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आवास निर्माण मामले में एडीओ पंचायत जलंधर निलंबित
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ललितपुर। विकास खंड मड़ावरा ग्राम पंचायत के जलंधर में विकास कार्यों की अनदेखी करना और आवास निर्माण में अवैध रूप से धन की मांग करने के मामले में जलंधर के ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) को पीडी (परियोजना निदेशक) की जांच आख्या मिलने के बाद जिलाधिकारी के आदेश पर निलंबित कर दिया गया।
विकास खंड मड़ावरा ग्राम पंचायत जलंधर के ग्रामीणों और प्रधान द्वारा जिलाधिकारी से उनके क्षेत्र में ग्राम विकास अधिकारी के द्वारा आवास निर्माण की अनदेखी किए जाने और आवास निर्माण में अवैध धन की मांग करने की शिकायत की थी। इस मामले में जिलाधिकारी द्वारा पीडी को जांच सौंपी गई थी, जिसके बाद पीडी ने क्षेत्र में जाकर ग्रामीणों के बयान लेने एवं अन्य कागजी जांच के बाद अपनी जांच आख्या सीडीओ को सौंप दी, जिसके बाद जिलाधिकारी के आदेश पर डीपीआरओ ने ग्राम विकास अधिकारी आलोक कुमार दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उन्हें जिला मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया है। ग्राम विकास अधिकारी आलोक कुमार दुबे के पास एडीओ पंचायत का अतिरिक्त प्रभार भी था। जिसके चलते उन्हें ब्लॉक एडीओ पंचायत के कार्य की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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ग्रामीण महिलाओं से हुए विवाद में मुकदमा भी दर्ज हुआ था
विकास खंड मड़ावरा ग्राम पंचायत के जलंधर की महिलाओं ने ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर जलंधर में चयनित आवासों के निर्माण में पात्र लाभार्थियों से अवैध रूप से धन मांगने के आरोप लगाए गए थे। वहीं, कुछ महिलाओं को जब आवास पात्रता सूची से नाम कटे होने की जानकारी मिली तो हंगामे की स्थिति बन गई थी। इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी द्वारा अभद्रता के आरोप भी लगाए गए थे। इसके चलते ग्राम विकास अधिकारी की तहरीर के आधार पर मड़ावरा पुलिस ने ग्राम जलंधर निवासी वैभव सिंह, धनुषरानी, इमरती एवं अन्य छह अज्ञात महिला-पुरुष के खिलाफ कार्यालय में जबरन घुसने और टेबल पर रखे सरकारी दस्तावेज फाड़ने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया था। वहीं, अगले ही दिन इसी मामले में महिलाओं ने मड़ावरा थाने को तहरीर देकर बताया था कि धनुषरानी, इमरती, कमलारानी एवं बड़ी बहू जब ब्लॉक परिसर पहुंचे और वहां मौजूद ग्राम विकास अधिकारी आलोक कुमार दुबे से कहा कि सरकारी आवास की सूची से उनके नाम काट दिए गए हैं, इसी बात को लेकर उन्होंने उनके साथ गाली गलौज कर दी थी। उन्होंने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और धक्का देते हुए आवास नहीं बन पाने की धमकी भी दी थी। मामले में मड़ावरा पुलिस ने ग्राम विकास अधिकारी समेत चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।
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आवास के संबंध में ग्रामीणों के द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी, जिस पर जिलाधिकारी द्वारा इसकी जांच पीडी को सौंपी गई थी। अब पीडी द्वारा इस मामले में सीडीओ को जांच सौंपी गई थी, जिसके बाद ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित किया गया है।
डॉ. अवधेश सिंह, डीपीआरओ।
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विकास खंड मड़ावरा ग्राम पंचायत जलंधर के ग्रामीणों और प्रधान द्वारा जिलाधिकारी से उनके क्षेत्र में ग्राम विकास अधिकारी के द्वारा आवास निर्माण की अनदेखी किए जाने और आवास निर्माण में अवैध धन की मांग करने की शिकायत की थी। इस मामले में जिलाधिकारी द्वारा पीडी को जांच सौंपी गई थी, जिसके बाद पीडी ने क्षेत्र में जाकर ग्रामीणों के बयान लेने एवं अन्य कागजी जांच के बाद अपनी जांच आख्या सीडीओ को सौंप दी, जिसके बाद जिलाधिकारी के आदेश पर डीपीआरओ ने ग्राम विकास अधिकारी आलोक कुमार दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उन्हें जिला मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया है। ग्राम विकास अधिकारी आलोक कुमार दुबे के पास एडीओ पंचायत का अतिरिक्त प्रभार भी था। जिसके चलते उन्हें ब्लॉक एडीओ पंचायत के कार्य की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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ग्रामीण महिलाओं से हुए विवाद में मुकदमा भी दर्ज हुआ था
विकास खंड मड़ावरा ग्राम पंचायत के जलंधर की महिलाओं ने ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर जलंधर में चयनित आवासों के निर्माण में पात्र लाभार्थियों से अवैध रूप से धन मांगने के आरोप लगाए गए थे। वहीं, कुछ महिलाओं को जब आवास पात्रता सूची से नाम कटे होने की जानकारी मिली तो हंगामे की स्थिति बन गई थी। इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी द्वारा अभद्रता के आरोप भी लगाए गए थे। इसके चलते ग्राम विकास अधिकारी की तहरीर के आधार पर मड़ावरा पुलिस ने ग्राम जलंधर निवासी वैभव सिंह, धनुषरानी, इमरती एवं अन्य छह अज्ञात महिला-पुरुष के खिलाफ कार्यालय में जबरन घुसने और टेबल पर रखे सरकारी दस्तावेज फाड़ने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया था। वहीं, अगले ही दिन इसी मामले में महिलाओं ने मड़ावरा थाने को तहरीर देकर बताया था कि धनुषरानी, इमरती, कमलारानी एवं बड़ी बहू जब ब्लॉक परिसर पहुंचे और वहां मौजूद ग्राम विकास अधिकारी आलोक कुमार दुबे से कहा कि सरकारी आवास की सूची से उनके नाम काट दिए गए हैं, इसी बात को लेकर उन्होंने उनके साथ गाली गलौज कर दी थी। उन्होंने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और धक्का देते हुए आवास नहीं बन पाने की धमकी भी दी थी। मामले में मड़ावरा पुलिस ने ग्राम विकास अधिकारी समेत चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।
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आवास के संबंध में ग्रामीणों के द्वारा जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी, जिस पर जिलाधिकारी द्वारा इसकी जांच पीडी को सौंपी गई थी। अब पीडी द्वारा इस मामले में सीडीओ को जांच सौंपी गई थी, जिसके बाद ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित किया गया है।
डॉ. अवधेश सिंह, डीपीआरओ।