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नहीं है बरसात के पानीका संरक्षण

Mon, 24 Jun 2019 12:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jun 2019 12:15 AM IST
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rain water harvesting
नहीं है बरसात के पानी संरक्षण का इंतजाम
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बिना वर्षा जल संचय सिस्टम के हो रहा इमारतों का निर्माण
न सरकारी और न निजी भवन स्वामी दे रहे हैं ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। सबसे अधिक बांध होने के बाद भी जिला पानी के संकट से जूझ रहा है। वर्षा जल संचय (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) करने के लिए न तो बहुमंजिला इमारतों में ध्यान दिया जा रहा है और न ही सरकारी भवनों में बरसात का पानी संरक्षण करने के उपाय किए जा रहे हैं। जिस तरह से गर्मियों में पूरे जिला पानी के संकट से जूझता है, यदि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट की ओर गंभीरता से ध्यान दिया जाए तो पानी के संकट का काफी हद तक समाधान हो सकता है।
भूजल के अंधाधुंध दोहन से दिनोंदिन भूजल का स्तर नीचे जा रहा है और पानी की कमी होती जा रही है। स्थिति यह है कि लोगों को पीने तक का पानी नहीं मिल पा रहा है। पानी के संकट से निपटने के लिए वर्षा जल संचय पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन, शहर में यह बात केवल कागजों तक सीमित है, क्योंकि यहां पर इस दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है। न तो लोगों को पानी के संकट के प्रति जागरूक किया जा रहा है और न ही मकानों में वर्षा जल संचय करने की पहल की जा रही है। शासन लगातार वर्षा जल संचय करने पर जोर दे रहा है। सरकारी भवनों और बहुमंजिला इमारतों में तो बिना वर्षा जल संचय के मकानों का नक्शा भी पास नहीं होता है, लेकिन शहर में धड़ल्ले से मकानों का काम चल रहा है।
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ये है उद्देश्य
मकान में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए शासन ने निर्देश दिए है। ताकि, बरसात के पानी को जमीन में पहुुंचाकर जमीन में पानी के स्तर को सुधारा जा सके। दरअसल, पक्की सड़कें और पक्के मकान बन जाने से बरसात के पानी का जमीन में रिसाव बहुत कम हो गया है। वहीं, हैंडपंप व बोरिंग से भूजल को अंधाधुंध तरीके से खींचकर बाहर निकाला जा रहा है, जिससे भूजल स्तर दिनोंदिन गिरता जा रहा है। यदि बरसात के पानी को मकान के नीचे टैंक में भरकर उसे रोका जाए तो इससे पानी रीचार्ज होगा और घरेलू कामकाज के लिए बरसात के पानी का उपयोग होगा, जिससे ताजा पानी कम खर्च होगा। यदि इसी तरह से पानी खर्च किया जाएगा तो काफी हद तक ताजा पानी बचाने में मदद मिलेगी।
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रेलवे स्टेशन भी अछूता नहीं
ललितपुर रेलवे स्टेशन पर भी पानी का संरक्षण करने के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाना प्रस्तावित है, लेकिन यहां भी अब तक यह व्यवस्था नहीं हो पाई है। इस बार मौसम विभाग ने कम बरसात की संभावना जताई है। ऐसे में यदि जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हावेस्टिंग सिस्टम लगे होते तो पानी का संरक्षण किया जा सकता था, जिससे पानी के संकट से नहीं जूझना पड़ता।
बहुमंजिला इमारतों के निर्माण व नवीन सरकारी भवनों के निर्माण में रेनवाटर हावेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने का प्रावधान किया गया है, लेकिन शहर में अभी तक किसी भी निर्माण में यह व्यवस्था नहीं की गई है।

- एसके प्रजापति, अवर अभियंता नियत क्षेत्र प्राधिकरण।
ललितपुर रेलवे स्टेशन को जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए चिह्नित किया गया है, जो प्रक्रिया में है। शीघ्र ही यहां पर यह व्यवस्था की जाएगी।
- मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, रेलवे, झांसी।
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