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गैंगस्टर के तीन अपराधियों को सात-सात वर्ष की सजा
Lalitpur
Updated Thu, 01 Mar 2018 12:43 AM IST
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ganguster
- फोटो : demo
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अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने जनपद ललितपुर में सुसंगठित गिरोह बनाकर मोटर साइकिल चोरी करने और आम लोगों में भय व आतंक व्याप्त कर गैैैंगस्टर एक्ट के मामले में मध्य प्रदेश के जिला शिवपुरी निवासी तीन अभियुक्तों को दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष की कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि 14 वर्ष पूर्व थाना कोतवाली प्रभारी जगदीश सिंह ने तत्कालीन थाना कोतवाली प्रभारी ने 19 जून 2004 को थाना कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि वह कांस्टेबल राजाराम, कामता प्रसाद, मुन्ने खां के साथ कोतवाली क्षेत्र में गश्त करके वापस आया कि तभी ज्ञात हुआ कि मध्य प्रदेश के जिला शिवपुरी के थाना इंदार अंतर्गत ग्राम पीरौठ निवासी चिमन पुत्र नथुआ एक शातिर किस्म का अपराधी है। उसने मध्य प्रदेश के गुना अंतर्गत पुरानी छावनी निवासी अपने ही साथी मोहन सिंह पुत्र कंगलियाव फीरोज पुत्र मुबारिक से मिलकर एक संगठित गिरोह बनाकर ललितपुर क्षेत्र में अपने भय और आतंक के बल पर वाहन चोरियां करते हैं। यह अभ्यस्त अपराधी हैं।
इनके विरुद्घ कोतवाली ललितपुर में कई अपराध दर्ज हैं, जिसके तहत 14 मई 2004 को शहर के तालाबपुरा निवासी नितेंद्र कुमार पुत्र शेखरचंद जैन की मोटर साइकिल की चोरी का अभियोग पंजीकृत कराया था, जिस पर इनके कब्जे से चोरी गई मोटर साइकिल बरामद हुई थी, जिसका मुकदमा पंजीकृत किया था। 2 जून 2004 को ललितपुर के आजादपुरा निवासी संजय जैन पुत्र रमेश चंद्र जैन के द्वारा उक्त अभियुक्तों को मोटरसाइकिल चुराकर पीछा करके पकड़ा गया था और मोटरसाइकिल बरामद की गई थीं। उपरोक्त अभियोग में उक्त सभी अभियुक्त जिला जेल में निरुद्घ हैं और शीघ्र ही जमानत पर रिहा होने वाले हैं। थाना प्रभारी द्वारा बताया गया था कि उक्त अभियुक्त जेल से छूटने के बाद फिर से वाहन चोरी की घटनाएं करेंगे। इससे स्पष्ट हैं कि इनका एक संगठित वाहन चोरी करने का गैंग है, इनके कार्य गंभीर प्रकृति के हैं और ये अभ्यस्त वाहन चोर हैं।
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थाना प्रभारी की तहरीर पर थाना कोतवाली पुलिस ने उक्त तीनों अभियुक्तों के खिलाफ खिलाफ समाज विरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम 1986 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। बुधवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायाधीश ने निर्णय सुनाते हुए तीनों अभियुुक्तों चिमन, फिरोज अली व मोहन सिंह को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि 14 वर्ष पूर्व थाना कोतवाली प्रभारी जगदीश सिंह ने तत्कालीन थाना कोतवाली प्रभारी ने 19 जून 2004 को थाना कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि वह कांस्टेबल राजाराम, कामता प्रसाद, मुन्ने खां के साथ कोतवाली क्षेत्र में गश्त करके वापस आया कि तभी ज्ञात हुआ कि मध्य प्रदेश के जिला शिवपुरी के थाना इंदार अंतर्गत ग्राम पीरौठ निवासी चिमन पुत्र नथुआ एक शातिर किस्म का अपराधी है। उसने मध्य प्रदेश के गुना अंतर्गत पुरानी छावनी निवासी अपने ही साथी मोहन सिंह पुत्र कंगलियाव फीरोज पुत्र मुबारिक से मिलकर एक संगठित गिरोह बनाकर ललितपुर क्षेत्र में अपने भय और आतंक के बल पर वाहन चोरियां करते हैं। यह अभ्यस्त अपराधी हैं।
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इनके विरुद्घ कोतवाली ललितपुर में कई अपराध दर्ज हैं, जिसके तहत 14 मई 2004 को शहर के तालाबपुरा निवासी नितेंद्र कुमार पुत्र शेखरचंद जैन की मोटर साइकिल की चोरी का अभियोग पंजीकृत कराया था, जिस पर इनके कब्जे से चोरी गई मोटर साइकिल बरामद हुई थी, जिसका मुकदमा पंजीकृत किया था। 2 जून 2004 को ललितपुर के आजादपुरा निवासी संजय जैन पुत्र रमेश चंद्र जैन के द्वारा उक्त अभियुक्तों को मोटरसाइकिल चुराकर पीछा करके पकड़ा गया था और मोटरसाइकिल बरामद की गई थीं। उपरोक्त अभियोग में उक्त सभी अभियुक्त जिला जेल में निरुद्घ हैं और शीघ्र ही जमानत पर रिहा होने वाले हैं। थाना प्रभारी द्वारा बताया गया था कि उक्त अभियुक्त जेल से छूटने के बाद फिर से वाहन चोरी की घटनाएं करेंगे। इससे स्पष्ट हैं कि इनका एक संगठित वाहन चोरी करने का गैंग है, इनके कार्य गंभीर प्रकृति के हैं और ये अभ्यस्त वाहन चोर हैं।
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थाना प्रभारी की तहरीर पर थाना कोतवाली पुलिस ने उक्त तीनों अभियुक्तों के खिलाफ खिलाफ समाज विरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम 1986 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। बुधवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायाधीश ने निर्णय सुनाते हुए तीनों अभियुुक्तों चिमन, फिरोज अली व मोहन सिंह को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रिया कलाप निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।