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अवैध रूप से हो रहा है पत्थर का खनन
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कैप्सन - जंगल में बनते अवैध रूप से खंड़ा
- फोटो : TALDEHATE
तालबेहट। क्षेत्र की वन संपदा को खतरा पैदा हो गया है। क्षेत्र में अवैध कटान के साथ- साथ अवैध खनन का कारोबार जारी है। क्षेत्र के ग्राम हर्षपुर, बॉदीवर, गुंदेला, लालौन, रजावन, गूगर, माताटीला गांवों में जंगल से अवैध खंडे (पत्थर) तैयार करने का कारोबार चल रहा है।
प्रकृति को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सरकार पौधरोपण के अलावा जंगलों की सुरक्षा एवं उनके संरक्षण पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। पर, कुछ लोग अपने लाभ के खातिर जंगल के अस्तित्व की चिंता न करते हुए अवैध खनन करने पर आमादा हैं। इस समय तालबेहट तहसील के ग्राम विजयपुरा, सारसेड़, सुनौरी, विरधा, नत्थीखेड़ा, रामपुर, पवा सरखड़ी, वर्मा बिहार, गनेशुपरा, बिजरौठा, ककड़ारी, हर्षपुर, गुंलेदा, बादीबर, थानागांव, माताटीला, भरतपुरा, बनगुवाकलां गांवों में वन विभाग के पत्थरों का अवैध कारोबार किया जा रहा है। इस समय नगर में प्रतिदिन कई दर्जन ट्रैक्टरों द्वारा अवैध बालू, खंडा- पत्थर तथा पूराकलां क्षेत्र से प्रतिदिन दर्जनों ट्रक बालू रात में निकल रही है। जानकारी के बाद भी कुछ नहीं हो रहा है।
बचते हैं कार्रवाई से
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि अवैध खंडा निकालने की शिकायत अधिकारियों से करने पर वह एक- दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपना पल्ला झाड लेते हैं। पुलिस, एसडीएम या खनन अधिकारी को अवगत कराने की बात कहते हैं तो वन विभाग के कर्मचारी सुरक्षा का हवाला देकर कार्रवाई से बचते हैं।
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कुछ दिन रहती है रोक
जब भी अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए अधिकारियों ने संयुक्त रूप से टीम बनाकर छापे की कार्रवाई की, तब कामयाबी मिली है। पर, कुछ दिन तक इन कार्यों पर रोक रहती है, लेकिन कुछ दिन बाद फिर वही पुराना ढर्रा शुरू हो जाता है।
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जहां पर पत्थरों का खनन हो रहा है, वह जमीन किसानों की है। उन्हीं के खेत में खनन होता है। उससे वन विभाग का कोई लेना- देना नहीं है।
- प्रेमशंकर तिवारी, वन रेंजर
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प्रकृति को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सरकार पौधरोपण के अलावा जंगलों की सुरक्षा एवं उनके संरक्षण पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। पर, कुछ लोग अपने लाभ के खातिर जंगल के अस्तित्व की चिंता न करते हुए अवैध खनन करने पर आमादा हैं। इस समय तालबेहट तहसील के ग्राम विजयपुरा, सारसेड़, सुनौरी, विरधा, नत्थीखेड़ा, रामपुर, पवा सरखड़ी, वर्मा बिहार, गनेशुपरा, बिजरौठा, ककड़ारी, हर्षपुर, गुंलेदा, बादीबर, थानागांव, माताटीला, भरतपुरा, बनगुवाकलां गांवों में वन विभाग के पत्थरों का अवैध कारोबार किया जा रहा है। इस समय नगर में प्रतिदिन कई दर्जन ट्रैक्टरों द्वारा अवैध बालू, खंडा- पत्थर तथा पूराकलां क्षेत्र से प्रतिदिन दर्जनों ट्रक बालू रात में निकल रही है। जानकारी के बाद भी कुछ नहीं हो रहा है।
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बचते हैं कार्रवाई से
क्षेत्र के लोगों ने बताया कि अवैध खंडा निकालने की शिकायत अधिकारियों से करने पर वह एक- दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपना पल्ला झाड लेते हैं। पुलिस, एसडीएम या खनन अधिकारी को अवगत कराने की बात कहते हैं तो वन विभाग के कर्मचारी सुरक्षा का हवाला देकर कार्रवाई से बचते हैं।
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कुछ दिन रहती है रोक
जब भी अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए अधिकारियों ने संयुक्त रूप से टीम बनाकर छापे की कार्रवाई की, तब कामयाबी मिली है। पर, कुछ दिन तक इन कार्यों पर रोक रहती है, लेकिन कुछ दिन बाद फिर वही पुराना ढर्रा शुरू हो जाता है।
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जहां पर पत्थरों का खनन हो रहा है, वह जमीन किसानों की है। उन्हीं के खेत में खनन होता है। उससे वन विभाग का कोई लेना- देना नहीं है।
- प्रेमशंकर तिवारी, वन रेंजर