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मौसमी बीमारियों से 50 फीसदी बढ़े मरीज

Fri, 10 Mar 2017 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 10 Mar 2017 12:15 AM IST
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 Seasonal diseases increase 50 percent of patients
मौसमी बीमारियों से 50 फीसदी बढ़े मरीज - फोटो : demo
जाती सर्र्दी और दस्तक दे चुकी गर्मी से कफ-कोल्ड, वायरल फीवर जैसी मौसमी बीमारियों ने दस्तक दे दी है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या पचास फीसदी बढ़ गई है। डॉक्टरों ने लोगों को एलर्ट रहने की सलाह दी है। कोई भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या पर तत्काल जांच करवा ली जाए, नहीं तो स्थिति और बिगड़ सकती है। 
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इन दिनों कफ कोल्ड, वायरल फीवर, नोज-थ्रोट इंफेक्शन आदि का शिकार लोग हो रहे हैं। गले का इंफेक्शन तो आम बात है। अगर सावधानी न बरती जाए, तो खांसी के अलावा अन्य संक्रमण भी हो सकते हैं। कफ का इलाज न कराने पर निमोनिया हो सकता है। मौजूदा मौसम में यह बीमारी बच्चों में ज्यादा होती है। वायरल फीवर भी लोगों परेशान कर रहा है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि फीवर में देखभाल और साफ सफाई का ध्यान रखकर पांच से सात दिनों में ठीक हुआ जा सकता है। लापरवाही बरतने पर यह फीवर जारी रह सकता है। पेशेंट को न्यूमोनिया, लंग्स इंफेक्शन भी हो सकता है। इसलिए कभी भी फीवर को लेकर लापरवाही न बरतें। मौसम में बदलाव का असर डाइजेस्टिव सिस्टम पर भी पड़ता है। इससे उल्टी, दस्त होने की संभावना रहती है। इसलिए खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसलिए गर्म दिनों में रखा हुआ खाना न खाएं। ताजा फल व खाना खाएं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजना 100 से 120 मरीज आते थे। अब मरीजों की संख्या बढ़कर 150-170 हो गई है। 
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इंफ्ल्यूएंजा वाइरस के बढ़े मरीज 
मौसम में बदलाव से इंफ्ल्यूएंजा वाइरस के मरीज बढ़ गए हैं। जिला अस्पताल में रोजाना आठ से दस मरीज वाइरस से पीड़ित आने लगे हैं। इस वाइरस से शरीर में इंफेक्शन हो जाता है। ठंड लगने लगती है, आंख-नाक लाला हो जाती है। आंख-नाक से पानी और बुखार आता है। शरीर टूटन लगता है। मौजूदा मौसम इस वाइरस के लिए ज्यादा अनुकूल है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि इंफ्ल्यूएंजा वाइरस से पीड़ित मरीज के संपर्क में दूसरे लोग न आएं। मरीज छींकने पर मुंह में रुमाल लगाए। वाइरस से पीड़ित स्कूल बच्चों को परिजन स्कूल न भेजें। 
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