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बच्चों को पढ़ाएं हनुमान चालीसा : चंद्रेश्वर गिरी
Sun, 27 Aug 2023 01:11 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Sun, 27 Aug 2023 01:11 AM IST
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धार्मिक आयोजन में जिन बच्चों ने चालीसा पढ़ा उनके प्रबंधन को किया सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सिद्धपीठ चंडी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए बच्चों को संस्कार देने की जरूरत है। इस मौके पर जिन स्कूलों के बच्चों ने सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ में भाग लिया था उन स्कूल प्रबंधकों को मंच से सम्मानित किया। कहा कि बच्चों को हनुमान चालीसा अवश्य पढ़वाएं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन के शुभारंभ पर कई स्कूलों के बच्चों ने सामूहिक हनुमान चालीसा के 11 हजार पाठ किए लेकिन कुछ अंग्रेजी माध्यम के कुछ स्कूलों ने यह कहकर बच्चे भेजने से मना कर दिया कि उनके बच्चे हिंदी में हनुमान चालीसा नहीं पढ़ पाएंगे। जिन स्कूलों ने बच्चों को रोका उन्हें मंथन करना चाहिए कि वह भारत की सनातन संस्कृति को कैसे भूल रहे हैं।
हमें बच्चों को धार्मिक कार्यक्रमों से अलग नहीं करना चाहिए। जरूरी है कि सभी बच्चों को श्री हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। इस अवसर पर संगीतमय हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। कार्यक्रम में कई प्रमुख संत और नगर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सिद्धपीठ चंडी पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए बच्चों को संस्कार देने की जरूरत है। इस मौके पर जिन स्कूलों के बच्चों ने सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ में भाग लिया था उन स्कूल प्रबंधकों को मंच से सम्मानित किया। कहा कि बच्चों को हनुमान चालीसा अवश्य पढ़वाएं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन के शुभारंभ पर कई स्कूलों के बच्चों ने सामूहिक हनुमान चालीसा के 11 हजार पाठ किए लेकिन कुछ अंग्रेजी माध्यम के कुछ स्कूलों ने यह कहकर बच्चे भेजने से मना कर दिया कि उनके बच्चे हिंदी में हनुमान चालीसा नहीं पढ़ पाएंगे। जिन स्कूलों ने बच्चों को रोका उन्हें मंथन करना चाहिए कि वह भारत की सनातन संस्कृति को कैसे भूल रहे हैं।
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हमें बच्चों को धार्मिक कार्यक्रमों से अलग नहीं करना चाहिए। जरूरी है कि सभी बच्चों को श्री हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। इस अवसर पर संगीतमय हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। कार्यक्रम में कई प्रमुख संत और नगर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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