{"_id":"65be7698bb6209b9130a49e1","slug":"shravak-nihalchandra-jain-will-take-jaineshwari-diksha-on-22nd-vinauli-yatra-will-start-today-lalitpur-news-c-131-1-ltp1001-109803-2024-02-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: श्रावक निहालचंद्र जैन 22 को लेंगे जैनेश्वरी दीक्षा, आज निकलेगी विनौली यात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: श्रावक निहालचंद्र जैन 22 को लेंगे जैनेश्वरी दीक्षा, आज निकलेगी विनौली यात्रा
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर के श्रावक निहालचंद जैन ने साधना और त्याग के साथ वैराग्य के मार्ग का अनुसरण कर प्रख्यात जैनाचार्य चर्याशिरोमणि आचार्य विशुद्धसागर महाराज से जैनेश्वरी दीक्षा का आशीर्वाद अतिशय जैन तीर्थ महावीर राजस्थान में प्राप्त किया। दीक्षा के पहले रविवार शाम सात बजे उनकी विनौली यात्रा प्रमुख मार्गों से निकलेगी।
रतलाम में पंचकल्याणक के दौरान 22 फरवरी को ब्रह्मचारी निहालचंद जैन के साथ ब्रह्मचारी रवींद्र जैन महरौनी, ब्रह्मचारी जिनेश भोपाल की दीक्षा हुई। शहर में जैन समाज की ओर से निहालचंद जैन की दीक्षा के पूर्व संस्कार आयोजित किए गए। उनके आवास पर हल्दी मेंहदी के संस्कार श्रावक-श्राविकाओं ने कर पुण्यार्जन किया। जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया एवं महामंत्री आकाश जैन के अनुसार दीक्षार्थियों की चार फरवरी को शाम छह बजे पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में गोदभराई के उपरांत विनौली यात्रा मनोकामना उत्सव स्थली जेडी वाडा से नजाई बाजार गेंदालाल पंप से होते हुए घंटाघर चौक से जैन अटामंदिर पहुचेगी।
-- -- -- -- -- -- -- प्रकांड विद्वान हैं निहालचंद्र जैन
इलाइट चौराहा निवासी श्रावक निहालचंद जैन धर्म के प्रकांड विद्वान हैं। उन्होंने कई पूजन विधान, भजन, भक्तियां लिखी हैं। इष्टोपदेश, समाधितंत्र, कार्तिक अनुप्रेक्षा, स्वरूप संबोधन, ज्ञानांकुश, समाधिसार, समाधितंत्र के अतिरिक्त समाधिस्थ सराकोद्धारक आचार्य ज्ञानसागर महाराज की रचनाएं एवं स्वसंवेदी श्रमण महाकाव्य आचार्य विरुद्धसागर महाराज का लेखन किया है। वर्ष 1978 से क्षुल्लक सन्मति सागर महाराज एवं क्षुल्लक गुणसागर महाराज के सानिध्य में धार्मिक संस्कारों में रहकर निहालचंद ने 1988 में संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज के जनपद प्रवास के दौरान आचार्य श्री से दो प्रतिमा के संस्कार लिए। वर्ष 1993 में सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में आयोजित सिंहरथ महामहोत्सव में सबसे कम उम्र 41 वर्ष में भगवान के माता-पिता बनने का पुण्यार्जन मिला। वर्ष 1995 में जनपद चातुर्मास के दौरान बुंदेलखंड गौरव विराग सागर महाराज की सात प्रतिमाएं ग्रहण कीं और निरंतर साधुसंघों में रहकर अपनी साधना की। आचार्य विशुद्धसागर महाराज से निरंतर उनके संघ में रहकर दीक्षा का आग्रह राजस्थान के अतिशय क्षेत्र महावीर की धरा पर पूर्ण हुआ। आचार्य श्री ने दीक्षा का आशीर्वाद प्रदान किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
ललितपुर। शहर के श्रावक निहालचंद जैन ने साधना और त्याग के साथ वैराग्य के मार्ग का अनुसरण कर प्रख्यात जैनाचार्य चर्याशिरोमणि आचार्य विशुद्धसागर महाराज से जैनेश्वरी दीक्षा का आशीर्वाद अतिशय जैन तीर्थ महावीर राजस्थान में प्राप्त किया। दीक्षा के पहले रविवार शाम सात बजे उनकी विनौली यात्रा प्रमुख मार्गों से निकलेगी।
रतलाम में पंचकल्याणक के दौरान 22 फरवरी को ब्रह्मचारी निहालचंद जैन के साथ ब्रह्मचारी रवींद्र जैन महरौनी, ब्रह्मचारी जिनेश भोपाल की दीक्षा हुई। शहर में जैन समाज की ओर से निहालचंद जैन की दीक्षा के पूर्व संस्कार आयोजित किए गए। उनके आवास पर हल्दी मेंहदी के संस्कार श्रावक-श्राविकाओं ने कर पुण्यार्जन किया। जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया एवं महामंत्री आकाश जैन के अनुसार दीक्षार्थियों की चार फरवरी को शाम छह बजे पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में गोदभराई के उपरांत विनौली यात्रा मनोकामना उत्सव स्थली जेडी वाडा से नजाई बाजार गेंदालाल पंप से होते हुए घंटाघर चौक से जैन अटामंदिर पहुचेगी।
विज्ञापन
इलाइट चौराहा निवासी श्रावक निहालचंद जैन धर्म के प्रकांड विद्वान हैं। उन्होंने कई पूजन विधान, भजन, भक्तियां लिखी हैं। इष्टोपदेश, समाधितंत्र, कार्तिक अनुप्रेक्षा, स्वरूप संबोधन, ज्ञानांकुश, समाधिसार, समाधितंत्र के अतिरिक्त समाधिस्थ सराकोद्धारक आचार्य ज्ञानसागर महाराज की रचनाएं एवं स्वसंवेदी श्रमण महाकाव्य आचार्य विरुद्धसागर महाराज का लेखन किया है। वर्ष 1978 से क्षुल्लक सन्मति सागर महाराज एवं क्षुल्लक गुणसागर महाराज के सानिध्य में धार्मिक संस्कारों में रहकर निहालचंद ने 1988 में संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज के जनपद प्रवास के दौरान आचार्य श्री से दो प्रतिमा के संस्कार लिए। वर्ष 1993 में सिद्ध क्षेत्र सोनागिर में आयोजित सिंहरथ महामहोत्सव में सबसे कम उम्र 41 वर्ष में भगवान के माता-पिता बनने का पुण्यार्जन मिला। वर्ष 1995 में जनपद चातुर्मास के दौरान बुंदेलखंड गौरव विराग सागर महाराज की सात प्रतिमाएं ग्रहण कीं और निरंतर साधुसंघों में रहकर अपनी साधना की। आचार्य विशुद्धसागर महाराज से निरंतर उनके संघ में रहकर दीक्षा का आग्रह राजस्थान के अतिशय क्षेत्र महावीर की धरा पर पूर्ण हुआ। आचार्य श्री ने दीक्षा का आशीर्वाद प्रदान किया।
विज्ञापन