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प्रतिदिन लाई जाती सैकड़ो घनमीटर अवैध खनन सामग्री
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सिलावन (ललितपुर)। इसे विडंबना ही कहेंगे कि ललितपुर में प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा होने के बाद भी यहां निर्माण सामग्री की पूर्ति मध्यप्रदेश से की जा रही हैं। इससे जो राजस्व उत्तर प्रदेश को मिलना चाहिए, वह मध्यप्रदेश को मिल रहा हैं। इससे न सिर्फ उत्तर प्रदेश को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा हैं बल्कि यहां का खनन व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा हैं। स्थानीय अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली के चलते जहां एक ओर प्रदेश को राजस्व की हानि हो रही है। वहीं, अवैध खनन और परिवहन को बढ़ावा मिल रहा हैं।
जनपद में इन दिनों सड़कों का निर्माण, नहरों का पक्कीकरण के अलावा विभिन्न ग्राम पंचायतों में पक्के निर्माण कार्य के साथ ही आवासों का निर्माण भी हो रहा हैं। इन निर्माण कार्यों में बालू, गिट्टी, खंडा सहित अन्य निर्माण सामग्रियों की जरूरत होती हैं। ललितपुर जनपद में उपखनिजों के अपार भंडार होने के बाद भी ज्यादातर निर्माण सामग्री की आपूर्ति मध्यप्रदेश से हो रही हैं। इससे प्रदेश के बजाए मध्यप्रदेश के राजस्व में बढ़ोत्तरी हो रही हैं। इसकी प्रमुख वजह एक तो सरकार की खनिज को लेकर ढुलमुल नीति और दूसरा जनपद का मध्यप्रदेश की सीमा से सटा हुआ होना हैं। सबसे अधिक अवैध खनिज परिवहन महरौनी-बानपुर के रास्ते होता हैं एक अनुमान के मुताबिक इन रास्तों से प्रतिदिन सैकड़ों घनमीटर खनिज सामग्री जनपद में लाई जाती हैं। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश की खदानों से जो एमएम 11 जारी किया जाता हैं वह प्रदेश के ही सीमावर्ती इलाकें तक के लिए होता हैं यहां तक तो वैध परिवहन होता हैं इसके बाद उत्तरप्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही उक्त खनिज परिवहन अवैध हो जाता हैं आमतौर पर जब मध्यप्रदेश से कोई सामग्री ललितपुर लाई जाती हैं तो उसका एमएम11 सागर या अन्य सीमावर्ती गांव तक के लिए जारी किया जाता हैं लेकिन माल ललितपुर के इलाकों में खाली किया जाता हैं। मजेदार बात तो यह हैं कि सड़क निर्माण, नहर निर्माण आदि कार्यों का ठेका उत्तरप्रदेश सरकार देती हैं मगर कार्यदायी संस्थाएं निर्माण सामग्री मध्यप्रदेश से लेकर रायल्टी आदि मध्यप्रदेश सरकार को देती हैं इस तरह से जो राजस्व उत्तरप्रदेश के खाते में जाना चाहिए वह मध्यप्रदेश के खाते में जा रहा हैं इससे उत्तरप्रदेश को जबरजस्त नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। एक अनुमान के अनुसार अकेले खनन व्यवसाय से एक माह में एक करोड़ से भी अधिक के राजस्व का नुकसान उत्तरप्रदेश शासन को उठाना पड़ रहा हैं। निर्माण सामग्री विक्रेताओं के अनुसार उत्तरप्रदेश की अपेक्षा मध्यप्रदेश से बालू, गिट्टी, खडंजा आदि आसानी से, पर्याप्त मात्रा में और सस्ते दामों पर उपलब्ध हो जाने के कारण वहीं से क्रय किया जाता हैं। इसके उलट जो कारोबारी ललितपुर से माल क्रय कर बेचते हैं उनका धंधा प्रभावित हो रहा हैं। खनन को लेकर सरकार की स्पष्ट नीति नहीं होने से उत्तरप्रदेश सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा हैं।
