फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   shiv pleased by penance

तपस्या करने से ही मिलते है भगवान शिव

Sat, 27 Nov 2021 12:54 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 12:54 AM IST
विज्ञापन
shiv pleased by penance
डोंगराखुर्द/पाली। प्रयाग पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य ओमकारानंद सरस्वती महाराज ने बता कि माता पार्वती ने जब कड़ी तपस्या की तभी उन्हें भगवान शिव मिले। उन्होंने शिव विवाह का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। वह शुक्रवार को पाली में पांच दिवसीय शिव महिमा महोत्सव में प्रवचन कर रहे थे।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करने की इच्छुक थीं, सभी देवता गण भी इसी मत के थे। देवताओं ने कंदर्प को पार्वती की मदद करने के लिए भेजा, लेकिन शिव ने उन्हें अपनी तीसरी आंख से भस्म कर दिया। शिव को अपना वर बनाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या शुरू कर दी। पार्वती की जिद देख भोलेनाथ उनसे विवाह करने के लिए राजी हो गए। भगवान शिव ने बरात में भूत-प्रेत और चुड़ैलों को साथ ले जाने का निर्णय किया। तपस्वी होने के चलते शिव इस बात से अवगत नहीं थे कि विवाह के लिए किस प्रकार से तैयार हुआ जाता है। चुड़ैलों ने उनको भस्म से सजा दिया और हड्डियों की माला पहना दी।
विज्ञापन

जब ये अनोखी बरात देवी पार्वती के द्वार पहुंची तो सभी देवता हैरान रह गए. वहां खड़ी महिलाएं भी डरकर भाग गईं। भगवान शिव के इस विचित्र रूप को पार्वती की मां स्वीकार नहीं कर पाईं और उन्होंने अपनी बेटी का हाथ देने से मना कर दिया। स्थितियां बिगड़ती देख पार्वती ने भगवान शिव से प्रार्थना कर कहा कि वो उनके रीति रिवाजों के मुताबिक तैयार होकर आए। सभी देवता भी उन्हें तैयार करने में जुट गए। भगवान शिव को रेशम के फूलों से सजाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

भगवान शिव इस दिव्य रूप में पहुंचे, पार्वती की मां ने उन्हें तुरंत स्वीकार कर लिया और ब्रह्मा जी की उपस्थिति में विवाह समारोह शुरू हो गया। माता पार्वती और भोलेबाबा ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई और ये विवाह संपन हुआ।

प्रयाग पीठाधीश्वर के सानिध्य में निकली शोभायात्रा
डोंगराखुर्द। बाला जी धाम समिति ने प्रयाग पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य ओमकारानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली। इस दौरान श्रद्धालु हर-हर महादेव, जय गुरुदेव के नारे लगाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में गुरुदेव का जगह-जगह पुष्प वर्षा करके स्वागत किया। शोभायात्रा नगर के प्रमुख चौराहों से होती हुई नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर पहुंची। वहां पर आचार्यों ने विधि विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ भोलेनाथ को त्रिशूल चढ़ाया। संवाद

त्रिशूल का पूजन करते शंकराचार्य महाराज

त्रिशूल का पूजन करते शंकराचार्य महाराज- फोटो : LALITPUR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed