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खराब रास्ते गर्भवती महिलाओं की बढ़ा रहे प्रसव पीड़ा
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ग्राम गौठरा का कीचड़ तब्दील रास्ता
- फोटो : LALITPUR
मड़ावर। खराब रास्ते गर्भवती महिलाओं की पीड़ा को दोगुना कर रहे हैं। विकासखंड मड़ावरा के वनांचल में रहने वाली महिलाएं इस समस्या को लेकर परेशान हैं। यहां की सड़कें पक्की नहीं हो पा रही हैं, जिस कारण बारिश के दिनों में इनकी हालत और भी खराब हो जाती है।
मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी पत्नी को प्रसव के लिए लेकर पहुंचे गौंठरा निवासी प्रीतम गौड़ का कहना है कि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर गांव से किराए का ट्रैक्टर लेकर सुबह आठ बजे अपने घर से चला था लेकिन मड़ावरा तक 25 किमी का रास्ता तय करने में चार घंटे लग गए, दुर्गम रास्ते में और भी तकलीफ उठानी पड़ी। मड़ावरा विकासखंड में बसे लखंजर, कुर्रट, पापरो, जैतुपुरा, बारई जैसे गांवों में कोई संपर्क मार्ग नहीं है। इस कारण ग्रामीणों को पगडंडियों के सहारे मड़ावरा तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के मौसम में इन गांवों तक पहुंचना दूभर हो जाता है, ऐसे में कोई ग्रामीण अगर बीमार हो जाए, या कोई दुर्घटना हो जाए तो उपचार कराने की मुश्किल खड़ी हो जाती है। किसी महिला का प्रसव पीड़ा होने पर चारपाई पर रखकर ले जाना पड़ता है। कई बार तो नदी-नालों में बाढ़ होने के चलते उपचार के अभाव में कई की मौत भी हो जाती है। संपर्क मार्ग के अभाव में इन गांवों का विकास भी नहीं हो पा रहा है।
बोले लोग-बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे
विजय गौड़ निवासी हीरापुर उल्दनाखुर्द पंचायत के पूर्व प्रधान हैं। वह बताते हैं कि सड़क के अभाव में इन गांवों तक स्वास्थ्य, राशन, बिजली जैसी तमाम जरूरी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। धन सिंह गौड़ निवासी गौठरा ने कहा कि
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देश में भले ही कितनी तरक्की क्यों न हो गई हो पर उनके गांव में लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। गांव में तमाम महिलाएं और बुजुर्ग ऐसे हैं, जो सड़क के अभाव में कई वर्षों से मड़ावरा नहीं पहुंचे हैं। गांव निवासी नारायण सिंह ने बताया कि लोगों को मध्य प्रदेश के निकटवर्ती गांव पास पड़ते हैं। जिससे वह इलाज एवं अन्य खरीदारी के लिए मध्यप्रदेश के नजदीकी गांव बरायठा, शेसई आदि जाते हैं।
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मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी पत्नी को प्रसव के लिए लेकर पहुंचे गौंठरा निवासी प्रीतम गौड़ का कहना है कि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर गांव से किराए का ट्रैक्टर लेकर सुबह आठ बजे अपने घर से चला था लेकिन मड़ावरा तक 25 किमी का रास्ता तय करने में चार घंटे लग गए, दुर्गम रास्ते में और भी तकलीफ उठानी पड़ी। मड़ावरा विकासखंड में बसे लखंजर, कुर्रट, पापरो, जैतुपुरा, बारई जैसे गांवों में कोई संपर्क मार्ग नहीं है। इस कारण ग्रामीणों को पगडंडियों के सहारे मड़ावरा तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के मौसम में इन गांवों तक पहुंचना दूभर हो जाता है, ऐसे में कोई ग्रामीण अगर बीमार हो जाए, या कोई दुर्घटना हो जाए तो उपचार कराने की मुश्किल खड़ी हो जाती है। किसी महिला का प्रसव पीड़ा होने पर चारपाई पर रखकर ले जाना पड़ता है। कई बार तो नदी-नालों में बाढ़ होने के चलते उपचार के अभाव में कई की मौत भी हो जाती है। संपर्क मार्ग के अभाव में इन गांवों का विकास भी नहीं हो पा रहा है।
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बोले लोग-बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे
विजय गौड़ निवासी हीरापुर उल्दनाखुर्द पंचायत के पूर्व प्रधान हैं। वह बताते हैं कि सड़क के अभाव में इन गांवों तक स्वास्थ्य, राशन, बिजली जैसी तमाम जरूरी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। धन सिंह गौड़ निवासी गौठरा ने कहा कि
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देश में भले ही कितनी तरक्की क्यों न हो गई हो पर उनके गांव में लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। गांव में तमाम महिलाएं और बुजुर्ग ऐसे हैं, जो सड़क के अभाव में कई वर्षों से मड़ावरा नहीं पहुंचे हैं। गांव निवासी नारायण सिंह ने बताया कि लोगों को मध्य प्रदेश के निकटवर्ती गांव पास पड़ते हैं। जिससे वह इलाज एवं अन्य खरीदारी के लिए मध्यप्रदेश के नजदीकी गांव बरायठा, शेसई आदि जाते हैं।

मड़ावरा के अस्पताल में प्रसव पीड़ा कराने ट्रैक्टर ट्राली से पहुंचा गौंड परिवार- फोटो : LALITPUR