{"_id":"5f51fc8ad6503c06c30f14cfb5d8e2c9","slug":"pipe-water-projects-would-be-examined-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" पाइप पेयजल योजनाओं की होगी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाइप पेयजल योजनाओं की होगी जांच
ब्यूरो
Updated Thu, 25 Feb 2016 12:47 AM IST
विज्ञापन
ललितपुर। सूखा के कारण पानी का संकट दिनोदिन गहराता जा रहा है। वहीं, पाइप पेयजल योजनाएं कागजों पर ओके दर्शायी जा रहीं हैं, जबकि ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर दी है। उन्होंने एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
जिले में 49 ग्राम समूह व एकल ग्राम पाइप पेयजल योजनाएं संचालित हो रही हैं। इस योजना का मकसद गांव में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था। करोड़ों रुपये खर्च कर इन योजनाओं पर काम किया गया और इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर पाइप पेयजल योजनाएं ठप चल रही हैं, लेकिन उन्हें कागजों में संचालित होना दिखाया जा रहा है।
शहर से मात्र पांच किमी दूर ग्राम रौंडा में पाइप पेयजल योजना को ओके दिखाया जा रहा है, लेकिन योजना वास्तव में बंद है। अमर उजाला ने 13 फरवरी के अंक में ग्राम रौंडा में संचालित पाइप पेयजल योजना की हकीकत उजागर की थी। साथ ही फाइलों में पानी उगल रहे नल शीर्षक से पेज नंबर दो पर खबर प्रकाशित की थी। वहीं, गत दिवस ग्राम रौंडा के ग्रामीणों ने पानी नहीं मिलने की शिकायत भी जिलाधिकारी कार्यालय में की थी।
विज्ञापन
इसे संज्ञान में लेते हुए डीएम ने सभी पाइप पेयजल योजनाओं का सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि सत्यापन में जल निगम और जल संस्थान के अफसरों को नहीं लगाया गया है, बल्कि सभी उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित टीम में सहायक अभियंताओं को लगाया गया है। जिलाधिकारी ने एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
भ्रामक सूचनाएं दे रहे अफसर
ललितपुर। पाइप पेयजल योजनाएं ठप चल रही हैं, लेकिन इनकी रिपोर्ट ओके बताई जा रही है। ग्राम रौंडा में पाइप पेयजल योजना की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। कमोबेश यही स्थिति अन्य गांवों की है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी शासन को ज्यादातर योजनाओं के संचालन की जानकारी दे रहे हैं।
विज्ञापन
जिले में 49 ग्राम समूह व एकल ग्राम पाइप पेयजल योजनाएं संचालित हो रही हैं। इस योजना का मकसद गांव में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था। करोड़ों रुपये खर्च कर इन योजनाओं पर काम किया गया और इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर पाइप पेयजल योजनाएं ठप चल रही हैं, लेकिन उन्हें कागजों में संचालित होना दिखाया जा रहा है।
विज्ञापन
शहर से मात्र पांच किमी दूर ग्राम रौंडा में पाइप पेयजल योजना को ओके दिखाया जा रहा है, लेकिन योजना वास्तव में बंद है। अमर उजाला ने 13 फरवरी के अंक में ग्राम रौंडा में संचालित पाइप पेयजल योजना की हकीकत उजागर की थी। साथ ही फाइलों में पानी उगल रहे नल शीर्षक से पेज नंबर दो पर खबर प्रकाशित की थी। वहीं, गत दिवस ग्राम रौंडा के ग्रामीणों ने पानी नहीं मिलने की शिकायत भी जिलाधिकारी कार्यालय में की थी।
विज्ञापन
इसे संज्ञान में लेते हुए डीएम ने सभी पाइप पेयजल योजनाओं का सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि सत्यापन में जल निगम और जल संस्थान के अफसरों को नहीं लगाया गया है, बल्कि सभी उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित टीम में सहायक अभियंताओं को लगाया गया है। जिलाधिकारी ने एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
भ्रामक सूचनाएं दे रहे अफसर
ललितपुर। पाइप पेयजल योजनाएं ठप चल रही हैं, लेकिन इनकी रिपोर्ट ओके बताई जा रही है। ग्राम रौंडा में पाइप पेयजल योजना की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। कमोबेश यही स्थिति अन्य गांवों की है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी शासन को ज्यादातर योजनाओं के संचालन की जानकारी दे रहे हैं।