{"_id":"5e597b1d8ebc3ef409734748","slug":"only-18-doctors-posted-in-32-ayurvedic-hospitals-of-the-district-lalitpur-news-jhs1613070123","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले के 32 आयुर्वेदिक अस्पतालों में सिर्फ 18 चिकित्सक की तैनाती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले के 32 आयुर्वेदिक अस्पतालों में सिर्फ 18 चिकित्सक की तैनाती
विज्ञापन
ललितपुर। जिले के आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सालय चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। यहां पर 34 चिकित्सकों के सापेक्ष मात्र 18 चिकित्सक कार्यरत हैं। यही नहीं फार्मासिस्टों की भी कमी है। इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्घति के इलाज की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
आयुुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के मकसद से जनपद में 32 आयुर्वेदिक और दो यूनानी चिकित्सालय संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन, इनमें चिकित्सकों व फार्मासिस्टों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। ऐसी स्थिति में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रहीं हैं। वर्तमान में लोगों का रुझान एलोपैथी चिकित्सा पद्घति से कम होकर आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की ओर बढ़ रहा है। इससे आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इन दवाओं के सेवन से किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं होता और मर्ज जड़ से खत्म हो जाती है।
जिले में 32 आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित हैं, जिनमें 33 चिकित्सकों के पद सृजित हैं, इसके सापेक्ष मात्र 18 चिकित्सक ही तैनात हैं। यूनानी पद्घति के दो चिकित्सालय खोले गए हैं, जिसमें दो चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें केवल एक चिकित्सक की तैनाती है। ऐसे में एक यूनानी चिकित्सालय चिकित्सक के अभाव में सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। वहीं, आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी के चलते 14 अस्पतालों में तालाबंदी की नौबत आ गई थी, लेकिन फार्मासिस्टों के सहारे अस्पताल संचालित हो रहे हैं। यहां पर 37 फार्मासिस्टों के सापेेक्ष मात्र 16 ही कार्यरत हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर रूप से मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
विज्ञापन
अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। चिकित्सक मिलते ही नियुक्त किए जाएंगे।
- डॉ. चारूशीला शरण, जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी
विज्ञापन
आयुुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के मकसद से जनपद में 32 आयुर्वेदिक और दो यूनानी चिकित्सालय संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन, इनमें चिकित्सकों व फार्मासिस्टों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। ऐसी स्थिति में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रहीं हैं। वर्तमान में लोगों का रुझान एलोपैथी चिकित्सा पद्घति से कम होकर आयुर्वेदिक और होम्योपैथी की ओर बढ़ रहा है। इससे आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इन दवाओं के सेवन से किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं होता और मर्ज जड़ से खत्म हो जाती है।
विज्ञापन
जिले में 32 आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित हैं, जिनमें 33 चिकित्सकों के पद सृजित हैं, इसके सापेक्ष मात्र 18 चिकित्सक ही तैनात हैं। यूनानी पद्घति के दो चिकित्सालय खोले गए हैं, जिसमें दो चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें केवल एक चिकित्सक की तैनाती है। ऐसे में एक यूनानी चिकित्सालय चिकित्सक के अभाव में सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। वहीं, आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी के चलते 14 अस्पतालों में तालाबंदी की नौबत आ गई थी, लेकिन फार्मासिस्टों के सहारे अस्पताल संचालित हो रहे हैं। यहां पर 37 फार्मासिस्टों के सापेेक्ष मात्र 16 ही कार्यरत हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर रूप से मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
विज्ञापन
अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। चिकित्सक मिलते ही नियुक्त किए जाएंगे।
- डॉ. चारूशीला शरण, जिला आयुर्वेद व यूनानी अधिकारी