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कुम्हेडी वाली अंजनी माता मंदिर में स्नान से बच्चों का दूर होता सूखा व नेत्र रोग
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ललितपुर/डोंगराखुर्द। जिला मुख्यालय से 48 किमी. दूर पूर्व दिशा में ग्राम कुम्हेड़ी स्थित अंजनी माता मंदिर में दर्शन करने वाला कोई भक्त निराश होकर नहीं लौटता है। मान्यता है कि माता के आशीर्वाद से कमजोर एवं नजर दोष से प्रभावित छोटे बच्चों को यहां लाकर स्नान कराने से बच्चे ठीक हो जाते हैं। इस ऐतिहासिक मंदिर में चैत्र मास की पूर्णिमा से अंजनी माता प्रांगण में साप्ताहिक विशाल मेला लगता है। आसपास के गांवों से श्रद्धालु यहां जवारे विर्सजन करने आते हैं।
अंजनी माता मंदिर परिसर में वर्ष 1949 में मेले की शुरूआत हुई थी। इस मेले में दूर दराज से दुकानदार आकर अपनी दुकानें लगाते हैं। मेले में बुंदेलखंड की संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिलती है। सात दिन तक चलने वाले इस मेला में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में माथा झुकाकर मन्नत मांगते हैं।
मान्यता के अनुसार बताते हैं कि एक महिला वाहन न मिलने पर पैदल अपने बीमार पुत्र को स्नान कराने दरबार में आ रही थी रास्ते में बच्चे की मौत हो गई, लेकिन माता में होने के कारण वह मृत बच्चे को लेकर मंदिर तक आई और विलाप करने लगी। कुछ समय बाद बालक के रोने की आवाज सुन मां की खुशी का ठिकाना न रहा। इस घटना से पूरे क्षेत्र के लोगों की श्रद्धा और बढ़ गई। तभी से लोग बड़ी संख्या में बच्चों को स्नान कराने मंदिर आने लगे।
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पीपल के पेड़ के नीचे से निकली थी मां की मूर्ति
जानकारों के मुताबिक मंदिर के समीप पीपल के पेड़ के नीचे जमीन से माता अंजनी की दिव्य मूर्ति निकली थी जिसमें हनुमान जी महाराज बाल स्वरूप मां की गोद में थे। लोगों की ऐसी मान्यता है कि बच्चों में कैसा भी सूखा रोग हो, नजर दोष हो माता के दरबार में स्नान कराने से ठीक हो जाता है।
मंदिर की सभी व्यवस्थाएं मां अंजनी धर्मार्थ न्यास द्वारा देखी जा रही हैं। मंदिर की पूजा एवं साज सज्जा और मेला व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा संचालित करता है। नवरात्र में नौ दिन तक अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की जाती है अंतिम दिन पूजन कर प्रसाद वितरित किया जाता है।
नीरज चतुर्वेदी, सदस्य मां अंजनी ट्रस्ट
इस मंदिर का इतिहास पुराना है बच्चों को मंदिर पर नहलाने से सभी तरह के रोगों का नाश होता है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करके लाभ प्राप्त करते हैं, रविवार और बुधवार को अधिक संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
राजन मिश्रा, पुजारी अंजनी मंदिर
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अंजनी माता मंदिर परिसर में वर्ष 1949 में मेले की शुरूआत हुई थी। इस मेले में दूर दराज से दुकानदार आकर अपनी दुकानें लगाते हैं। मेले में बुंदेलखंड की संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिलती है। सात दिन तक चलने वाले इस मेला में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में माथा झुकाकर मन्नत मांगते हैं।
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मान्यता के अनुसार बताते हैं कि एक महिला वाहन न मिलने पर पैदल अपने बीमार पुत्र को स्नान कराने दरबार में आ रही थी रास्ते में बच्चे की मौत हो गई, लेकिन माता में होने के कारण वह मृत बच्चे को लेकर मंदिर तक आई और विलाप करने लगी। कुछ समय बाद बालक के रोने की आवाज सुन मां की खुशी का ठिकाना न रहा। इस घटना से पूरे क्षेत्र के लोगों की श्रद्धा और बढ़ गई। तभी से लोग बड़ी संख्या में बच्चों को स्नान कराने मंदिर आने लगे।
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पीपल के पेड़ के नीचे से निकली थी मां की मूर्ति
जानकारों के मुताबिक मंदिर के समीप पीपल के पेड़ के नीचे जमीन से माता अंजनी की दिव्य मूर्ति निकली थी जिसमें हनुमान जी महाराज बाल स्वरूप मां की गोद में थे। लोगों की ऐसी मान्यता है कि बच्चों में कैसा भी सूखा रोग हो, नजर दोष हो माता के दरबार में स्नान कराने से ठीक हो जाता है।
मंदिर की सभी व्यवस्थाएं मां अंजनी धर्मार्थ न्यास द्वारा देखी जा रही हैं। मंदिर की पूजा एवं साज सज्जा और मेला व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा संचालित करता है। नवरात्र में नौ दिन तक अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की जाती है अंतिम दिन पूजन कर प्रसाद वितरित किया जाता है।
नीरज चतुर्वेदी, सदस्य मां अंजनी ट्रस्ट
इस मंदिर का इतिहास पुराना है बच्चों को मंदिर पर नहलाने से सभी तरह के रोगों का नाश होता है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करके लाभ प्राप्त करते हैं, रविवार और बुधवार को अधिक संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
राजन मिश्रा, पुजारी अंजनी मंदिर