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बुजुर्ग वार्ड पर जडा़ ताला तो कैसे होगा बुजुर्गों का इलाज
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ललितपुर। जिले में उपचार की इकलौती आस जिला अस्पताल पुरुष की व्यवस्थाएं कोरोना काल में लड़खड़ा गईं हैं। जिला अस्पताल के बुजुर्ग वार्ड में सात माह से ताला पड़ा है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में 60 वर्ष की उम्र के मरीजों को विशेषज्ञों से इलाज की सुविधा देने के लिए बुजुर्ग वार्ड (जेरिएट्रिक वार्ड) है। वार्ड में दस बेड व विशेष मरीजों के लिए दो अलग से बेड बनाए गए हैं। वार्ड में एसी, कूलर आदि सुविधाएं हैं। इसके साथ ही वार्ड में ईसीजी मशीन व अन्य जांच की सुविधा है।
अस्पताल में आने वाले वृद्ध मरीजों को चिकित्सकों की सलाह पर भर्ती किया जाता है। वार्ड में एक चिकित्सक भी तैनात है। फिजियोथेेरेपिस्ट से भी सुविधा मिल रही है। लेकिन कोरोना काल के दौरान मार्च में लॉकडाउन के चलते सरकारी अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बंद की गई और इमरजेंसी सेवा में उपचार व जांच की सुविधा सुचारु रखी गई थी। ऐसे में मरीज उपचार के लिए परेशान हो गए। जिसके बाद जुलाई माह में सर्जन की ओपीडी सेवाएं शुुरूहुई। अगस्त माह से सामान्य ओपीडी को भी शुरु किया गया। तब से स्वास्थ्य सेवाएं मिलना तो बहाल हो गईं।
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लेकिन सात माह बीतने के बाद भी बुजुर्ग वार्ड को पूरी तरह से बंद रखा गया है। ऐसे में बुजुर्ग उपचार के लिए भटक रहे हैं। वृद्ध मरीजों को भर्ती होने की स्थिति में अस्पताल के तृतीय तल पर जाना पड़ता है। कई अकेले मरीज को वार्ड तक पहुंचने और भर्ती के दौरान पानी के लिए भूतल तक आना पड़ रहा है। इससे कई परेशान होकर आधे-अधूरे उपचार के बाद वापस हो रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार मौन बने हुए हैं।
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बुजुर्ग वार्ड छह माह से बंद कर दिया गया है। अब इस वार्ड में बुुजुर्ग संक्रमितों को भर्ती किया जा रहा है।
- डॉ. अमित चतुर्वेदी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष
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जिला अस्पताल में 60 वर्ष की उम्र के मरीजों को विशेषज्ञों से इलाज की सुविधा देने के लिए बुजुर्ग वार्ड (जेरिएट्रिक वार्ड) है। वार्ड में दस बेड व विशेष मरीजों के लिए दो अलग से बेड बनाए गए हैं। वार्ड में एसी, कूलर आदि सुविधाएं हैं। इसके साथ ही वार्ड में ईसीजी मशीन व अन्य जांच की सुविधा है।
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अस्पताल में आने वाले वृद्ध मरीजों को चिकित्सकों की सलाह पर भर्ती किया जाता है। वार्ड में एक चिकित्सक भी तैनात है। फिजियोथेेरेपिस्ट से भी सुविधा मिल रही है। लेकिन कोरोना काल के दौरान मार्च में लॉकडाउन के चलते सरकारी अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बंद की गई और इमरजेंसी सेवा में उपचार व जांच की सुविधा सुचारु रखी गई थी। ऐसे में मरीज उपचार के लिए परेशान हो गए। जिसके बाद जुलाई माह में सर्जन की ओपीडी सेवाएं शुुरूहुई। अगस्त माह से सामान्य ओपीडी को भी शुरु किया गया। तब से स्वास्थ्य सेवाएं मिलना तो बहाल हो गईं।
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लेकिन सात माह बीतने के बाद भी बुजुर्ग वार्ड को पूरी तरह से बंद रखा गया है। ऐसे में बुजुर्ग उपचार के लिए भटक रहे हैं। वृद्ध मरीजों को भर्ती होने की स्थिति में अस्पताल के तृतीय तल पर जाना पड़ता है। कई अकेले मरीज को वार्ड तक पहुंचने और भर्ती के दौरान पानी के लिए भूतल तक आना पड़ रहा है। इससे कई परेशान होकर आधे-अधूरे उपचार के बाद वापस हो रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार मौन बने हुए हैं।
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बुजुर्ग वार्ड छह माह से बंद कर दिया गया है। अब इस वार्ड में बुुजुर्ग संक्रमितों को भर्ती किया जा रहा है।
- डॉ. अमित चतुर्वेदी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष