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एआरटीओ मारपीट मामले में विपक्ष आक्रामक, भाजपा चुप

Mon, 21 Oct 2019 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Oct 2019 01:18 AM IST
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politics begin in ARTO beaten case
politics begin in ARTO beaten case
एआरटीओ मारपीट प्रकरण में शुरू हो गई सियासत
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ललितपुर/महरौनी। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के साथ हुई मारपीट के मामले में कार्रवाई कराने के लिए विपक्षी नेता लामबंद हो गए हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी की महरौनी इकाई अधिकारी के खिलाफ हमलावर हो गई है। भाजपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता है कि वह राजनेता कौन है और किस पार्टी से है, तब तक इंतजार करेंगे।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी विवेक शुक्ला ने पिछले दिनों कोतवाली में मारपीट के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराकर राजनीतिक गलियारे में खलबली मचा दी थी। उनकी तहरीर में जिले के एक प्रभावशाली राजनेता का उल्लेख किया गया है। लेकिन, इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस पर विपक्षी दलों को राजनीति करने का मौका मिल गया है। गत दिवस उन्होंने एकजुटता दिखाते हुए मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उन्होंने बालू, राशन एवं भूमाफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए सत्तारूढ़ दल के लोगों को घेरने का प्रयास किया था।
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लेकिन, इसके बाद भी भाजपा के नेता चुप बने हुए हैं। वह एआरटीओ की तहरीर पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि ऐसा संभव नहीं है कि एआरटीओ राजनेता को नहीं जानते हों, फिर भी उन्होंने नामजद रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। जब तक इस मामले में नाम उजागर नहीं होता है, तब तक पार्टी शांत रहेगी। हालांकि, कुछ छुटभैये नेता सोशल मीडिया पर माहौल बनाते जरूर देखे गए। उधर, भारतीय जनता पार्टी की महरौनी इकाई ने अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खेलते हुए बर्खास्त करने की मांग की है।
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भाजपाइयों ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए अधिकारी निजी वाहन पर पद नाम पट्टिका लगाए हुए हैं। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन पर आशुतोष सिंह सेंगर, अरविंद कौशिक, शिवा सिंह तोमर, देवेंद्र तिवारी, अजीत पाठक, टीटू पटैरिया, हरीशंकर सोनी आदि के हस्ताक्षर हैं।
दिन भर सोशल मीडिया पर छाया रहा
एआरटीओ द्वारा दर्ज कराई रिपोर्ट का मामला दिन भर सोशल मीडिया पर छाया रहा। इस मामले में कई लोग टीका-टिप्पणी कर रहे हैं। कोई एआरटीओ को घेर रहा है तो कोई बचाव में खड़ा नजर आया। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मामले को भ्रष्टाचार और अपराध से जोड़ते हुए इस पर खूब बहस हो रही है।
किसकी है इनोवा?
एआरटीओ की तहरीर में इनोवा कार के दरवाजे से प्रहार करने की बात कही गई है। आखिर किस नेता की इनोवा कार है? इसे लेकर भी लोग खूब चटखारे ले रहे हैं। कोई किसी की इनोवा बता रहा है तो कोई किसी। चंद लोगों के पास यह गाड़ी होने से लोगों के शक की सुई यहां-वहां घूम रही है। आज इस मुद्दे पर पान, चाय की दुकानों व होटल में बैठे लोग चर्चा करते रहे।

एआरटीओ जिम्मेदार व्यक्ति हैं, उन्हें नामदज रिपोर्ट लिखवाना चाहिए थी। रिपोर्ट में राजनेता का उल्लेख किया गया है, उन्हें राजनेता को पहचानना चाहिए था। एआरटीओ के भ्रष्टाचार की किसी ने उनसे अब तक शिकायत नहीं की है। यदि ऐसा कोई मामला आता है तो विभागीय कार्रवाई कराई जाएगी।
- जगदीश सिंह लोधी, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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