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ग्रामीण क्षेत्रों में बसों का संकट, डग्गामार वाहनों से सफर करने को मजबूर लोग
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ललितपुर। जिले में परिवहन विभाग ने विभिन्न रूटों पर बस संचालन के लिए परमिट जारी किए हैं, लेकिन अधिकांश बसें रूट पर नहीं हैं। बसें कम होने से यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। निजी बसों के अलावा रोडवेज की बसें भी बहुत कम चल रही हैं। इससे लोगों केे मजबूरन ही डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
राजनेता चुनाव नजदीक आते ही जनता के बीच में पहुंच कर विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराने के दावे कर रहे हैं, इनमें लोगों को सड़क डलवाने, पेयजल की सुविधाएं मुहैया कराने और सुचारु रूप से विद्युत आपूर्ति कराने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन वर्तमान में जो सुविधाएं जिम्मेदारों की अनदेखी की भेंट चढ़ गईं हैं। इस ओर प्रत्याशियों की नजर तक नहीं जा रही है। जबकि जनता समस्याओं से जूझ रही है। जिले में यातायात को सुगम बनाने के लिए परिवहन विभाग ने तय रूटों पर बसों के संचालन के लिए परमिट जारी किए हैं, जिनमें बसों के संचालन का रूट तय हैं। जिन पर नियमों का पालन कर बसें चलाने का प्रावधान है। इनमें बसों को तय रूट तक नियमित चलने और क्षमता के अनुसार सवारियों को बैठाने के साथ ही बसों का संचालन में कागजों के साथ ही बसों की फिटनेस व अन्य सुविधाओं से लैस रखना होता है।
जनपद में परिवहन विभाग द्वारा 74 अंतर क्षेत्रीय परमिट जारी किए। जो मुख्यालय से आस पास के जिलों में चलती हैं। इसके अलावा मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी 91 परमिट जारी किए हैं। इस प्रकार कुल 165 परमिट जारी हैं, लेकिन अधिकांश बसें कागजों पर दौड़ रहीं हैं। सड़कों पर नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में लोगों को आवागमन करना मुश्किल हो रहा है। लोग मुख्यालय समय से नहीं आ पा रहे हैं। किसी प्रकर आ भी गए तो वापस जाने का संकट बना हुआ है। यही नहीं कई मार्गों पर एक ही बस का संचालन हो रहा है। ऐसे में ठस कर यात्रा करने को मजबूर हो गए हैं। कई तो बसों की छतों पर जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। कुछ क्षेत्रों में डग्गामार वाहन ही सहारा बने हैं। आलम यह है कि दुर्घटनाएं तक होने के बाद भी जिम्मेदार सजग नहीं हैं।
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तय दूरी तक नहीं पहुंच रहीं बसें
परिवहन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात की सुविधा को बसों के लिए परमिट जारी किए गए हैं जिसमें मुख्यालय पर आने व जाने का समय तय है, लेकिन बस संचालक अधिक कमाई के चलते तय रूट से आधी दूरी तक ही पहुंच रहीं हैं। तय रूट पर गंतव्य तक न जाकर बीच से ही वापस हो रहीं हैं। ऐसे में लोगों को यातायात का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कार्रवाई से बचाव के लिए विभाग में राजस्व भी जमा हो रहा है। इससे विभाग को फायदा तो हो रहा, लेकिन आम लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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राजनेता चुनाव नजदीक आते ही जनता के बीच में पहुंच कर विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराने के दावे कर रहे हैं, इनमें लोगों को सड़क डलवाने, पेयजल की सुविधाएं मुहैया कराने और सुचारु रूप से विद्युत आपूर्ति कराने का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन वर्तमान में जो सुविधाएं जिम्मेदारों की अनदेखी की भेंट चढ़ गईं हैं। इस ओर प्रत्याशियों की नजर तक नहीं जा रही है। जबकि जनता समस्याओं से जूझ रही है। जिले में यातायात को सुगम बनाने के लिए परिवहन विभाग ने तय रूटों पर बसों के संचालन के लिए परमिट जारी किए हैं, जिनमें बसों के संचालन का रूट तय हैं। जिन पर नियमों का पालन कर बसें चलाने का प्रावधान है। इनमें बसों को तय रूट तक नियमित चलने और क्षमता के अनुसार सवारियों को बैठाने के साथ ही बसों का संचालन में कागजों के साथ ही बसों की फिटनेस व अन्य सुविधाओं से लैस रखना होता है।
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जनपद में परिवहन विभाग द्वारा 74 अंतर क्षेत्रीय परमिट जारी किए। जो मुख्यालय से आस पास के जिलों में चलती हैं। इसके अलावा मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी 91 परमिट जारी किए हैं। इस प्रकार कुल 165 परमिट जारी हैं, लेकिन अधिकांश बसें कागजों पर दौड़ रहीं हैं। सड़कों पर नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में लोगों को आवागमन करना मुश्किल हो रहा है। लोग मुख्यालय समय से नहीं आ पा रहे हैं। किसी प्रकर आ भी गए तो वापस जाने का संकट बना हुआ है। यही नहीं कई मार्गों पर एक ही बस का संचालन हो रहा है। ऐसे में ठस कर यात्रा करने को मजबूर हो गए हैं। कई तो बसों की छतों पर जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। कुछ क्षेत्रों में डग्गामार वाहन ही सहारा बने हैं। आलम यह है कि दुर्घटनाएं तक होने के बाद भी जिम्मेदार सजग नहीं हैं।
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तय दूरी तक नहीं पहुंच रहीं बसें
परिवहन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात की सुविधा को बसों के लिए परमिट जारी किए गए हैं जिसमें मुख्यालय पर आने व जाने का समय तय है, लेकिन बस संचालक अधिक कमाई के चलते तय रूट से आधी दूरी तक ही पहुंच रहीं हैं। तय रूट पर गंतव्य तक न जाकर बीच से ही वापस हो रहीं हैं। ऐसे में लोगों को यातायात का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कार्रवाई से बचाव के लिए विभाग में राजस्व भी जमा हो रहा है। इससे विभाग को फायदा तो हो रहा, लेकिन आम लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही है।