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मेघालय की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हुए छात्र छात्राएं
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रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय में आयोजित मेघालय राज्य की सांस्कृतिक विरासत विषय पर गोष्ठी मे?
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय के सभागार में ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ क्लब द्वारा मेघालय राज्य की सांस्कृतिक विरासत विषय पर आयोजित हुई विचार गोष्ठी में छात्र-छात्राएं मेघालय की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हुए।
गोष्ठी का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. जेपी सिंह ने किया। क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. रीतेश कुमार खरे ने बताया कि एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश को अरुणाचल प्रदेश और मेघालय से जोड़ा गया है। इसमें राजकीय महाविद्यालय को कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन शिलांग के साथ संलग्न किया गया है। इससे दोनों राज्यों के छात्र-छात्राओं के मध्य संस्कृति का आदान-प्रदान हो सकेगा। मेघालय राज्य की जनजातियों में स्त्रियों का ऊंचा स्थान है। परिवार की संपत्ति स्त्रियों के नाम पर होती है और बच्चों के नाम के आगे मां का सरनेम ही लगाया जाता है। वहां पर विवाह के बाद दामाद के ससुराल जाने की परंपरा होती है। रिया ने मेघालय राज्य का परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने मेघालय की यात्रा से जुड़े संस्मरण साझा किए। बताया कि राज्य में बहुत जल्दी सुबह हो जाती है और कभी भी बारिश होने लगती है। यहां के लोग मिलनसार और लोगों के स्वागत के लिए तत्पर रहते हैं। वहां अभिवादन के दौरान कुमनो कहते हैं, जिसके जवाब में कुमने शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसी प्रकार धन्यवाद के लिए कुबलेई शब्द का प्रयोग किया जाता है। अंकित झा ने मेघालय के लोकगीत को प्रस्तुत किया, जिसे बहुत सराहा गया।
क्लब अध्यक्ष मेघा नायक ने खासी, गारो और जैंतिया जनजातियों के जीवन शैली पर प्रकाश डाला। सौम्या जैन ने मेघालय की प्राकृतिक सुंदरता और जैविक विविधता का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया। जैंतिया जनजातियों द्वारा फसल की बुवाई के समय किए जाने वाले परंपरागत नृत्य का तकनीकी के माध्यम से प्रसारण किया गया। अन्य छात्र-छात्राओं ने मेघालय के अलग-अलग विषयों पर अनछुए पहलुओं को सबके समक्ष रखा।
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कार्यक्रम में प्रो. केशव देव, डॉ अजय कुमार, डॉ मनीष कुमार वर्मा, डॉ डीके साहू, प्रो. अर्चना सिरोठिया, प्रो.अनुराधा, प्रिंस राठौर, देवेंद्र सिंह, विकास पुरोहित, हिमांशी जैन, अमित कुमार, स्वतंत्र कुमार आदि उपस्थित रहे।
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गोष्ठी का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. जेपी सिंह ने किया। क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. रीतेश कुमार खरे ने बताया कि एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश को अरुणाचल प्रदेश और मेघालय से जोड़ा गया है। इसमें राजकीय महाविद्यालय को कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन शिलांग के साथ संलग्न किया गया है। इससे दोनों राज्यों के छात्र-छात्राओं के मध्य संस्कृति का आदान-प्रदान हो सकेगा। मेघालय राज्य की जनजातियों में स्त्रियों का ऊंचा स्थान है। परिवार की संपत्ति स्त्रियों के नाम पर होती है और बच्चों के नाम के आगे मां का सरनेम ही लगाया जाता है। वहां पर विवाह के बाद दामाद के ससुराल जाने की परंपरा होती है। रिया ने मेघालय राज्य का परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने मेघालय की यात्रा से जुड़े संस्मरण साझा किए। बताया कि राज्य में बहुत जल्दी सुबह हो जाती है और कभी भी बारिश होने लगती है। यहां के लोग मिलनसार और लोगों के स्वागत के लिए तत्पर रहते हैं। वहां अभिवादन के दौरान कुमनो कहते हैं, जिसके जवाब में कुमने शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसी प्रकार धन्यवाद के लिए कुबलेई शब्द का प्रयोग किया जाता है। अंकित झा ने मेघालय के लोकगीत को प्रस्तुत किया, जिसे बहुत सराहा गया।
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क्लब अध्यक्ष मेघा नायक ने खासी, गारो और जैंतिया जनजातियों के जीवन शैली पर प्रकाश डाला। सौम्या जैन ने मेघालय की प्राकृतिक सुंदरता और जैविक विविधता का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया। जैंतिया जनजातियों द्वारा फसल की बुवाई के समय किए जाने वाले परंपरागत नृत्य का तकनीकी के माध्यम से प्रसारण किया गया। अन्य छात्र-छात्राओं ने मेघालय के अलग-अलग विषयों पर अनछुए पहलुओं को सबके समक्ष रखा।
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कार्यक्रम में प्रो. केशव देव, डॉ अजय कुमार, डॉ मनीष कुमार वर्मा, डॉ डीके साहू, प्रो. अर्चना सिरोठिया, प्रो.अनुराधा, प्रिंस राठौर, देवेंद्र सिंह, विकास पुरोहित, हिमांशी जैन, अमित कुमार, स्वतंत्र कुमार आदि उपस्थित रहे।