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सौधर्म इंद्र का आसन हुआ कंपायमान, माता मरुदेवी ने देख 16 स्वप्न

Thu, 17 Feb 2022 01:47 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Feb 2022 01:47 AM IST
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Saudharma Indra's seat was shaken, Mother Marudevi saw 16 dreams
ललितपुर। दमोह जिले के कुंडलपुर अतिशय जैन तीर्थ में चौबीस तीर्थंकर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में गर्भकल्याणक पूर्व की मांगलिक क्रियाएं शुरू हो गईं। बुधवार सुबह प्रभु के कलशाभिषेक के साथ आचार्य श्री का संगीतमय पूजन कर श्रद्धालुओं ने जहां पुर्ण्याजन किया। वहीं आचार्य विद्यासागर महाराज ने पंचकल्याणक की महिमा बताई।
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महोत्सव में जनपद से गए श्रद्धालुओं ने बताया कि प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी विनय बंडा के निर्देशन में मध्याह्न में गर्भकल्याणक पूजा में श्रावक-श्राविकाओं ने अर्घ्य समर्पित किए। रात्रि में संगीतमय महाआरती में भक्त जहां झूम रहे हैं, वहीं पंचकल्याणक की मांगलिक क्रियाएं सौधर्म इंद्र आसन कंपायमान, नगरी की रचना, भगवान के माता-पिता की सेवा, अष्टदेवियों द्वारा सेवा और माता मरुदेवी के सोलह स्वप्नों के दर्शन की क्रियाएं एवं गर्भकल्याणक की आंतरिक क्रियाएं संपन्न हुई। आयोजन स्थल अयोध्यापुरी में इंद्र इंद्राणियों की लंबी कतारें नजर आती हैं। जिनको व्यवस्थित करने के लिए दूरांचलों से पहुंचे स्वयंसेवक पूरी निष्ठा के साथ लगे हुए हैं।
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गर्भकल्याणक उत्तर की क्रियाएं होगी आज
महोत्सव के प्रिंट मीडिया प्रभारी महेंद्र जैन और जैन पंचायत के मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने बताया कि 17 फरवरी को प्रात:काल अभिषेक शांतिधारा गर्भकल्याणक उत्तर पूजन के उपरांत मध्यान्ह में भगवान की माता की गोदभराई की क्रिया एवं अपराह्न मंदिर शिखर, सहस्त्रकूट की शुद्धि होगी।
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सहस्त्रकूट में होगी 1008 मूर्तियां स्थापित
कुंडलपुर धाम में विश्व का सबसे ऊंचा भगवान आदिनाथ का भव्य मंदिर 500 फीट ऊंची पहाड़ी पर बने 189 फीट ऊंचे नवनिर्मित जैन मंदिर के सम्मुख सहस्त्रकूट की स्थापना की गई। जहां 1008 मूर्तियां स्थापित होंगी। सहस्त्रकूट की भव्यता बुंदेलखंड में अद्वितीय है।
मुख्यद्वार से जाना होगा पैदल
कुंडलपुर महोत्सव में कोई भी वाहन मुख्य द्वार से भीतर प्रवेश नहीं करेगा। चाहे वह कितना भी वीआईपी हो, कुंडलपुर मुख्य द्वार से प्रत्येक व्यक्ति को परिसर तक पैदल ही जाना पड़ेगा। इसके लिए यातायात समिति ने अपनी व्यवस्था चौकस कर दी है। करीब 1200 स्वयं सेवक पूरे महोत्सव में अपनी सेवाएं दे रहे हैंए स्वयंसेवक समिति के प्रभारी गिरीश नायक ने बताया कि सांगली से 400 स्वयं सेवक अपनी सेवाएं देने कुंडलपुर में मौजूद हैं इसके अलावा करीब 1200 स्वयंसेवक दमोह जिले से आए हैं।
कुडलपुर तीर्थ क्षेत्र इन दिनों आचार्य श्री और संघस्थ साधु संतों के विराजित रहने से प्रभु दर्शन और गुरू भक्ति का केंद्र बना हुआ है। संघस्थ महाराजश्री के कुंडलपुर के लिए विहार के दौरान हमें साधु-संतों के विहार एवं आहार चर्या के दौरान जो सानिध्य मिला वह अतुलनीय है।-अमित प्रिय जैन, अध्यक्ष अन्नपूर्णा सेवा संघ ललितपुर
आचार्य श्री के ससंघ सानिध्य में चौबीस तीर्थंकर पंचकल्याणक में जो आनंद की अनुभूति हो रही है, उसको शब्दों में कह पाना मुश्किल है ऐसा लगता है कि मानों प्रभु के समवशरण में बैठे हों।- सुरेश बाबू जैन, जिला संयोजक विश्व हिंदू महासंघ ललितपुर
कुंडलपुर तीर्थ की परिकल्पना संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर महाराज की है। जिसका आज पूरी जैन समाज इतने विशाल संघ के सानिध्य में लाभ ले रहा है। यह आयोजन भूतो न भविष्यति।- पुष्पेंद्र जैन, संयोजक करूणा इंटरनेशनल, ललितपुर

कुंडलपुर तीर्थ हम सभी की आस्था का केंद्र है। यहां विराजित आदिनाथ भगवान बडे़ बाबा जन-जन के आराध्य हैैं। आचार्य विद्यासागर महाराज के सानिध्य में पंचकल्याणक जैन समाज के लिए गौरव है। आचार्य श्री जनजन के मसीहा और हम सभी के आस्था के प्रतीक हैं।- महेंद्र जैन मयूर, प्रांतीय उपाध्यक्ष व्यापार मंडल,ललितपुर
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