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विवादों में घिरी निर्धनों की राशन किट
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ललितपुर। नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत निर्धनों को वितरित की जा रही राशन की किट विवादों में घिर गई है। पूर्ति विभाग ने खुले आटे को पैककर निर्धनों में वितरण करा दिया। जिस ब्रांड का वारदाना आटा को पैक करने के लिए इस्तेमाल हो रहा है, उससे संबंधित फर्म की एक भागीदार ने इस पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग कर दी है। इस शिकायत पर अफसरों में खलबली मच गई है।
इन दिनों कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए देश में लॉकडाउन है। इससे प्रभावित निर्धन परिवारों को राशन की किट मुहैया कराई जा रही है। इसमें आटा दस किलो, दाल एक किलो, चावल पांच किलोग्राम और नमक एक किलोग्राम शामिल है। तहसील व नगर पालिका मिलकर इसका वितरण वार्डवार करा रहे हैं। इस किट पर विवाद खड़ा हो गया है।
मोहल्ला तालाबपुरा निवासी कुसुम साहू (फर्म भागीदार) ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उसके नाम से जो आटा का ट्रेड मार्क है, उसे रितेश ट्रेडर्स को कार्य करने के लिए दिया था। उक्त भागीदार फर्म में विवाद होने से एक अप्रैल 17 से उक्त ब्रांड में किसी तरह का पैकिंग आटा बेचना और अन्य सामग्री बेचना बंद है। इस संबंध में वाणिज्यकर विभाग को सूचना दी गई है। आरोप है कि फर्म के कुछ अन्य भागीदारों ने चोरी छिपे उसके ब्रांड को प्रिंट कराकर आटा व अन्य सामग्री बाजार में बिना किसी बिल के बेच रहे हैं। इसी तरह विभिन्न सेक्टर मजिस्ट्रेट के माध्यमों से राशन की किट का वितरण कराया जा रहा है, जो अवैध है। इन पैकेट पर न तो पैकिंग तिथि और न ही बैच नंबर अंकित है।
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उधर, विभागीय अधिकारी पूरे मामले से अनभिज्ञ नजर आ रहे हैं। पूर्ति अफसरों का कहना है कि दो फर्मों से आटे की आपूर्ति ली जा रही है। इन फर्मो के पास वारदाना उपलब्ध नहीं है, इसलिए वारदाने का इंतजाम करके आटे को पैक कराया गया है। जब उनसे खुला आटा खरीदने के बारे में जानना चाहा तो वह कुछ नहीं बता सके।
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पूर्ति विभाग द्वारा खाद्य सामग्री वितरण के लिए उपलब्ध कराई गई है। किस ब्रांड का आटा है, इससे उनका कोई सरोकार नहीं है।
- मनोज कुमार सरोज, तहसीलदार, सदर
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दो फर्मों से आटा की आपूर्ति हो रही है। इसे पैकेट में पैक कराकर वितरण कराया जा रहा है।
- चंद्रशेखर सहाय, पूर्ति निरीक्षक
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किसी अन्य फर्म के नाम के बोरे का इस्तेमाल हो रहा है, यह मेरे संज्ञान में नहीं है। इसकी जानकारी की जाएगी।
- अनिल कुमार मिश्र, अपर जिलाधिकारी
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इन दिनों कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए देश में लॉकडाउन है। इससे प्रभावित निर्धन परिवारों को राशन की किट मुहैया कराई जा रही है। इसमें आटा दस किलो, दाल एक किलो, चावल पांच किलोग्राम और नमक एक किलोग्राम शामिल है। तहसील व नगर पालिका मिलकर इसका वितरण वार्डवार करा रहे हैं। इस किट पर विवाद खड़ा हो गया है।
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मोहल्ला तालाबपुरा निवासी कुसुम साहू (फर्म भागीदार) ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उसके नाम से जो आटा का ट्रेड मार्क है, उसे रितेश ट्रेडर्स को कार्य करने के लिए दिया था। उक्त भागीदार फर्म में विवाद होने से एक अप्रैल 17 से उक्त ब्रांड में किसी तरह का पैकिंग आटा बेचना और अन्य सामग्री बेचना बंद है। इस संबंध में वाणिज्यकर विभाग को सूचना दी गई है। आरोप है कि फर्म के कुछ अन्य भागीदारों ने चोरी छिपे उसके ब्रांड को प्रिंट कराकर आटा व अन्य सामग्री बाजार में बिना किसी बिल के बेच रहे हैं। इसी तरह विभिन्न सेक्टर मजिस्ट्रेट के माध्यमों से राशन की किट का वितरण कराया जा रहा है, जो अवैध है। इन पैकेट पर न तो पैकिंग तिथि और न ही बैच नंबर अंकित है।
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उधर, विभागीय अधिकारी पूरे मामले से अनभिज्ञ नजर आ रहे हैं। पूर्ति अफसरों का कहना है कि दो फर्मों से आटे की आपूर्ति ली जा रही है। इन फर्मो के पास वारदाना उपलब्ध नहीं है, इसलिए वारदाने का इंतजाम करके आटे को पैक कराया गया है। जब उनसे खुला आटा खरीदने के बारे में जानना चाहा तो वह कुछ नहीं बता सके।
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पूर्ति विभाग द्वारा खाद्य सामग्री वितरण के लिए उपलब्ध कराई गई है। किस ब्रांड का आटा है, इससे उनका कोई सरोकार नहीं है।
- मनोज कुमार सरोज, तहसीलदार, सदर
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दो फर्मों से आटा की आपूर्ति हो रही है। इसे पैकेट में पैक कराकर वितरण कराया जा रहा है।
- चंद्रशेखर सहाय, पूर्ति निरीक्षक
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किसी अन्य फर्म के नाम के बोरे का इस्तेमाल हो रहा है, यह मेरे संज्ञान में नहीं है। इसकी जानकारी की जाएगी।
- अनिल कुमार मिश्र, अपर जिलाधिकारी