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कब्जा से गायब हो गए फुटपाथ

Wed, 01 Jun 2016 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 01 Jun 2016 01:50 AM IST
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Occupy pavement disappeared
atikirmn, lalitpur news - फोटो : amar ujala
ललितपुर।  शहर में दिनोंदिन बढ़ता अतिक्रमण लाइलाज होता जा रहा है। सड़क पर  कब्जा हो जाने से राहगीरों को परेशानी हो रही है। लेकिन, इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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घंटाघर से लेकर सावरकर चौक, नदीपुरा, मवेशी बाजार, कटरा बाजार और नझाई बाजार में मार्केट फैला हुआ है। इसके अलावा 26  वार्डों वाली नगर पालिका में पालिका की 627 दुकानें बनी हुई हैं। वहीं,  जगदीश मार्केट, नझाई बाजार, लोहा पीतल बाजार, कटरा बाजार, सराफा बाजार   सहित अन्य बाजारों में भवन स्वामियों ने अपने निचले तल पर दुकानें बना रखीं  हैं। दुकानों को या तो वह स्वयं संचालित कर रहे हैं अथवा किरायेदार चला  रहे हैं।
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लेकिन, ज्यादातर दुकानदार सड़कों को घेरकर अपना सामान रख  लेते हैं। चाहे नगर पालिका के किराए दार हों अथवा अन्य प्राइवेट भवन  स्वामियों के दुकानदार, सभी किराए की दुकान पाकर अपनी सीमा को बढ़ा लेते  हैं। हालातों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जितनी कुल दुकान होती  है, उससे वह काफी अधिक सीमा तक सड़क पर अपना सामान फैला लेते हैं। इससे  आवागमन में परेशानी होने लगती है।
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स्थिति यह है कि घंटाघर से लेकर नदी पुल  तक, पुल से मवेशी बाजार तक, सावरकर चौक से तालाब पुरा मार्ग पर, फल व सब्जी  मंडी, नझाई से वाटर वर्क्स, इसके अलावा घंटाघर से अजीतापुरा रोड आदि पर  दुकानदारों द्वारा इतना अधिक अतिक्रमण कर लिया गया है कि दोपहिया वाहन निकालना भी आसान नहीं है। लोहा पीतल बाजार से पैदल निकलना भी मुश्किल है।  यह बात दीगर है कि वर्तमान में मार्केट में ज्यादा भीड़ नहीं है, वरना भीड़  के कारण काफी समय बरबाद होता है।

इस अतिक्रमण से हर वर्ग के लोग परेशान  हैं। वहीं, आवागमन बाधित होने से यातायात पुलिस को भी मशक्कत करनी पड़ रही  है। घंटाघर से सावरकर चौक की ओर वन वे ट्रैफिक प्रणाली लागू है। इस कारण  यातायात पुलिस दिन भर मशक्कत में जुटी रहती है।

बहुत से दुकानदार  अपनी दुकानों का सामान बाहर निकालकर फुटपाथ घेर लेते हैं, जिससे पैदल और  साइकिल सवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ज्यादातर दुकानदार नालियों पर कब्जा जमाए हैं, जिससे सुबह झाडू लगाने वालों को परेशानी होती  है। आए दिन उनका विवाद भी होता है। अतिक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन और  पालिका प्रशासन ने कई बार अभियान चलाया। दुकानदारों की सीमारेखा भी तय कर  दी गई, लेकिन कुछ दिन सामान्य रहने के बाद फिर से जस की तस स्थिति बन गई  है।

पालिका भूली जुर्माना लगाना
नगर पालिका ने करीब छह माह पूर्व अतिक्रमण पर सख्ती बरतने का निर्णय लिया  था। इस दौरान पालिका ने तय किया था कि जो अतिक्रमण करेगा, उस पर प्रतिदिन  के हिसाब से जुर्माना तय किया जाएगा। लेकिन, पालिका नियम बनाने के बाद  स्वयं ही इसे भूल गई। और अब स्थिति यह है कि जगह- जगह पूर मार्केट अतिक्रमण  की चपेट में है।

फल विक्रेताओं ने दूसरी ओर डेरा जमाया
ललितपुर।  पुराने तहसील तिराहा के सामने फल विक्रेता अतिक्रमण किए थे। पिछले दिनों  अभियान चलाकर इन्हें हटाया गया तो इन्होंने सामने अतिक्रमण कर लिया। अब  स्थिति यह है कि इन दुकानों पर आने वाले ग्राहकों की मोटरसाइकिल सड़क घेर  कर खड़ी रहतीं हैं, जिससे अन्य लोगों को निकलने में भी दिक्कत का सामना  करना पड़ता है।

वर्षों से चल रहा सिलसिला
शहर  में अतिक्रमण न हो, इसके लिए वर्षों से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा  है, लेकिन कुछ दिन सामान्य रहने के बाद फिर से अतिक्रमण का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसका अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है, जिससे समस्या  लाइलाज बन गई है।

तय नहीं जुर्माना
नगर पालिका  ने अतिक्रमणकारियों पर जुर्माना लगाने का निर्णय लिया था, लेकिन इस पर कोई  ठोस निर्णय नहीं हो सका। जुर्माना की राशि भी तय नहीं की जा सकी है।

नगर पालिका का नहीं इस ओर ध्यान
ललितपुर।  नगर पालिका भले ही शहर में अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी निभाती हो, परंतु  नगर पालिका भवन के दुकानदारों द्वारा किए गए सड़क पर अतिक्रमण को हटाने  में नाकाम है। घंटाघर स्थित डा. शादीलाल दुबे कांपलेक्स में नगर पालिका का  कार्यालय है। इसमें नगर के विकास से संबंधित कार्यों को अंजाम दिया जाता  है। नगर पालिका ने लोगों के आने- जाने के लिए पीछे का दरवाजा खोल दिया है,  लेकिन दरवाजे तक पहुंचने में दुकानें परेशानी पैदा कर रही हैं।


यहां की  संकरी गलियों में दुकानदार अपनी टंकियां और कूलर आदि सामान सड़क किनारे तक  रख देते हैं। ऐसे में लोगों को पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। नगर  पालिका इस ओर ध्यान नहीं दे रही है, जिससे नगरवासी परेशान हैं।
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