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Lalitpur News: कंबल की आस में ठिठुर रहे सहरिया आदिवासी
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर-सिलावन। सर्दी चरम पर होने के बावजूद अब तक सहरिया आदिवासियों को कंबल नहीं मिल सका। छपरट गांव के सहरिया आदिवासी कंबल न मिलने से ठिठुर रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक उनके गांव में एक भी कंबल नहीं बांटा गया है। पांचों तहसीलों में 5319 कंबल वितरित होने थे, जिसमें 4650 कंबल वितरित करने का अधिकारी दावा कर रहे हैं।
महरौनी तहसील के छपरट की सहरिया आदिवासी बस्ती के लोग बताते हैं कि दिन तो जैसे तैसे आग के सहारे गुजार लेते हैं, लेकिन रात बिताना मुश्किल हो रहा है। हर साल सरकारी की तरफ से कंबल मिल जाते थे, लेकिन इस वर्ष नहीं मिला। सहरिया आदिवासी दो जून की रोटी का इंतजाम भी बड़ी मुश्किल से कर पाते हैं। सर्दी से बचने के लिए उन्हें सरकार का मुंह ताकना पड़ता है। छपरट गांव में सरकार के अलावा समाजसेवी संस्थाओं का भी ध्यान नहीं गया।
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ललितपुर-सिलावन। सर्दी चरम पर होने के बावजूद अब तक सहरिया आदिवासियों को कंबल नहीं मिल सका। छपरट गांव के सहरिया आदिवासी कंबल न मिलने से ठिठुर रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक उनके गांव में एक भी कंबल नहीं बांटा गया है। पांचों तहसीलों में 5319 कंबल वितरित होने थे, जिसमें 4650 कंबल वितरित करने का अधिकारी दावा कर रहे हैं।
महरौनी तहसील के छपरट की सहरिया आदिवासी बस्ती के लोग बताते हैं कि दिन तो जैसे तैसे आग के सहारे गुजार लेते हैं, लेकिन रात बिताना मुश्किल हो रहा है। हर साल सरकारी की तरफ से कंबल मिल जाते थे, लेकिन इस वर्ष नहीं मिला। सहरिया आदिवासी दो जून की रोटी का इंतजाम भी बड़ी मुश्किल से कर पाते हैं। सर्दी से बचने के लिए उन्हें सरकार का मुंह ताकना पड़ता है। छपरट गांव में सरकार के अलावा समाजसेवी संस्थाओं का भी ध्यान नहीं गया।
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