{"_id":"599f1ddd4f1c1b96528b47af","slug":"school-vehicles-will-be-filled-with-parents","type":"story","status":"publish","title_hn":"अभिभावकों से भरवाई जाएगी स्कूली वाहनों की डिटेल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अभिभावकों से भरवाई जाएगी स्कूली वाहनों की डिटेल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Aug 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
bus, lalitpur news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर।
विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए एआरटीओ विभाग द्वारा अभिभावकों से उनके बच्चों द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्कूली वाहनों की जानकारी का घोषणा पत्र भरवाया जाएगा। घोषणा पत्र के आधार पर एआरटीओ विभाग अभिभावकों को उपयोग होने वाली उक्त स्कूली वाहनों की फिटनेस की जानकारी देगा। इससे उन अभिभावकों को आसानी से पता चल सकेगा कि जिस वाहन से विद्यार्थी स्कूल पहुंच रहा है, वह वाहन स्कूल पहुंचने के लिए कितना सुरक्षित है।
निजी स्कूलों में वाहन सुविधा का लोभ दिखाकर बच्चों का नामांकन करने वाले अधिकांश स्कूल संचालक खटारा वाहनों में छात्रों को ढो रहे हैं। इन वाहनों का न तो फिटनेस ठीक है और न ही इनकी परिवहन विभाग से स्कूली वाहन के तौर पर इसका रजिस्ट्रेशन ही कराया गया है। वाहनों में सुरक्षा के मानक तो दूर बुनियादी सुविधा भी मौजूद नहीं है। ऐसे में स्कूल जाने वाले नौनिहाल अपनी जान जोखिम में डालकर इन वाहनों से स्कूल पहुंच रहे हैं। जनपद में अब तक करीब 35क से 40 अन्य वाहन स्कूली वाहन के रुप में एआरटीओ विभाग में पंजीकृत हैं। जबकि ऐसे स्कूलों की संख्या काफी अधिक हैं, जहां तक विद्यार्थी किसी न किसी प्रकार वाहनों से ही स्कूल तक पहुंच रहे हैं। यदि नगर की ही बात की जाए तो करीब डेढ़ सौ निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिनमें से दो दर्जन विद्यालयों में विद्यार्थी आने जाने के लिए विभिन्न बसों व आपे या मैजिक वाहनोंका उपयोग करते हैं। जबकि पूरे जनपद में करीब पांच सैकड़ा निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब सवा सौ से अधिक विद्यालयों में हजारों विद्यार्थी किसी न किसी निजी और किराए के वाहनों के माध्यम से स्कूल तक पहुंचते हैं।
वहीं एआरटीओ विभाग में पंजीकृत वाहनों की संख्या वास्तव में स्कूली वाहनों के रुप में उपयोग होने वाले वाहनों का प्रतिशत पांच प्रतिशत भी नहीं है। जिनमें अधिकांश वाहन न तो स्कूल वाहनों के मानकों को ही पूरा कर रहे हैं साथ कई वाहन अनफिट होने के बाद भी संचालित हो रहे हैं। जिनसे स्कूली बच्चों की जान जोखिम में डालकर यह वाहन स्कूलों के लिए संचालित किए जा रहे हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड भी एआरटीओ के पास उपलब्ध नहीं है। इसके चलते अब एआरटीओ विभाग द्वारा ऐसे अवैध रुप से संचालित होने वाले स्कूलों के निजी और किराए के वाहनों को चिह्नित करने के लिए स्कूलों के माध्यम से अभिभावकों से स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए उपयोग होने वाले वाहनों का एक घोषणा पत्र का प्रारूप भरवाया जाएगा। यह प्रारूप विद्यार्थियों की स्कूल डायरी के माध्यम से अभिभावकों को भेजा जाएगा एवं संकलित करके परिवहन कार्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा।
विज्ञापन
इसमें यदि वाहन विद्यार्थी स्वयं चलाया जाता है, तो उसका विवरण भी भरना होगा। यदि विद्यार्थी किसी अन्य वाहन का प्रयोग स्कूल आने-जाने के लिए करता है तो उस वाहन चालक के लाइसेंस का विवरण भी देना होगा। यदि विद्यार्थी स्कूल आने-जाने के स्कूल की बस का प्रयोग करता है तो उस बस के चालक का नाम व लाइसेंस का विवरण संबंधित स्कूल द्वारा भरा जाएगा। सार्वजनिक वाहनों आपे, टैंपो, मिनीडोर से विद्यार्थियों को स्कूल भेजने की दशा में अभिभावकों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर परिवहन विभाग संबंधित अभिभावक को यह सूचित भी करेगा कि अमुख वाहन विद्यार्थी को स्कूल भेजने के लिए उपयुक्त नहीं है। यानि जिन वाहनों की फिटनेस/परमिट नहीं है, ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस नहीं है ऐसी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इस प्रारुप में अभिभावकों को विद्यार्थी के विवरण के साथ वाहन संख्या और उसके प्रकार का विवरण भी भरकर देना होगा।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूली वाहनों के रुप में चलने वाले निजी और सार्वजनिक वाहनों की जानकारी के लिए अभिभावकों से एक घोषणा पत्र स्कूलों के माध्यम से भरवाया जा रहा है। इससे उन वाहनों की कैटेगिरी और सुरक्षा के मानकों की जांच की जाएगी और जांच के उपरांत इसकी जानकारी स्कूलों के माध्यम से ही अभिभावकों को उपलब्ध कराई जाएगी।
