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छह लाख पशुओं का होगा टीकाकरण
lalitpur
Updated Wed, 20 Apr 2016 01:19 AM IST
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पश्ाुपालन
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। पशुओं में खुरपका व मुंहपका बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण कराया जाएगा। शासन ने 6.81 लाख पशुओं का टीकाकरण कराने का लक्ष्य जिले को दिया है।
गर्मी के सीजन में पशुओं को खुरपका और मुंहपका की बीमारी होने लगती है, जिससे पशुओं की जान तक चली जाती है। इसके मद्देनजर हर साल पशुओं को टीका लगाए जाते हैं। इस साल 6.81 लाख पशुओं का टीकाकरण कराया जाना है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. जीवनदत्त ने लक्ष्य को हासिल करने के लिए 24 टीमें बनाई हैं। 15 मई तक लक्ष्य पूर्ण करना है। लेकिन, यह आसान नहीं होगा। इसकी प्रमुख वजह टीम के कई सदस्य भूसा केंद्र का भी अतिरिक्त काम देख रहे हैं, जिससे टीम के सदस्यों को टीकाकरण को गति देने में परेशानी आ रही है। उधर, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. जीवन दत्त का कहना है कि इस समय फसलों की कटाई हो गई है, जिससे तमाम पशु छुट्टा हो गए हैं। पशुपालक अपने पशुओं को सुबह से छोड़ देते हैं। इन हालात में टीम के सदस्यों को कम ही पशु मिल रहे हैं। उन्होंने तय समय सीमा में लक्ष्य पूरा करने का भरोसा दिया है।
कैसे होगा अन्ना पशुओं का टीकाकरण
जिन पशुओं को पालकों ने पूरी तरह छोड़ दिया है, उन पशुओं का टीकाकरण होना बेहद मुश्किल है। भोर होते ही गांव में ठहरने वाले पशु झुंड में खेतों की ओर निकल जाते हैं। ऐसे में अन्ना पशुओं का टीकाकरण होने के सवाल का जवाब विभागीय अफसरों के पास नहीं है।
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गर्मी के सीजन में पशुओं को खुरपका और मुंहपका की बीमारी होने लगती है, जिससे पशुओं की जान तक चली जाती है। इसके मद्देनजर हर साल पशुओं को टीका लगाए जाते हैं। इस साल 6.81 लाख पशुओं का टीकाकरण कराया जाना है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. जीवनदत्त ने लक्ष्य को हासिल करने के लिए 24 टीमें बनाई हैं। 15 मई तक लक्ष्य पूर्ण करना है। लेकिन, यह आसान नहीं होगा। इसकी प्रमुख वजह टीम के कई सदस्य भूसा केंद्र का भी अतिरिक्त काम देख रहे हैं, जिससे टीम के सदस्यों को टीकाकरण को गति देने में परेशानी आ रही है। उधर, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. जीवन दत्त का कहना है कि इस समय फसलों की कटाई हो गई है, जिससे तमाम पशु छुट्टा हो गए हैं। पशुपालक अपने पशुओं को सुबह से छोड़ देते हैं। इन हालात में टीम के सदस्यों को कम ही पशु मिल रहे हैं। उन्होंने तय समय सीमा में लक्ष्य पूरा करने का भरोसा दिया है।
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कैसे होगा अन्ना पशुओं का टीकाकरण
जिन पशुओं को पालकों ने पूरी तरह छोड़ दिया है, उन पशुओं का टीकाकरण होना बेहद मुश्किल है। भोर होते ही गांव में ठहरने वाले पशु झुंड में खेतों की ओर निकल जाते हैं। ऐसे में अन्ना पशुओं का टीकाकरण होने के सवाल का जवाब विभागीय अफसरों के पास नहीं है।
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