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20 गांवों को मिल रही मात्र छह से सात घंटे बिजली
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बिजली स्टेशन
- फोटो : ????? ??????
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डोंगराखुर्द। बिरधा विद्युत सब स्टेशन के अंतर्गत नाराहट फीडर के करीब बीस गांवों में चौबीस घंटे में छह से सात घंटे ही बिजली मिल रही है। कई बार तो पूरे दिन में मात्र तीन से चार घंटे ही बिजली आपूर्ति उपभोक्ताओं को मिल रही है।
वर्षों पुराने जर्जर तार, आंधी, बारिश या हवा में ही बिजली व्यवस्था लड़खड़ा जाती है। कभी लो-वोल्टेज तो कभी फाल्ट के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली दिन में ही कई बार बिजली ठप हो जाती है। नाराहट फीडर के सबसे प्रभावित गांवों में ग्राम नाराहट, डोंगराखुर्द, दिगवार, बरेजा, तरावली, पटना, गुरयाना, अर्जुन खिरिया, बनयाना, मकरीपुर, बछरई, दौलतपुर, गुढ़ा खिरिया, चादौरा, गौना, महाराजपुरा, ललितापुर, धौलपुरा, गदौरा आदि गांव के उपभोक्ताओं को दिन भर में तीन से साढ़े तीन घंटे और रात्रि में करीब ढाई से तीन घंटे ही बिजली आपूर्ति मिल पा रही है। जब ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने बिजली संबंधी समस्या के बारे में कराया।
24 घंटे में करीब तीन से चार घंटे ही बिजली मिल रही है। बिजली के बिना गरमी में रातें निकालना भी काफी मुश्किल हो जाता है। कई बार में कई दिनों तक बिजली नहीं आती है। - जीतू समाधिया, गौना।
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हल्की हवा चलने व बारिश होने के कारण बिजली की लाइनें खराब हो जाती हैं और कहीं तार गिरने व खंभा टूटने से स्थिति और भी खराब हो जाती है। इसके चलते कई बार तो एक सप्ताह तक बिजली गुल रहती है। वर्तमान में भी चार से पांच घंटे मुश्किल से बिजली मिल पा रही है। - भूप्रताप सिंह, डोंगराखुर्द।
नाराहट फीडर के गांवों को रोस्टर के अनुसार पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। लोगों को मोबाइल चार्ज करना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार तो बिजली नहीं आने पर आटा चक्की भी नहीं चलती, ऐसे में गेंहूं पिसाने के लिए दूर के गांवों में या फिर बिरधा जाना पड़ता है। - उदय सिंह बुंदेला, गौना।
गांव में मुश्किल से कभी दो और किसी दिन तीन घंटे ही बिजली मिल रही है, वह भी लो-वोल्टेज से, जो किसी काम की नहीं रहती है। यदि कर्मचारियों को फोन लगाया जाता है तो संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है। नाराहट फीडर की लाइन पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है, जिसे बदलवाना जरुरी है, तभी यहां की स्थिति में सुधार हो सकता है। - शिवशंकर तिवारी, अर्जुन खिरिया।
रोस्टर में कटौती होती है और यदि तेज हवा या बारिश आती है तो उस समय बिजली प्रभावित होती है। यदि कहीं समस्या है तो निराकरण कराया जाएगा। - जगदीश प्रसाद, उपखंड अधिकारी द्वितीय, विद्युत।
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वर्षों पुराने जर्जर तार, आंधी, बारिश या हवा में ही बिजली व्यवस्था लड़खड़ा जाती है। कभी लो-वोल्टेज तो कभी फाल्ट के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली दिन में ही कई बार बिजली ठप हो जाती है। नाराहट फीडर के सबसे प्रभावित गांवों में ग्राम नाराहट, डोंगराखुर्द, दिगवार, बरेजा, तरावली, पटना, गुरयाना, अर्जुन खिरिया, बनयाना, मकरीपुर, बछरई, दौलतपुर, गुढ़ा खिरिया, चादौरा, गौना, महाराजपुरा, ललितापुर, धौलपुरा, गदौरा आदि गांव के उपभोक्ताओं को दिन भर में तीन से साढ़े तीन घंटे और रात्रि में करीब ढाई से तीन घंटे ही बिजली आपूर्ति मिल पा रही है। जब ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने बिजली संबंधी समस्या के बारे में कराया।
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24 घंटे में करीब तीन से चार घंटे ही बिजली मिल रही है। बिजली के बिना गरमी में रातें निकालना भी काफी मुश्किल हो जाता है। कई बार में कई दिनों तक बिजली नहीं आती है। - जीतू समाधिया, गौना।
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हल्की हवा चलने व बारिश होने के कारण बिजली की लाइनें खराब हो जाती हैं और कहीं तार गिरने व खंभा टूटने से स्थिति और भी खराब हो जाती है। इसके चलते कई बार तो एक सप्ताह तक बिजली गुल रहती है। वर्तमान में भी चार से पांच घंटे मुश्किल से बिजली मिल पा रही है। - भूप्रताप सिंह, डोंगराखुर्द।
नाराहट फीडर के गांवों को रोस्टर के अनुसार पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। लोगों को मोबाइल चार्ज करना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार तो बिजली नहीं आने पर आटा चक्की भी नहीं चलती, ऐसे में गेंहूं पिसाने के लिए दूर के गांवों में या फिर बिरधा जाना पड़ता है। - उदय सिंह बुंदेला, गौना।
गांव में मुश्किल से कभी दो और किसी दिन तीन घंटे ही बिजली मिल रही है, वह भी लो-वोल्टेज से, जो किसी काम की नहीं रहती है। यदि कर्मचारियों को फोन लगाया जाता है तो संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है। नाराहट फीडर की लाइन पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है, जिसे बदलवाना जरुरी है, तभी यहां की स्थिति में सुधार हो सकता है। - शिवशंकर तिवारी, अर्जुन खिरिया।
रोस्टर में कटौती होती है और यदि तेज हवा या बारिश आती है तो उस समय बिजली प्रभावित होती है। यदि कहीं समस्या है तो निराकरण कराया जाएगा। - जगदीश प्रसाद, उपखंड अधिकारी द्वितीय, विद्युत।