बा मदनपुर में दोनों आंखों से नेत्रहीन ृवंदना का रिश्ता बताया। वह लड़की देखने गया और उससे एवं उसके परिवारजनों से बात की तो पता चला कि दिव्यांग होने की वजह से कोई भी लड़का उससे शादी को राजी नहीं होता था। इस बात से मोहन का मन भावुक हो गया और उसने युवती को जीवन साथी बनाने का मन बना लिया। उसने अपने घर जाकर परिजनों को नेत्रहीन युवती से शादी करने के निर्णय की बात बताई तो परिजन उससे नाराज हो गए और उससे बोलचाल भी बंद कर दिया।
घरवालों ने शगुन लौटाकर रात में बेटे को घर से निकाल दिया, 15 को बरात लेकर पहुंचा गांव
दस जुलाई को लड़की वाले उसके घर रिश्ता तय करने गए तो परिजनों ने स्वीकार नहीं किया। उन्हें वापस लौटा दिया। मोहन ने लड़की वालों को रिश्ता करने का भरोसा दिया। मोहन के परिजनों ने उस युवती से शादी नहीं करने के लिए उस पर काफी दबाव बनाया, लेकिन वह नहीं माना। दस जुलाई की रात करीब एक बजे उन्होंने उसे घर से ही निकाल दिया। इसके बाद मोहन ने सारी बात अपने पिता के मित्र को बताई तो उन्होंने उसे अपने घर सागर जिला के ग्राम मड़ावन में बुला लिया और वहीं से शादी पक्की करते हुए 15 जुलाई को बरात लेकर ललितपुर के कस्बा मदनपुर पहुंच गए। इस पर पूरे गांव में खुशी का माहौल रहा और हर कोई इस शादी को देखने के लिए शामिल हुआ। घोड़ी पर बैठकर दूल्हा निकला तो गांव में उसका खूब स्वागत भी हुआ। पूरे रीति रिवाज के अनुसार फलदान, जयमाला, सात फेरे, कन्यादान की सारी रस्में निभाई गईं। इसके बाद 16 जुलाई को विदाई समारोह हुआ, जिसके बाद बरात दुल्हन को लेकर वापस ग्राम मड़ावन पहुंची। दुल्हन वंदना तीन भाइयों में इकलौती बहन है।
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पत्नी की आंखों का इलाज क राऊंगा : मोहन
दूल्हा मोहन रैकवार ने बताया कि वह वंदना को ठीक करा लेगा, उसकी आंखों के इलाज में चार-पांच लाख रुपये या जितना भी लगेगा, वह लगाएगा और अच्छे अस्पताल में इलाज कराएगा। उसने कहा कि काम की कोई दिक्कत नहीं है, उसे खाना बनाना, काम करना सब आता है, वह सब कर लेगा, उसे दिव्यांग लड़की से शादी करके उसका सहारा बनने का सौभाग्य मिला है। उसने बताया कि उसके परिवार में उसका अब पत्नी के अलावा कोई नहीं है। मोहन दो भाई और दो बहन हैं। उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। परिवार में मां है। बहनों की शादी हो चुकी है। दूसरा भाई अलग रहता है।
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ग्राम रतनपुर निवासी मोहन रैकवार इंदौर के महू में राजमिस्त्री का काम करता है। परिवार वाले उसके रिश्ते की बात कई जगह चला रहे थे। इसी दौरान मोहन को उसके पिता के एक मित्र सागर जिले के ग्राम मड़ावन निवासी रामपाल मिल गए। उन्होंने उसे ललितपुर के कस्बा मदनपुर में दोनों आंखों से नेत्रहीन ृवंदना का रिश्ता बताया। वह लड़की देखने गया और उससे एवं उसके परिवारजनों से बात की तो पता चला कि दिव्यांग होने की वजह से कोई भी लड़का उससे शादी को राजी नहीं होता था। इस बात से मोहन का मन भावुक हो गया और उसने युवती को जीवन साथी बनाने का मन बना लिया। उसने अपने घर जाकर परिजनों को नेत्रहीन युवती से शादी करने के निर्णय की बात बताई तो परिजन उससे नाराज हो गए और उससे बोलचाल भी बंद कर दिया।
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घरवालों ने शगुन लौटाकर रात में बेटे को घर से निकाल दिया, 15 को बरात लेकर पहुंचा गांव
दस जुलाई को लड़की वाले उसके घर रिश्ता तय करने गए तो परिजनों ने स्वीकार नहीं किया। उन्हें वापस लौटा दिया। मोहन ने लड़की वालों को रिश्ता करने का भरोसा दिया। मोहन के परिजनों ने उस युवती से शादी नहीं करने के लिए उस पर काफी दबाव बनाया, लेकिन वह नहीं माना। दस जुलाई की रात करीब एक बजे उन्होंने उसे घर से ही निकाल दिया। इसके बाद मोहन ने सारी बात अपने पिता के मित्र को बताई तो उन्होंने उसे अपने घर सागर जिला के ग्राम मड़ावन में बुला लिया और वहीं से शादी पक्की करते हुए 15 जुलाई को बरात लेकर ललितपुर के कस्बा मदनपुर पहुंच गए। इस पर पूरे गांव में खुशी का माहौल रहा और हर कोई इस शादी को देखने के लिए शामिल हुआ। घोड़ी पर बैठकर दूल्हा निकला तो गांव में उसका खूब स्वागत भी हुआ। पूरे रीति रिवाज के अनुसार फलदान, जयमाला, सात फेरे, कन्यादान की सारी रस्में निभाई गईं। इसके बाद 16 जुलाई को विदाई समारोह हुआ, जिसके बाद बरात दुल्हन को लेकर वापस ग्राम मड़ावन पहुंची। दुल्हन वंदना तीन भाइयों में इकलौती बहन है।
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पत्नी की आंखों का इलाज क राऊंगा : मोहन
दूल्हा मोहन रैकवार ने बताया कि वह वंदना को ठीक करा लेगा, उसकी आंखों के इलाज में चार-पांच लाख रुपये या जितना भी लगेगा, वह लगाएगा और अच्छे अस्पताल में इलाज कराएगा। उसने कहा कि काम की कोई दिक्कत नहीं है, उसे खाना बनाना, काम करना सब आता है, वह सब कर लेगा, उसे दिव्यांग लड़की से शादी करके उसका सहारा बनने का सौभाग्य मिला है। उसने बताया कि उसके परिवार में उसका अब पत्नी के अलावा कोई नहीं है। मोहन दो भाई और दो बहन हैं। उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। परिवार में मां है। बहनों की शादी हो चुकी है। दूसरा भाई अलग रहता है।

दुल्हन को विदा करते परिजन व ग्रामीण।- फोटो : LALITPUR