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तथ्य छिपाने के आरोप में पूर्व प्रधानाचार्य की सेवा समाप्त
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ललितपुर। श्री मर्दन सिंह इंटर कॉलेज के प्रवक्ता/ पूर्व प्रधानाचार्य को मृतक आश्रित कोटे की नौकरी में तथ्य छिपाना महंगा पड़ गया है। प्रबंधक ने छिपे तथ्य उजागर होने पर छह जनवरी 1997 से उनकी सेवा समाप्त कर दी हैं। जबकि प्रवक्ता ने की गई कार्रवाई को नियम विरुद्घ बताया है।
आरोप है कि श्री मर्दन सिंह इंटर कॉलेज में रत्नेश कुमार लिटौरिया की अनुकंपा नियुक्ति वर्ष 1997 में प्रवक्ता पद पर हुई थी। पिछले साल उन्हें अप्रैल माह में कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य का दायित्व संभालने का अवसर मिला। इसके बाद किसी ने प्रभारी प्रधानाचार्य की गलत तरीके से नियुक्ति किए जाने के संबंध में शिकायत कर दी। जिस पर प्रबंध समिति ने आपातकालीन बैठक कर अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में उप समिति गठित कर दी। जांच समिति ने रत्नेश लिटौरिया व्यायाम शिक्षक की नियुक्ति के संबंध में कागजात खंगाले और 28 जनवरी को उनकी सेवाएं उनकी ज्वानिंग तिथि से समाप्त कर दीं। वहीं, जनवरी की शुरूआत में विद्यालय में आयोग से प्रधानाचार्य आने पर प्रभारी प्रधानाचार्य का पद भी उनसे वापस ले लिया गया था।
जिसके चलते सेवा समाप्ति के आदेश में बताया गया कि उनके पिता रघुवीर शरण लिटौरिया की मृत्यु 16 नवंबर 1995 को हुई थी, उनकी माता परिषदीय विद्यालय के कन्या प्राथमिक विद्यालय तालबेहट में अध्यापिका के पद पर सेवारत थी। इससे स्पष्ट है कि व्यायाम शिक्षक ने तथ्यों को छिपाते हुए अनुकंपा नियुक्ति पाई है। इसके बाद नियुक्ति समिति की बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक ने अवैधानिक अनुकंपा नियुक्ति समाप्त करने का अनुमोदन दे दिया। इस पर प्रबंधक मनोज भट्ट ने मौलिक नियुक्ति 6 जनवरी 1997 से धारित पद से तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त कर दी।
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श्री मर्दन सिंह इंटर कॉलेज के प्रबंधक द्वारा तथ्य छिपाने के मामले में प्रवक्ता रत्नेश कुमार लिटौरिया की सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है।
-रामशंकर, जिला विद्यालय निरीक्षक
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मेरी नौकरी को गलत नहीं ठहराया जा सकता
सेवा समाप्ति की कार्रवाई नियम विपरीत की गई है। वर्ष 1999 से पहले माता-पिता की नौकरी में रहते हुए अनुकंपा नौकरी लेने के संबंध में कोई अड़चन नहीं थी और हमारी नियुक्ति वर्ष 1997 की है। इस तरह मेरी नौकरी को गलत नहीं ठहराया जा सकता है। वर्ष 1999 में शासनादेश में बदलाव किया गया। न तो जांच आख्या दी गई और न ही स्पष्टीकरण मांगा गया, साथ ही कार्रवाई करते समय चयन बोर्ड से अनुमति लेना आवश्यक है लेकिन ऐसा नहीं किया गया। फाइल से दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप भी गलत हैं। इस संबंध में जेडी व डीआईओएस को प्रतिवेदन दिया गया है।
रत्नेश लिटौरिया, बर्खास्त प्रवक्ता/पूर्व प्रधानाचार्य, श्री मर्दन सिंह इंटर कॉलेज
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आरोप है कि श्री मर्दन सिंह इंटर कॉलेज में रत्नेश कुमार लिटौरिया की अनुकंपा नियुक्ति वर्ष 1997 में प्रवक्ता पद पर हुई थी। पिछले साल उन्हें अप्रैल माह में कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य का दायित्व संभालने का अवसर मिला। इसके बाद किसी ने प्रभारी प्रधानाचार्य की गलत तरीके से नियुक्ति किए जाने के संबंध में शिकायत कर दी। जिस पर प्रबंध समिति ने आपातकालीन बैठक कर अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में उप समिति गठित कर दी। जांच समिति ने रत्नेश लिटौरिया व्यायाम शिक्षक की नियुक्ति के संबंध में कागजात खंगाले और 28 जनवरी को उनकी सेवाएं उनकी ज्वानिंग तिथि से समाप्त कर दीं। वहीं, जनवरी की शुरूआत में विद्यालय में आयोग से प्रधानाचार्य आने पर प्रभारी प्रधानाचार्य का पद भी उनसे वापस ले लिया गया था।
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जिसके चलते सेवा समाप्ति के आदेश में बताया गया कि उनके पिता रघुवीर शरण लिटौरिया की मृत्यु 16 नवंबर 1995 को हुई थी, उनकी माता परिषदीय विद्यालय के कन्या प्राथमिक विद्यालय तालबेहट में अध्यापिका के पद पर सेवारत थी। इससे स्पष्ट है कि व्यायाम शिक्षक ने तथ्यों को छिपाते हुए अनुकंपा नियुक्ति पाई है। इसके बाद नियुक्ति समिति की बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक ने अवैधानिक अनुकंपा नियुक्ति समाप्त करने का अनुमोदन दे दिया। इस पर प्रबंधक मनोज भट्ट ने मौलिक नियुक्ति 6 जनवरी 1997 से धारित पद से तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त कर दी।
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श्री मर्दन सिंह इंटर कॉलेज के प्रबंधक द्वारा तथ्य छिपाने के मामले में प्रवक्ता रत्नेश कुमार लिटौरिया की सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है।
-रामशंकर, जिला विद्यालय निरीक्षक
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मेरी नौकरी को गलत नहीं ठहराया जा सकता
सेवा समाप्ति की कार्रवाई नियम विपरीत की गई है। वर्ष 1999 से पहले माता-पिता की नौकरी में रहते हुए अनुकंपा नौकरी लेने के संबंध में कोई अड़चन नहीं थी और हमारी नियुक्ति वर्ष 1997 की है। इस तरह मेरी नौकरी को गलत नहीं ठहराया जा सकता है। वर्ष 1999 में शासनादेश में बदलाव किया गया। न तो जांच आख्या दी गई और न ही स्पष्टीकरण मांगा गया, साथ ही कार्रवाई करते समय चयन बोर्ड से अनुमति लेना आवश्यक है लेकिन ऐसा नहीं किया गया। फाइल से दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप भी गलत हैं। इस संबंध में जेडी व डीआईओएस को प्रतिवेदन दिया गया है।
रत्नेश लिटौरिया, बर्खास्त प्रवक्ता/पूर्व प्रधानाचार्य, श्री मर्दन सिंह इंटर कॉलेज