सतेंद्र कुमार, एआरटीओ, प्रशासन।
विज्ञापन
विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए एआरटीओ विभाग द्वारा अभिभावकों से उनके बच्चों द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्कूली वाहनों की जानकारी का घोषणा पत्र भरवाया जाएगा। घोषणा पत्र के आधार पर एआरटीओ विभाग अभिभावकों को उपयोग होने वाली उक्त स्कूली वाहनों की फिटनेस की जानकारी देगा। इससे उन अभिभावकों को आसानी से पता चल सकेगा कि जिस वाहन से विद्यार्थी स्कूल पहुंच रहा है, वह वाहन स्कूल पहुंचने के लिए कितना सुरक्षित है।
निजी स्कूलों में वाहन सुविधा का लोभ दिखाकर बच्चों का नामांकन करने वाले अधिकांश स्कूल संचालक खटारा वाहनों में छात्रों को ढो रहे हैं। इन वाहनों का न तो फिटनेस ठीक है और न ही इनकी परिवहन विभाग से स्कूली वाहन के तौर पर इसका रजिस्ट्रेशन ही कराया गया है। वाहनों में सुरक्षा के मानक तो दूर बुनियादी सुविधा भी मौजूद नहीं है। ऐसे में स्कूल जाने वाले नौनिहाल अपनी जान जोखिम में डालकर इन वाहनों से स्कूल पहुंच रहे हैं। जनपद में अब तक करीब 35क से 40 अन्य वाहन स्कूली वाहन के रुप में एआरटीओ विभाग में पंजीकृत हैं। जबकि ऐसे स्कूलों की संख्या काफी अधिक हैं, जहां तक विद्यार्थी किसी न किसी प्रकार वाहनों से ही स्कूल तक पहुंच रहे हैं। यदि नगर की ही बात की जाए तो करीब डेढ़ सौ निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिनमें से दो दर्जन विद्यालयों में विद्यार्थी आने जाने के लिए विभिन्न बसों व आपे या मैजिक वाहनोंका उपयोग करते हैं। जबकि पूरे जनपद में करीब पांच सैकड़ा निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब सवा सौ से अधिक विद्यालयों में हजारों विद्यार्थी किसी न किसी निजी और किराए के वाहनों के माध्यम से स्कूल तक पहुंचते हैं।
विज्ञापन
वहीं एआरटीओ विभाग में पंजीकृत वाहनों की संख्या वास्तव में स्कूली वाहनों के रुप में उपयोग होने वाले वाहनों का प्रतिशत पांच प्रतिशत भी नहीं है। जिनमें अधिकांश वाहन न तो स्कूल वाहनों के मानकों को ही पूरा कर रहे हैं साथ कई वाहन अनफिट होने के बाद भी संचालित हो रहे हैं। जिनसे स्कूली बच्चों की जान जोखिम में डालकर यह वाहन स्कूलों के लिए संचालित किए जा रहे हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड भी एआरटीओ के पास उपलब्ध नहीं है। इसके चलते अब एआरटीओ विभाग द्वारा ऐसे अवैध रुप से संचालित होने वाले स्कूलों के निजी और किराए के वाहनों को चिह्नित करने के लिए स्कूलों के माध्यम से अभिभावकों से स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए उपयोग होने वाले वाहनों का एक घोषणा पत्र का प्रारूप भरवाया जाएगा। यह प्रारूप विद्यार्थियों की स्कूल डायरी के माध्यम से अभिभावकों को भेजा जाएगा एवं संकलित करके परिवहन कार्यालय को उपलब्ध कराया जाएगा।
विज्ञापन
इसमें यदि वाहन विद्यार्थी स्वयं चलाया जाता है, तो उसका विवरण भी भरना होगा। यदि विद्यार्थी किसी अन्य वाहन का प्रयोग स्कूल आने-जाने के लिए करता है तो उस वाहन चालक के लाइसेंस का विवरण भी देना होगा। यदि विद्यार्थी स्कूल आने-जाने के स्कूल की बस का प्रयोग करता है तो उस बस के चालक का नाम व लाइसेंस का विवरण संबंधित स्कूल द्वारा भरा जाएगा। सार्वजनिक वाहनों आपे, टैंपो, मिनीडोर से विद्यार्थियों को स्कूल भेजने की दशा में अभिभावकों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर परिवहन विभाग संबंधित अभिभावक को यह सूचित भी करेगा कि अमुख वाहन विद्यार्थी को स्कूल भेजने के लिए उपयुक्त नहीं है। यानि जिन वाहनों की फिटनेस/परमिट नहीं है, ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस नहीं है ऐसी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इस प्रारुप में अभिभावकों को विद्यार्थी के विवरण के साथ वाहन संख्या और उसके प्रकार का विवरण भी भरकर देना होगा।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूली वाहनों के रुप में चलने वाले निजी और सार्वजनिक वाहनों की जानकारी के लिए अभिभावकों से एक घोषणा पत्र स्कूलों के माध्यम से भरवाया जा रहा है। इससे उन वाहनों की कैटेगिरी और सुरक्षा के मानकों की जांच की जाएगी और जांच के उपरांत इसकी जानकारी स्कूलों के माध्यम से ही अभिभावकों को उपलब्ध कराई जाएगी।
सतेंद्र कुमार, एआरटीओ, प्रशासन।