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वादे तो भरपूर, पृथक राज्य कोसों दूर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 14 Feb 2017 01:09 AM IST
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bundelkhand news
- फोटो : demo
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दशकों से बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने का झुनझुना बजा रहे राजनीतिक दलों ने अब तक कोई भी ऐसा ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे यहां के लोग नगाड़े बजाकर नए राज्य का जश्न मना सकें। बुंदेलखंड राज्य के वकालत करने वाले संगठनों ने भी कोई ऐसा निर्णायक आंदोलन खड़ा नहीं किया, जिससे राजनीतिक दल अपने वादे पूरे करने को मजबूर हों। पिछले कई सालों में अलग बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा वादों, इरादों और उम्मीदों की लहरों में गोते खा रहा है।
विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी के घोषणा पत्र या विजन डॉक्यूमेंट में बुंदेलखंड राज्य की वकालत नहीं की गई है। इससे अलग राज्य के हिमायती यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह किसके साथ जाएं। भाजपा ने अपने विजन डॉक्यूमेंट में जरूर बुंदेलखंड के लिए विशेष पैकेज की बात की है, लेकिन अलग राज्य का वादा नहीं किया, जबकि उमा भारती कई मंचों से बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने का वादा कर चुकी हैं। क्षेत्र के विकास के लिए युवा बुंदेलखंड राज्य को जरूरी बताते हैं। नेता इसे भांप कर वादा तो कर देते हैं, लेकिन चुनावी परिणाम आने के बाद इसे भूल जाते हैं। फिर चुनाव नजदीक होने पर उन्हें बुंदेलखंड की याद आ जाती है।
घर-घर जाकर उठाएंगे मुद्दा
संगठन के कार्यकर्ताओं घर-घर जाकर लोगों से जागरूक करेंगे कि वह बुंदेलखंड राज्य निर्माण की बात करने वाले प्रत्याशी को ही वोट दें। जो भी दल या प्रत्याशी अलग बुंदेलखंड की बात करेगा, उसी का समर्थन किया जाएगा। कुछ दलों ने पृथक बुंदेलखंड राज्य का समर्थन किया गया है।
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-हरीश कपूर टीटू, केंद्रीय अध्यक्ष, बुंदेलखंड विकास सेना।
अलग राज्य से ही होगा विकास
विश्व में उत्तर प्रदेश पांचवां सबसे बड़ा राज्य है और इतने बड़े राज्य की बागडोर एक व्यक्ति के हाथ में होने से वास्तविक विकास संभव नहीं है। छोटे राज्यों के बनने से विकास, पर्यटन व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यहां पर्याप्त संभावनाएं हैं, लेकिन इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- हेमंत तिवारी, शिक्षक।
ठोस पहल करने वाले को वोट
अलग बुंदेलखंड का मुद्दा तो हर चुनाव में उठाया जाता है। इस बार वादा करने वाले को नहीं ठोस पहल करने वाले को चुनेंगे। जो प्रत्याशी या संगठन अलग बुंदेलखंड राज्य की बात को टालता है, तो उसका बहिष्कार कर दिया जाएगा।
राघव दुबे, गांधीनगर।
नेताओं ने सिर्फ ठगा है
बुंदेलखंड राज्य का वादा करके नेताओं ने सिर्फ यहां के जनता को ठगा है। हमारी भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले इन नेताओं को चुनाव में जवाब दिया जाएगा। जो बुंदेलखंड की बात करेगा, उसी को वोट देने की अपील घर-घर जाकर लोगों से की जाएगी।
-विवेक तिवारी, जिलाध्यक्ष, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा।
राजनीतिक दलों को तय करना होगा
अलग राज्य के मुद्दे पर ओछी राजनीति करने वाले दलों को अब तय करना होगा कि वह बुंदेलखंड के पक्ष में हैं या नहीं। जनता चाहती है कि बुंदेलखंड राज्य बने, लेकिन हमारे नेता नहीं चाहते कि इस क्षेत्र के विकास के लिए नया राज्य बनाया जाए।
अभिषेक कुमार, नई बस्ती।
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विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी के घोषणा पत्र या विजन डॉक्यूमेंट में बुंदेलखंड राज्य की वकालत नहीं की गई है। इससे अलग राज्य के हिमायती यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह किसके साथ जाएं। भाजपा ने अपने विजन डॉक्यूमेंट में जरूर बुंदेलखंड के लिए विशेष पैकेज की बात की है, लेकिन अलग राज्य का वादा नहीं किया, जबकि उमा भारती कई मंचों से बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने का वादा कर चुकी हैं। क्षेत्र के विकास के लिए युवा बुंदेलखंड राज्य को जरूरी बताते हैं। नेता इसे भांप कर वादा तो कर देते हैं, लेकिन चुनावी परिणाम आने के बाद इसे भूल जाते हैं। फिर चुनाव नजदीक होने पर उन्हें बुंदेलखंड की याद आ जाती है।
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घर-घर जाकर उठाएंगे मुद्दा
संगठन के कार्यकर्ताओं घर-घर जाकर लोगों से जागरूक करेंगे कि वह बुंदेलखंड राज्य निर्माण की बात करने वाले प्रत्याशी को ही वोट दें। जो भी दल या प्रत्याशी अलग बुंदेलखंड की बात करेगा, उसी का समर्थन किया जाएगा। कुछ दलों ने पृथक बुंदेलखंड राज्य का समर्थन किया गया है।
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-हरीश कपूर टीटू, केंद्रीय अध्यक्ष, बुंदेलखंड विकास सेना।
अलग राज्य से ही होगा विकास
विश्व में उत्तर प्रदेश पांचवां सबसे बड़ा राज्य है और इतने बड़े राज्य की बागडोर एक व्यक्ति के हाथ में होने से वास्तविक विकास संभव नहीं है। छोटे राज्यों के बनने से विकास, पर्यटन व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। यहां पर्याप्त संभावनाएं हैं, लेकिन इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- हेमंत तिवारी, शिक्षक।
ठोस पहल करने वाले को वोट
अलग बुंदेलखंड का मुद्दा तो हर चुनाव में उठाया जाता है। इस बार वादा करने वाले को नहीं ठोस पहल करने वाले को चुनेंगे। जो प्रत्याशी या संगठन अलग बुंदेलखंड राज्य की बात को टालता है, तो उसका बहिष्कार कर दिया जाएगा।
राघव दुबे, गांधीनगर।
नेताओं ने सिर्फ ठगा है
बुंदेलखंड राज्य का वादा करके नेताओं ने सिर्फ यहां के जनता को ठगा है। हमारी भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले इन नेताओं को चुनाव में जवाब दिया जाएगा। जो बुंदेलखंड की बात करेगा, उसी को वोट देने की अपील घर-घर जाकर लोगों से की जाएगी।
-विवेक तिवारी, जिलाध्यक्ष, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा।
राजनीतिक दलों को तय करना होगा
अलग राज्य के मुद्दे पर ओछी राजनीति करने वाले दलों को अब तय करना होगा कि वह बुंदेलखंड के पक्ष में हैं या नहीं। जनता चाहती है कि बुंदेलखंड राज्य बने, लेकिन हमारे नेता नहीं चाहते कि इस क्षेत्र के विकास के लिए नया राज्य बनाया जाए।
अभिषेक कुमार, नई बस्ती।