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बच्चों को पढ़ने के लिए दें अवसर
ब्यूरो
Updated Mon, 23 Nov 2015 12:31 AM IST
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ललितपुर। आरंभिक पठन कौशल विकास, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रशिक्षण में बच्चों को पढ़ने के लिए विभिन्न अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
बीआरसी जखौरा में संदर्भदाता सह समन्वयक बसंत जैन ने बच्चों के साथ किए जाने वाले सुझावात्मक कार्य के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों को बोलने के लिए प्रेरित करें। बच्चों को कक्षा में आपस में एक-दूसरे से बात करने, घुलने मिलने व खेलने का अवसर दें।
जब बच्चे बोल रहे हों, तो उन्हें टोकें नहीं। बच्चे को सहवातावरण में लाएं, जहां पर वह खुलकर अपनी बात कह सकें। लगातार बातचीत से शिक्षक और छात्र के बीच की दूरी समाप्त होती है। अध्यापक बच्चों को पढ़ने के लिए विभिन्न अवसर उपलब्ध कराएं।
संतोष निरंजन ने कहा कि पढ़ने का अर्थ समझकर पढ़ना है। बच्चों से वार्तालाप में उनके स्तरानुकूल प्रश्न पूछे। सह समन्वयक अशोक श्रीवास ने कहा कि शिक्षक कक्षा एक और दो के बच्चों को अधिक से अधिक बातचीत करने में दक्ष बनाएं और बच्चों को बोलने का मौका दें।
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पठन और लेखन एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने छात्रों को स्वतंत्र लेखन के लिए अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में प्रतिभागी शामिल हुए।
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बीआरसी जखौरा में संदर्भदाता सह समन्वयक बसंत जैन ने बच्चों के साथ किए जाने वाले सुझावात्मक कार्य के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों को बोलने के लिए प्रेरित करें। बच्चों को कक्षा में आपस में एक-दूसरे से बात करने, घुलने मिलने व खेलने का अवसर दें।
जब बच्चे बोल रहे हों, तो उन्हें टोकें नहीं। बच्चे को सहवातावरण में लाएं, जहां पर वह खुलकर अपनी बात कह सकें। लगातार बातचीत से शिक्षक और छात्र के बीच की दूरी समाप्त होती है। अध्यापक बच्चों को पढ़ने के लिए विभिन्न अवसर उपलब्ध कराएं।
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संतोष निरंजन ने कहा कि पढ़ने का अर्थ समझकर पढ़ना है। बच्चों से वार्तालाप में उनके स्तरानुकूल प्रश्न पूछे। सह समन्वयक अशोक श्रीवास ने कहा कि शिक्षक कक्षा एक और दो के बच्चों को अधिक से अधिक बातचीत करने में दक्ष बनाएं और बच्चों को बोलने का मौका दें।
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पठन और लेखन एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने छात्रों को स्वतंत्र लेखन के लिए अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में प्रतिभागी शामिल हुए।