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Lalitpur News: पीएम शहरी आवास योजना की जांच में पत्रावली देने से कतरा रहा विभाग
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एक माह पहले जांच अधिकारी ने मांगी थी निर्मित आवासों की सूची
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में धांधली की शिकायत पर उपमुख्यमंत्री के आदेश पर जिलास्तरीय कमेटी का गठन हो गया है। इस जांच को आगे बढ़ाने के लिए जांच कमेटी ने डूडा विभाग से शहर में निर्मित आवासों की सूची मांगी है। विभाग ने अभी तक इसे उपलब्ध नहीं कराया है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। इस जांच से डूडा विभाग में तैनात कर्मचारियों की सांसें फूली हुई हैं, क्योंकि इस योजना के तहत बड़ा खेल हुआ है।
शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले गरीब लोगों को पक्की छत देने के लिए प्रधानमंत्री शहरी गरीब आवास योजना चल रही है। लेकिन, यह योजना चंद लोगों के कारण पूर्ण रूप से फेल हो गई। गरीब आज भी अपने कच्चे मकानों में निवास कर रहे हैं। वहीं सक्षम लोगों ने प्लाट खरीदकर उन पर इमारतें खड़ी कर दी हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों में निर्मित आवासों को प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत धनराशि आवंटित हो गई है।
उपमुख्यमंत्री के आदेश पर अब जिला स्तरीय कमेटी इस खेल का पटापेक्ष करने में जुटी है। कुछ ऐसे आवास हैं, जो शहर से सटे ग्रामीण आवास दिखाकर बना दिए गए हैं। शिकायत में ऐसे भी भवनों का जिक्र है, जिन पर कई भवन स्वामियों के पत्थर लगाकर धनराशि निकाली गई है। जांच अधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से डूडा विभाग से शहर में निर्मित आवासों की सूची मांगी है। विभाग एक माह गुजर जाने के बाद भी जांच अधिकारी को सूची उपलब्ध नहीं करा रहा है। ऐसे में संदेह और भी गहरा होता जा रहा है।
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प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना की जांच सौंपी गई है। अभी जांच चल रही है। इसके विषय में कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।
राजेश सिंह, जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में धांधली की शिकायत पर उपमुख्यमंत्री के आदेश पर जिलास्तरीय कमेटी का गठन हो गया है। इस जांच को आगे बढ़ाने के लिए जांच कमेटी ने डूडा विभाग से शहर में निर्मित आवासों की सूची मांगी है। विभाग ने अभी तक इसे उपलब्ध नहीं कराया है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। इस जांच से डूडा विभाग में तैनात कर्मचारियों की सांसें फूली हुई हैं, क्योंकि इस योजना के तहत बड़ा खेल हुआ है।
शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले गरीब लोगों को पक्की छत देने के लिए प्रधानमंत्री शहरी गरीब आवास योजना चल रही है। लेकिन, यह योजना चंद लोगों के कारण पूर्ण रूप से फेल हो गई। गरीब आज भी अपने कच्चे मकानों में निवास कर रहे हैं। वहीं सक्षम लोगों ने प्लाट खरीदकर उन पर इमारतें खड़ी कर दी हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों में निर्मित आवासों को प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत धनराशि आवंटित हो गई है।
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उपमुख्यमंत्री के आदेश पर अब जिला स्तरीय कमेटी इस खेल का पटापेक्ष करने में जुटी है। कुछ ऐसे आवास हैं, जो शहर से सटे ग्रामीण आवास दिखाकर बना दिए गए हैं। शिकायत में ऐसे भी भवनों का जिक्र है, जिन पर कई भवन स्वामियों के पत्थर लगाकर धनराशि निकाली गई है। जांच अधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से डूडा विभाग से शहर में निर्मित आवासों की सूची मांगी है। विभाग एक माह गुजर जाने के बाद भी जांच अधिकारी को सूची उपलब्ध नहीं करा रहा है। ऐसे में संदेह और भी गहरा होता जा रहा है।
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प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना की जांच सौंपी गई है। अभी जांच चल रही है। इसके विषय में कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।
राजेश सिंह, जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी।