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ललितपुर भी आ सकती है सीबीआई टीम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Aug 2016 12:24 AM IST
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police, lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अवैध बालू खनन की जांच के आदेश सीबीआई द्वारा कराने के निर्देश देने के बाद पूरे बुंदेलखंड में हड़कंप मचा हुआ है। खनिज विभाग में मची हलचल से अंदाजा लगाया जा रहा है कि सीबीआई टीम जनपद का भी दौरा कर सकती है।
बुंदेलखंड के जिलों में पिछले कई सालों से बालू की खुली लूट होती रही है। जनपद ललितपुर में भी बालू के अवैध खनन का काम वर्षों से होता रहा है। इस काम की जानकारी खनिज विभाग को होने के बाद भी इस पर कोई रोकथाम नहीं लग सकी है। सीबीआई जांच के आदेश और मंगलवार को अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद से स्थानीय खनिज विभाग में दस्तावेजों को खंगालना शुरू हो गया है। अमर उजाला ने अपनी खबर में बताया था कि केवल एक वर्ष में जनपद की चार खदानों के जरिये शासन को करीब 30 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि केवल चार खदानों के जरिये एक वर्ष में 30 करोड़ का नुकसान पहुंचाने वाले खनिज माफिया ने कितने बेखौफ तरीके से कार्य किया है।
ये नुकसान तो उन खदानों में हुआ है, जहां की लीज आवंटन खनिज विभाग द्वारा किया गया था। इसके अलावा जनपद में कई घाट ऐसे हैं, जहां पर वर्षों से अवैध खनन हो रहा है। अमर उजाला ने प्रशासन के इस दावे की पोल खोलते हुए बताया कि केवल अप्रैल 2013 से लेकर मार्च 2014 तक एक साल में 30 करोड़ की बालू का अवैध खनन किया गया।
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2012 से नहीं हुए पट्टे
जनपद में मई 2012 के बाद से खनिज विभाग की ओर से कोई बालू का पट्टा नहीं किया गया है, लेकिन इन चार सालों में विभागीय कार्रवाई के दस्तावेज खंगाले जाएं तो स्पष्ट होता है कि कितने बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन होता रहा है। मंगलवार को खनिज विभाग ने तालबेहट तहसील में अवैध खनन लेकर बालू ले जा रहे पांच ट्रैक्टरों को पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। बालू का सबसे ज्यादा अवैध खनन तालबेहट तहसील में किया जा रहा है।
इसके अलावा कैलगुंवा, महरौनी, बानपुर, बार क्षेत्र में भी जमकर अवैध खनन हो रहा है। विभाग के दावों के उलट कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अप्रैल 2013 से मार्च 2014 तक जनपद में चार खदानों का आवंटन किया गया, जिन्होंने 5600 क्यूबिक मीटर बाल का खनन करके चार करोड़ बीस लाख रुपये की रायल्टी जमा की गई। विभाग के 2012 से बालू पट्टा न होने के दावों की पोल कैग की रिपोर्ट खोलती है। अगर पट्टे ही नहीं हुए, तो फिर चार करोड़ रायल्टी किस नाम से जमा की गई।
दायरा बढ़ा तो फंसेंगे सैंड स्टोन माफिया
सीबीआई को हाईकोर्ट की तरफ से अवैध बालू खनन की जांच करने के आदेश दिए गए थे। जनपद में बालू के अवैध खनन से ज्यादा सैंड स्टोन व ग्रेनाइट का अवैध खनन हो रहा है। अगर सीबीआई जांच का दायरा बढ़ाया गया तो जनपद में कई सैंड स्टोन व ग्रेनाइट के माफिया का खुलासा हो सकता है। धौर्रा क्षेत्र में सैंड स्टोन की खदान मालिकों द्वारा अपने क्षेत्र को छोड़कर वन विभाग, ग्राम सभा की जमीन में खनन कर डाला है। सूमे की पहाड़ी के आस पास के इलाकों में जमकर अवैध खनन किया जा रहा है।
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बुंदेलखंड के जिलों में पिछले कई सालों से बालू की खुली लूट होती रही है। जनपद ललितपुर में भी बालू के अवैध खनन का काम वर्षों से होता रहा है। इस काम की जानकारी खनिज विभाग को होने के बाद भी इस पर कोई रोकथाम नहीं लग सकी है। सीबीआई जांच के आदेश और मंगलवार को अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद से स्थानीय खनिज विभाग में दस्तावेजों को खंगालना शुरू हो गया है। अमर उजाला ने अपनी खबर में बताया था कि केवल एक वर्ष में जनपद की चार खदानों के जरिये शासन को करीब 30 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि केवल चार खदानों के जरिये एक वर्ष में 30 करोड़ का नुकसान पहुंचाने वाले खनिज माफिया ने कितने बेखौफ तरीके से कार्य किया है।
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ये नुकसान तो उन खदानों में हुआ है, जहां की लीज आवंटन खनिज विभाग द्वारा किया गया था। इसके अलावा जनपद में कई घाट ऐसे हैं, जहां पर वर्षों से अवैध खनन हो रहा है। अमर उजाला ने प्रशासन के इस दावे की पोल खोलते हुए बताया कि केवल अप्रैल 2013 से लेकर मार्च 2014 तक एक साल में 30 करोड़ की बालू का अवैध खनन किया गया।
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2012 से नहीं हुए पट्टे
जनपद में मई 2012 के बाद से खनिज विभाग की ओर से कोई बालू का पट्टा नहीं किया गया है, लेकिन इन चार सालों में विभागीय कार्रवाई के दस्तावेज खंगाले जाएं तो स्पष्ट होता है कि कितने बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन होता रहा है। मंगलवार को खनिज विभाग ने तालबेहट तहसील में अवैध खनन लेकर बालू ले जा रहे पांच ट्रैक्टरों को पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। बालू का सबसे ज्यादा अवैध खनन तालबेहट तहसील में किया जा रहा है।
इसके अलावा कैलगुंवा, महरौनी, बानपुर, बार क्षेत्र में भी जमकर अवैध खनन हो रहा है। विभाग के दावों के उलट कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अप्रैल 2013 से मार्च 2014 तक जनपद में चार खदानों का आवंटन किया गया, जिन्होंने 5600 क्यूबिक मीटर बाल का खनन करके चार करोड़ बीस लाख रुपये की रायल्टी जमा की गई। विभाग के 2012 से बालू पट्टा न होने के दावों की पोल कैग की रिपोर्ट खोलती है। अगर पट्टे ही नहीं हुए, तो फिर चार करोड़ रायल्टी किस नाम से जमा की गई।
दायरा बढ़ा तो फंसेंगे सैंड स्टोन माफिया
सीबीआई को हाईकोर्ट की तरफ से अवैध बालू खनन की जांच करने के आदेश दिए गए थे। जनपद में बालू के अवैध खनन से ज्यादा सैंड स्टोन व ग्रेनाइट का अवैध खनन हो रहा है। अगर सीबीआई जांच का दायरा बढ़ाया गया तो जनपद में कई सैंड स्टोन व ग्रेनाइट के माफिया का खुलासा हो सकता है। धौर्रा क्षेत्र में सैंड स्टोन की खदान मालिकों द्वारा अपने क्षेत्र को छोड़कर वन विभाग, ग्राम सभा की जमीन में खनन कर डाला है। सूमे की पहाड़ी के आस पास के इलाकों में जमकर अवैध खनन किया जा रहा है।