{"_id":"68b354ac8ab56bf6e2061d24","slug":"one-should-never-hide-his-strength-in-devotion-to-god-nirbhay-sagar-lalitpur-news-c-131-1-ltp1001-141776-2025-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान की भक्ति में कभी अपनी शक्ति नहीं छिपानी चाहिए : निर्भय सागर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान की भक्ति में कभी अपनी शक्ति नहीं छिपानी चाहिए : निर्भय सागर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। आचार्य निर्भयसागर महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति में कभी अपनी शक्ति नहीं छिपानी चाहिए। यदि हममें नहाने की ताकत है तो अभिषेक करने में कोताही नहीं करनी चाहिए। पूजन की भावना होनी चाहिए। यदि पाप से डर और पुण्य कार्यों में अग्रणी हों तो यकीनन संसार में आर्जव धर्म का विस्तार दिखाई देने लगेगा और संसार के समस्त जीव सुखी हो जाएंगे। वह शनिवार को जैन पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटा मंदिर में पर्यूषण पर्व पर धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
मुनि शिवदत्त सागर महाराज ने कहा कि माया संसार का भ्रम है। संसार में जैसा होता है, वैसा दिखना नहीं चाहते तभी मायाचारी का सहारा लेना पड़ता है। जिस दिन हम जैसा है वैसा दिखेंगे मायाचारी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। धर्म सभा के प्रारंभ में तत्वार्थ सूत्र का वाचन आचार्य संघ के सानिध्य में हुआ। अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि सुदत्त सागर महाराज एवं मुनि पदमदत्त सागर महाराज के सानिध्य में श्रावकों ने पर्वराज पर्यूषण पर्व पर प्रभू अभिषेक शांति धारा की। इस दौरान उन्होंने आर्जव धर्म को विस्तार से समझाया। मध्याह्न में तत्वार्थ सूत्र को आचार्य श्री ने श्रावकों को अपने चिंतन द्वारा समझाया।
आदिनाथ बड़ा मंदिर, चंद्रप्रभु मंदिर डोडाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर में श्रावकों ने प्रभु का पूजन अर्चन कर धर्मलाभ लिया। सायंकाल आरती के उपरांत जैन अटामंदिर में हुई धर्मसभा में ब्रह्मचारिणी लवली ने कहा कि पुरुषार्थ के अनुसार गति मिलेगी। छल, कपट कर कहां जाएंगे। मायाचारी से बचें, जीवन यात्रा में लक्ष्य बनाना होगा तभी कल्याण है। सायंकाल जैन मंदिरों में आरती शास्त्र प्रवचन के उपरांत बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुनि शिवदत्त सागर महाराज ने कहा कि माया संसार का भ्रम है। संसार में जैसा होता है, वैसा दिखना नहीं चाहते तभी मायाचारी का सहारा लेना पड़ता है। जिस दिन हम जैसा है वैसा दिखेंगे मायाचारी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। धर्म सभा के प्रारंभ में तत्वार्थ सूत्र का वाचन आचार्य संघ के सानिध्य में हुआ। अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि सुदत्त सागर महाराज एवं मुनि पदमदत्त सागर महाराज के सानिध्य में श्रावकों ने पर्वराज पर्यूषण पर्व पर प्रभू अभिषेक शांति धारा की। इस दौरान उन्होंने आर्जव धर्म को विस्तार से समझाया। मध्याह्न में तत्वार्थ सूत्र को आचार्य श्री ने श्रावकों को अपने चिंतन द्वारा समझाया।
विज्ञापन
आदिनाथ बड़ा मंदिर, चंद्रप्रभु मंदिर डोडाघाट, शांतिनगर मंदिर गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर में श्रावकों ने प्रभु का पूजन अर्चन कर धर्मलाभ लिया। सायंकाल आरती के उपरांत जैन अटामंदिर में हुई धर्मसभा में ब्रह्मचारिणी लवली ने कहा कि पुरुषार्थ के अनुसार गति मिलेगी। छल, कपट कर कहां जाएंगे। मायाचारी से बचें, जीवन यात्रा में लक्ष्य बनाना होगा तभी कल्याण है। सायंकाल जैन मंदिरों में आरती शास्त्र प्रवचन के उपरांत बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया।
विज्ञापन