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धर्मात्मा को प्राप्त होते हैं श्रेष्ठ पद-सुधासागर
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ललितपुर। श्री अभिनंदनोदय तीर्थ में श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने समयसार प्रशिक्षण शिविर में कहा कि धर्म वंदनीय और अधर्म निंदनीय है। धर्म वही, जो हमें उत्तम पद की प्राप्ति करा दे। दुनिया के जितने भी श्रेष्ठ पद हैं वह सभी धर्मात्मा को प्राप्त हो जाते हैं। मनुष्य के अंदर भगवत्ता को प्रकट करने वाला ही धर्म है।
मुनि श्री ने कहा कि धन कमाना बड़ी चीज नहीं, धन की सुरक्षा करना बहुत कठिन है। नियम लेना कठिन नहीं, नियम को निभाना कठिन है। जन्म लेना कठिन नहीं, जन्म तो पशु भी लेते हैं, पर जन्म के बाद अच्छा जीवन जीना बहुत दुर्लभ है। मरना कठिन नहीं, कुछ पल लगते हैं मरने में, अच्छा जीवन जीकर मरना बहुत कठिन है। जिसके मरने पर पड़ोसी भी कह उठे कि बहुत नेक इंसान था, समझ लेना उसने बहुत अच्छा जीवन जिया और जिसके मरने पर पड़ोसी कह उठे अच्छा हुआ जल्दी चला गया, समझ लेना, उससे जीवन जीने में कोई चूक हुई है। जीवन जीने का पैमाना हमारे इर्दगिर्द ही रहता है अगर हमने अपने आस पास अपनों के बीच सम्मान पा लिया समझ लेना तुम अच्छा जीवन जी रहे हो।
मुनि श्री ने कहा कि पाषाण से मूर्ति कैसे बनती है। पाषाण में जो बाधक तत्व है उसको निकालते जाओ आकार में जो बाधक बन रहा है उसे हटाते जाओ जो वेस्टेज है उसको निकालना ही मूर्ति स्वयमेव ही प्रकट हो जाती है। ऐसा ही हमारा जीवन है इसमें से बुराइयों को निकालते जाओ एक बुराई के निकलते ही एक गुण प्रकट होता है। जीवन से जितनी बुराइयां निकलेंगी अच्छाइयां स्वयमेव ही प्रकट हो जाएगी और व्यक्ति नर से नारायण और परमात्मा बन जाता है। हमारे अंदर के अनंत गुण जो भरे हुए हैं उन्हें प्रकट करने वाला चाहिए सम्यक पुरुषार्थ करने वाला पुरुषार्थी होना चाहिए, यह धर्म की शरण में आए बिना प्रकट नहीं होता है।
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भगवान का श्रावकों ने किया अभिषेक
प्रात:काल मूलननायक अभिनंदनाथ भगवान का श्रावकों ने अभिषेक किया इसके उपरांत मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा का पुर्ण्याजन तरूण काला, रजनी काला व्यावर हाल मुंबई,चंदा बाई, संदीप सराफ परिवार, निर्मल चंद्र कुम्हैडी परिवार को मिला। तदुपरांत श्रावक श्रेष्ठि परिवारों ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं मुनि श्री का पादप्रक्षालन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
आहारदान का मिला सौभाग्य
शनिवार को निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज को आहारदान जिनेंद्र कुमार नईवस्ती परिवार, मुनि पूज्य सागर महाराज आहारदान महेंद्र कुमार, मनोज कुमार पंचमनगर परिवार, ऐलक धैर्य सागर के पडगाहन आहारदान किरण प्रकाश शास्त्री कोटा परिवार एवं क्षुल्लक गंभीर सागर को आहारदान ब्रह्मचारिणी सुनीता, राजीव हिरावल परिवार को मिला।
मिल रहा समयसार ग्रंथ का बोध
प्रात:काल एवं मध्याह्न में श्रमण संस्कृति संस्थान द्वारा श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर में मुनि सुधा सागर महाराज ने छठवें दिन बच्चों को धर्म का मर्म समयसार ग्रंथ की बारीकियों को विस्तार से समझाया। इस दौरान शिविरार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान गुरू मुख से सुनकर लोग उत्साहित हैं। शिविर की व्यवस्थाओं को संचालित करने में ब्रह्मचारी मनोज, ब्र.सविता के अतिरिक्त जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया, मंदिर प्रबंधक राजेंद्र जैन, मोदी पंकज जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, धार्मिक आयोजन संयोजक मनोज जैन, शिविर प्रभारी पं. आलोक शास्त्री, संजीव जैन, जिनेंद्र जैन, सत्येंद्र गदयाना के साथ महिला मंडल का सक्रिय योगदान रहा।