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नियमावली में अन्य जिलों से आने वाले उप खनिजों पर प्रतिबंध लगाने का प्राविधान नहीं है। इससे अन्य जथनपदों से आ रहे खनिज पर रोक नहीं लगाई जा सकती है।
मुकेश मिश्रा, जिला खान निरीक्षक
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जनपद में इन दिनों सड़कों का निर्माण, नहरों का पक्कीकरण के अलावा विभिन्न ग्राम पंचायतों में पक्के निर्माण कार्य के साथ ही आवासों का निर्माण भी हो रहा हैं। इन निर्माण कार्यों में बालू, गिट्टी, खंडा सहित अन्य निर्माण सामग्रियों की जरूरत होती हैं। ललितपुर जनपद में उपखनिजों के अपार भंडार होने के बाद भी ज्यादातर निर्माण सामग्री की आपूर्ति मध्यप्रदेश से हो रही हैं। इससे प्रदेश के बजाए मध्यप्रदेश के राजस्व में बढ़ोत्तरी हो रही हैं। इसकी प्रमुख वजह एक तो सरकार की खनिज को लेकर ढुलमुल नीति और दूसरा जनपद का मध्यप्रदेश की सीमा से सटा हुआ होना हैं। सबसे अधिक अवैध खनिज परिवहन महरौनी-बानपुर के रास्ते होता हैं एक अनुमान के मुताबिक इन रास्तों से प्रतिदिन सैकड़ों घनमीटर खनिज सामग्री जनपद में लाई जाती हैं। जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश की खदानों से जो एमएम 11 जारी किया जाता हैं वह प्रदेश के ही सीमावर्ती इलाकें तक के लिए होता हैं यहां तक तो वैध परिवहन होता हैं इसके बाद उत्तरप्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही उक्त खनिज परिवहन अवैध हो जाता हैं आमतौर पर जब मध्यप्रदेश से कोई सामग्री ललितपुर लाई जाती हैं तो उसका एमएम11 सागर या अन्य सीमावर्ती गांव तक के लिए जारी किया जाता हैं लेकिन माल ललितपुर के इलाकों में खाली किया जाता हैं। मजेदार बात तो यह हैं कि सड़क निर्माण, नहर निर्माण आदि कार्यों का ठेका उत्तरप्रदेश सरकार देती हैं मगर कार्यदायी संस्थाएं निर्माण सामग्री मध्यप्रदेश से लेकर रायल्टी आदि मध्यप्रदेश सरकार को देती हैं इस तरह से जो राजस्व उत्तरप्रदेश के खाते में जाना चाहिए वह मध्यप्रदेश के खाते में जा रहा हैं इससे उत्तरप्रदेश को जबरजस्त नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। एक अनुमान के अनुसार अकेले खनन व्यवसाय से एक माह में एक करोड़ से भी अधिक के राजस्व का नुकसान उत्तरप्रदेश शासन को उठाना पड़ रहा हैं। निर्माण सामग्री विक्रेताओं के अनुसार उत्तरप्रदेश की अपेक्षा मध्यप्रदेश से बालू, गिट्टी, खडंजा आदि आसानी से, पर्याप्त मात्रा में और सस्ते दामों पर उपलब्ध हो जाने के कारण वहीं से क्रय किया जाता हैं। इसके उलट जो कारोबारी ललितपुर से माल क्रय कर बेचते हैं उनका धंधा प्रभावित हो रहा हैं। खनन को लेकर सरकार की स्पष्ट नीति नहीं होने से उत्तरप्रदेश सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा हैं।
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नियमावली में अन्य जिलों से आने वाले उप खनिजों पर प्रतिबंध लगाने का प्राविधान नहीं है। इससे अन्य जथनपदों से आ रहे खनिज पर रोक नहीं लगाई जा सकती है।
मुकेश मिश्रा, जिला खान निरीक्षक