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मुनि श्री ने कहा कि धन कमाना बड़ी चीज नहीं, धन की सुरक्षा करना बहुत कठिन है। नियम लेना कठिन नहीं, नियम को निभाना कठिन है। जन्म लेना कठिन नहीं, जन्म तो पशु भी लेते हैं, पर जन्म के बाद अच्छा जीवन जीना बहुत दुर्लभ है। मरना कठिन नहीं, कुछ पल लगते हैं मरने में, अच्छा जीवन जीकर मरना बहुत कठिन है। जिसके मरने पर पड़ोसी भी कह उठे कि बहुत नेक इंसान था, समझ लेना उसने बहुत अच्छा जीवन जिया और जिसके मरने पर पड़ोसी कह उठे अच्छा हुआ जल्दी चला गया, समझ लेना, उससे जीवन जीने में कोई चूक हुई है। जीवन जीने का पैमाना हमारे इर्दगिर्द ही रहता है अगर हमने अपने आस पास अपनों के बीच सम्मान पा लिया समझ लेना तुम अच्छा जीवन जी रहे हो।
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मुनि श्री ने कहा कि पाषाण से मूर्ति कैसे बनती है। पाषाण में जो बाधक तत्व है उसको निकालते जाओ आकार में जो बाधक बन रहा है उसे हटाते जाओ जो वेस्टेज है उसको निकालना ही मूर्ति स्वयमेव ही प्रकट हो जाती है। ऐसा ही हमारा जीवन है इसमें से बुराइयों को निकालते जाओ एक बुराई के निकलते ही एक गुण प्रकट होता है। जीवन से जितनी बुराइयां निकलेंगी अच्छाइयां स्वयमेव ही प्रकट हो जाएगी और व्यक्ति नर से नारायण और परमात्मा बन जाता है। हमारे अंदर के अनंत गुण जो भरे हुए हैं उन्हें प्रकट करने वाला चाहिए सम्यक पुरुषार्थ करने वाला पुरुषार्थी होना चाहिए, यह धर्म की शरण में आए बिना प्रकट नहीं होता है।
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भगवान का श्रावकों ने किया अभिषेक
प्रात:काल मूलननायक अभिनंदनाथ भगवान का श्रावकों ने अभिषेक किया इसके उपरांत मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा का पुर्ण्याजन तरूण काला, रजनी काला व्यावर हाल मुंबई,चंदा बाई, संदीप सराफ परिवार, निर्मल चंद्र कुम्हैडी परिवार को मिला। तदुपरांत श्रावक श्रेष्ठि परिवारों ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं मुनि श्री का पादप्रक्षालन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
आहारदान का मिला सौभाग्य
शनिवार को निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज को आहारदान जिनेंद्र कुमार नईवस्ती परिवार, मुनि पूज्य सागर महाराज आहारदान महेंद्र कुमार, मनोज कुमार पंचमनगर परिवार, ऐलक धैर्य सागर के पडगाहन आहारदान किरण प्रकाश शास्त्री कोटा परिवार एवं क्षुल्लक गंभीर सागर को आहारदान ब्रह्मचारिणी सुनीता, राजीव हिरावल परिवार को मिला।
मिल रहा समयसार ग्रंथ का बोध
प्रात:काल एवं मध्याह्न में श्रमण संस्कृति संस्थान द्वारा श्री समयसार प्रशिक्षण शिविर में मुनि सुधा सागर महाराज ने छठवें दिन बच्चों को धर्म का मर्म समयसार ग्रंथ की बारीकियों को विस्तार से समझाया। इस दौरान शिविरार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान गुरू मुख से सुनकर लोग उत्साहित हैं। शिविर की व्यवस्थाओं को संचालित करने में ब्रह्मचारी मनोज, ब्र.सविता के अतिरिक्त जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया, मंदिर प्रबंधक राजेंद्र जैन, मोदी पंकज जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, धार्मिक आयोजन संयोजक मनोज जैन, शिविर प्रभारी पं. आलोक शास्त्री, संजीव जैन, जिनेंद्र जैन, सत्येंद्र गदयाना के साथ महिला मंडल का सक्रिय योगदान रहा।